
देश की राजधानी दिल्ली में राजस्थान की सत्ता में बदलाव के संकेत महसूस हो रहे हैं बताया जा रहा हे की राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मोदी के बीच मधुर सम्बन्ध नहीं हैं, कहा जा रहा है की निकट भविष्य में राजस्थान की सत्ता में बदलाव की अफवाह जोरों पर है यह भी चुर्चा है की यह बदलाव पहले ही होना था लेकिन बिहार और दिल्ली के परिणामों ने इस बदलाव को कुछ समय के लिए रोक दिया गया।
अब जब लगभग 4 राज्यों की सत्ता भाजपा की झोली मैं हैं तो फिर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं राज्य के बहुत सारे विधायक वसुंधरा के विरोध मैं हैं। वसुंधरा का रूखा व्यवहार इसका मुख्य कारण है राजसत्ता के मद मैं वसुंधरा राजे से विधायक ही नहीं अपितु कई पत्रकार, उद्योग और सरकारी कर्मचारियों के संगठन भी वसुंधरा की कार्य शेली और उनकी भाषा शेली से नाराज हैं, जिससे कोई भी कारण बताकर राज्य सत्ता में बदलाव किया जा सकता हे।
चर्चा तो यहाँ तक है की राजे को किसी भी राज्य का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता हे। दिसम्बर तक राजस्थान में मुख्यमंत्री के बदले जाने की प्रबल संभावनाएं हैं और राजनीती संभावनाओं का खेल भर ही तो है अफवाह तो यहाँ तक है की मोदी के करीबी और अभी यू पी भाजपा के प्रभारी ओमप्रकाश माथुर को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, मुख्यमंत्री कोई भी हो राज्य की जनता को कोई मतलब नहीं लेकिन जनता, और पत्रकारों से अनवरत सम्पर्क करने वाला राजनेता सर्वोत्तम शासक माना जाता है और राजस्थान की मुख्यमंत्री अभी तक इस कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई हैं उनको अपने अहम और सत्ता मद से बाहर निकलना होगा चाहे वो मुख्यमंत्री हों या किसी भी प्रदेश की भविष्य में राज्यपाल बने।
