
आमतौर पर शादी के लिए वरपक्ष बैंड बाजा और बारातियों के साथ कन्यापक्ष के दरवाजे पर पहुंचते हैं, यानी दूल्हा दुल्हन के द्वार पर पहुंचता है, जिसे 'द्वार लगना' कहते हैं.
पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया थाना क्षेत्र में बिल्कुल उलटा हुआ. दुल्हन ही बारात लेकर दूल्हे के द्वार पहुंच गई. दरअसल, जब वरपक्ष ने रिश्ता तय करने के बाद विवाह से इनकार कर दिया, तब दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के दरवाजे पर पहुंच गई. लड़के वाले घर से फरार हो गए हैं, लड़की वहीं बैठी हुई है.
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि क्षेत्र के रहने
वाले लालबहादुर सहनी की पुत्री गीता कुमारी का विवाह बैरिया के मियांपुर
निवासी केदार चौधरी के पुत्र दीपक से तय हुआ था. दोनों परिवार पहले से भी
रिश्तेदार हैं.
विवाह से ठीक एक दिन पहले वरपक्ष ने विवाह से इनकार कर दिया. इसके बाद गीता अपने परिजनों और ग्रामीणों के साथ बुधवार की रात दूल्हे के दरवाजे पर पहुंची तो दूल्हा सहित समूचा परिवार फरार हो गया. गीता गुरुवार को भी अपने परिजनों के साथ केदार चौधरी के दरवाजे पर धरना दे रही है.
लड़की के भाई नवल सहनी ने बताया, "16 नवंबर को दीपक से उसकी बहन गीता की शादी तय हुई थी, लेकिन अब केदार चौधरी अपने बेटे की शादी गीता से करने से इनकार कर रहे हैं. इसके बाद हमारे परिवार के लोग और मेरी बहन ने फैसला किया है कि जब तक शादी नहीं होगी, तब तक केदार के दरवाजे पर ही धरने पर रहेंगे."
गीता का भी कहना है कि जब तक उसकी शादी दीपक से नहीं होगी वह नहीं लौटेगी. उल्लेखनीय है कि दीपक की बहन की शादी गीता के भाई ध्रुप से 10 साल पहले हुई थी. उसके बाद दीपक हमेशा हरसिद्धि जाता था. इसी क्रम में दोनों में प्यार हो गया. जब दोनों के परिजनों को इसकी खबर लगी तब दोनों की शादी कर देने की बात तय हो गई. लड़की के भाई नवल ने बताया कि दहेज के रूप में पिछले साल बतौर दो लाख रुपये और एक बाइक भी केदार चौधरी को दी गई है.
मियांपुर दुबौलिया पंचायत के पूर्व मुखिया केदार चौधरी ने बताया कि लड़के के पिता केदार चौधरी द्वारा शादी से इनकार करने पर ऐसी नौबत आई है. उन्होंने कहा कि कानून और सामाजिक तौर पर यह शादी होनी चाहिए. अगर लड़का पक्ष ऐसा नहीं करता है तो उन पर कानूनी कार्रवाई करने की पहल होगी.
इधर, बैरिया के थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि किसी भी पक्ष से अभी कोई आवेदन नहीं दिया है. आवेदन आने पर कार्रवाई होगी.
विवाह से ठीक एक दिन पहले वरपक्ष ने विवाह से इनकार कर दिया. इसके बाद गीता अपने परिजनों और ग्रामीणों के साथ बुधवार की रात दूल्हे के दरवाजे पर पहुंची तो दूल्हा सहित समूचा परिवार फरार हो गया. गीता गुरुवार को भी अपने परिजनों के साथ केदार चौधरी के दरवाजे पर धरना दे रही है.
लड़की के भाई नवल सहनी ने बताया, "16 नवंबर को दीपक से उसकी बहन गीता की शादी तय हुई थी, लेकिन अब केदार चौधरी अपने बेटे की शादी गीता से करने से इनकार कर रहे हैं. इसके बाद हमारे परिवार के लोग और मेरी बहन ने फैसला किया है कि जब तक शादी नहीं होगी, तब तक केदार के दरवाजे पर ही धरने पर रहेंगे."
गीता का भी कहना है कि जब तक उसकी शादी दीपक से नहीं होगी वह नहीं लौटेगी. उल्लेखनीय है कि दीपक की बहन की शादी गीता के भाई ध्रुप से 10 साल पहले हुई थी. उसके बाद दीपक हमेशा हरसिद्धि जाता था. इसी क्रम में दोनों में प्यार हो गया. जब दोनों के परिजनों को इसकी खबर लगी तब दोनों की शादी कर देने की बात तय हो गई. लड़की के भाई नवल ने बताया कि दहेज के रूप में पिछले साल बतौर दो लाख रुपये और एक बाइक भी केदार चौधरी को दी गई है.
मियांपुर दुबौलिया पंचायत के पूर्व मुखिया केदार चौधरी ने बताया कि लड़के के पिता केदार चौधरी द्वारा शादी से इनकार करने पर ऐसी नौबत आई है. उन्होंने कहा कि कानून और सामाजिक तौर पर यह शादी होनी चाहिए. अगर लड़का पक्ष ऐसा नहीं करता है तो उन पर कानूनी कार्रवाई करने की पहल होगी.
इधर, बैरिया के थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि किसी भी पक्ष से अभी कोई आवेदन नहीं दिया है. आवेदन आने पर कार्रवाई होगी.
