एक सफाईकर्मी महिला ने बदली दलित महिलाओं की ज़िन्दगी

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Image result for "सौन्दर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली   अहमदाबाद की महादलित महिला यानी सफाईकर्मी मंजुलाबेन दलितों में भी दलित है। यानी सफाईकर्मी जाति की है, लेकिन उन्होंने अपना जीवन किसी वामपंथी दोगले या दलित एक्टिविस्ट्स के बहकावे में बर्बाद नही किया। बल्कि समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया।  
     मंजुलाबेन ने देखा की सफाईकर्मी संगठित नही है इसलिए उन्हें अच्छी सेलेरी और अन्य सुविधाए नही मिल पाती और देश में सफाई करने का कार्य पूरी तरह असंगठित लोगो के हाथो में है। फिर उन्होंने गुजरात के सहकारी मिल्क यूनियन अमूल से प्रेरणा लेकर 90 के दशक में सफाईकर्मियों का एक सहकारी संगठन बनाया, जिसका नाम रखा "सौन्दर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली" और कई सरकारी संस्थायो के सामने अपनी संस्था का प्रजेंटेशन दिया। उनका विचार था की जब किसी चीज का एन्युअल मेंटेनेंस कांट्रेक्ट हो सकता है तो एन्युअल क्लिनिग कांट्रेक्ट भी होना चाहिए। फिर उन्हें पहली सफलता मिली जब अहमदाबाद के प्रसिद्ध संस्था एनआईडी यानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिजाईनिंग ने अपनी पूरी कैम्पस का साफ़-सफाई का कांट्रेक्ट मंजुलाबेन की संस्था को दे दिया। मंजुलाबेन ने दो सालो तक बड़ी अच्छी तरह से कैम्पस की साफ़-सफाई का काम करवाया। फिर तो उनके पास कई संस्थाओ के प्रस्ताव आने लगे, आज उनके पास ओएनजीसी, गुजरात सचिवालय, विधानसभा, आईआईएम आदि संस्थाओ की साफ-सफाई का कांट्रेक्ट है। मंजुलाबेन की संस्था आज एक करोड़ का टर्न ओवर करती है, जिसे आगे दस करोड़ तक करने का टारगेट है। उनकी संस्था से जुडी महिलाओ को आज हर रोज 250 रूपये मिलते है साथ ही पीएफ आदि भी मिलता है।
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