चाहिए अब सर्जिकल स्ट्राइक से भी कुछ और बड़ा

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Image result for gurdaspur martyr sukhraj singh   गुरदासपुर से शहीद सुखराज सिंह की अंतिम यात्रा देख रहा था एक चैनल पर | सुखराज सिंह की बेटी एक परिजन के काँधे पर बैठी थी और उस बच्ची की आँखों की शून्यता देख कर ऐसा लग रहा था जैसे, उस मासूम बच्ची को अभी कुछ पता ही नहीं है की उसके साथ क्या हुआ है |
  बड़ी शर्म आती है ऐसे वक़्त में यह देख कर की हमारे कुछ नेता ऐसी राष्ट्र असुरक्षा के समय संसद में खड़े नोट बंदी जैसे आर्थिक मुद्दे को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगाने में ही व्यस्त हैं | आखिर कितना और खून चाहिए इन लोगों का मूंह धोकर इनकी नींद जगाने के लिए ? जब वो अपनी नींद से जाग कर देश के इन शहीद लालों के लिए सोचेंगे | नई दिल्ली १ में अपने ड्राइंग रूम में बैठ कर क्या यह लोग अंदाजा भी लगा पा रहे हैं की गुरदास पुर जिले के शहीद सुखराज सिंह की उस मासूम बेटी से , इस भ्रष्ट राजनीति की अन्तराष्ट्रीय सहिष्णुता नीति ने क्या छीन लिया है |
    अंदाजा हो भी कैसे सकता है ? जब ये सभी चाहे किसी भी पार्टी के हों, सब के सब उठते, बैठते, सोते, जागते अगर किसी बात के बारे में सोचते हैं तो वो बात है कुर्सी, और सिर्फ कुर्सी | जान जाए पर कुर्सी न जाए - की नीति पर चलने वाली इस राजनीति को यह तो याद है की नोट बंदी हुई है, अमुक नेता ने इतना पैसा काले से सफ़ेद कर लिया है, अमुक राज्य में अमुक सरकार आ गयी है, अमुक पार्टी से समर्थित अमुक व्यापारी की अमुक मोबाइल कंपनी नोट बंदी के चलते धड़ल्ले से माल छापने में व्यस्थ है |
     किसी को नहीं दिखाई दे रहा शहीदों के परिवार का दुःख | यह तो याद है की युवराज का ट्विटर अकाउंट हैक हो गया लेकिन यह याद नहीं की एक सिरफिरा अपने आप को हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर कहने वाला आतंकी मूसा खुले आम एक विडियो जारी करता है और देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देता हुआ कह रहा है की -" यदि आप हम पर हमला करोगे तो हम भी आपके परिवारों को नहीं छोड़ेंगें "
     इस वक़्त ज़रूरत है सर्जिकल स्ट्राइक से भी कुछ और बड़ा करने की, ताकि इन शहीदों की चिताओं को ज़रा ठंडक मिल सके वर्ना उन दुश्मनों में जो सामने खड़े गोलियां बरसा रहे हैं और हम में कोई फर्क नहीं रह जाएगा जो साथ खड़े सबकुछ देख कर भी नोट बंदी को लेकर बस अपनी जेब के बारे में सोच रहे है |
    जागो यार अब नहीं जागोगे ... तो कब जागोगे ? नोट बंदी से तो निपट लेंगे जैसे तैसे कल देश ही न रहा तो क्या करेंगे ?

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