राजनीति में अंदरूनी तौर पर जो होता है, उससे आम जनता अनभिज्ञ ही रहती है। जनता को तो सिर्फ वही पता चल पाता है, जिसे सार्वजनिक होने में सामान्यतः राजनीतिज्ञों को कोई खतरा नहीं होता। लोकप्रियता के कम होने का खतरा सबसे ज्यादा डरावना होता है और यही वजह रहती है कि कई राजनीतिज्ञों की अनेक बातें सामने नहीं आ पातीं। मगर जब उन्हीं का कोई करीबी अपनी आत्मकथा लिखता है तो उसमें वह ऐसे-ऐसे खुलासे करता है जो आम जनता को चौंका देते हैं।यह किस्सा भी ऐसी ही एक आत्मकथा का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता व केंद्रीय मंत्री रहे नटवरसिंह ने बेबाकी से अपनी जीवनी लिखी है। उन्होंने एक जगह खुलासा करते हुए लिखा है कि 'पाकिस्तान की
प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो ने एक बार भारत के ताकतवर राज परिवार की बहू यानी सोनिया गांधी को सलाह दी थी कि वे कभी राजनीति में न आएं।' इतना ही नहीं, बेनजीर ने तो यह तक कहा था कि 'यदि आप अपने बच्चों की
सलामती चाहती हैं तो उन्हें किसी भी तरह से इस राजनीति से दूर ही रखें'। किस्सा उस दौर का है जब श्रीलंका में सक्रिय लिट्टे उग्रवादियों ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक राजनीतिक रैली में हत्या कर दी थी। उस सनसनीखेज षड्यंत्र से पूरा देश सकते और गुस्से में था। राजीव गांधी के जाने के बाद कांग्रेस पार्टी और देश के नेतृत्व के लिए जनता भी गांधी परिवार की ओर देख रही थी। उसी दौर में तमाम विदेशी नेता संवेदनाएं प्रकट करने सोनिया गांधी से मिलने भारत आए थे। इनमें पाकिस्तान के राजनीतिक परिवार की वारिस बेनजीर भुट्टो भी पहुंचीं।
उस दौरान नटवर सिंह सहानुभूति और संवेदनात्मक सहयोग के लिए अधिकांश समय सोनिया गांधी के साथ रहते थे। ऐसे में पाकिस्तान की नेता बेनजीर भुट्टो ने सोनिया गांधी को सलाह दी कि उन्हें अपने बच्चों की खातिर सियासत से दूर ही रहना चाहिए। इस पर नटवर ने प्रतिवाद करते हुए कहा, 'आप जो सलाह दे रही हैं, उस पर खुद अमल क्यों नहीं किया?'
गौरतलब है कि बेनजीर के पिता जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और फौजी तख्तापलट के बाद उन्हें फांसी दे दी गई थी। बेनजीर ने बाद में अपने पिता की विरासत संभाली थी।
