एसिड रिफलक्स तब होता है एसोफेगल स्पिलन्टर गैस को एसोफेगस में जाने से नहीं रोक पाता है। यह स्टोमक और एसोफेगस (आहार नली) के बीच होता है। इससे पेट और छाती में जलन होती रहती है।
एसिडिटी से होने वाली दिक्कत
1. कभी तो एसिडिटी अपने-आप ही ठीक हो जाती है, पर अगर यह लंबे समय तक बनी रहे और इलाज ठीक से नहीं किया गया तो दिक्कत बढ़ सकती है। यह पेप्टिक अल्सर में भी बदल सकता है। ऐसे में आपको एसिडिटी के इलाज के लिए एन्डोस्कोपी करानी पड़ेगी।
जिन लोगों को एसिडिटी की दिक्कत है वो अपने खाने-पीने का ख़ास ध्यान रखें। अपने खाने में उन चीज़ों को शामिल न करें, जिनसे एसिड बनता हैं। अगर आप उलटे हाथ की तरफ सोते हैं यह सही है, क्योंकि उलटे यानी बायीं करवट सोना पेट के लिए सही रहता है।
2. जब भी आप सोएं, अपने सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोएं। इससे आपको सोते समय सीने में जलन महसूस नहीं होगा। अगर आपको कोई और परेशानी न हो तो आप सिर के नीचे दो या तीन तकिए लगा सकते हैं। अगर आपको एसिडिटी की ज्यादा दिक्कत है तो आपका बेड कुछ ऊपर ऊठा जाना चाहिए, जैसे हॉस्पिटल के बेड होते हैं। अगर आपके पास ऐसे बेड नहीं हैं तो आप सिरहाने तकिया या कोई ऊंची चीज़ लगा सकते हैं।
3. जब भूख लगे तभी खाएं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा करके। कोशिश करें कि आपको खाना स्किप करने की ज़रूरत न पड़े, क्योंकि बीच में कभी खाना नहीं खाने पर जब भूख लगती है तो ज्यादा खाया जाता है। ज्यादा खाने से हज़म होने में दिक्कत होती है, जिससे एसिड बन सकता है। इसलिए कम खाएं, लेकिन टाइम से खाएं।
4. खाने को अच्छे से चबाकर खाना चाहिए, क्योंकि चबाकर खाने से स्लाइव बनता है जिससे हज़म होने में दिक्कत नही होती और एसिडिटी भी नहीं बनती। स्लाइव एक नेचुरल एल्कलाइन है, जो नेचुरल तरीके से एसिड को क्षार में बदल देता है। मिंट के स्वाद से बनी चीज़ें या कफ़ सिरप न पिएं, क्योंकि मिंट एसिड को और ज्यादा बढ़ा देता है।
5. एसिडिटी जैसी दिक्कत होने पर ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। गर्मियों में ठंडा पानी पिएं, क्योंकि पानी एसिडिटी को कम करने में मदद करता है। रोज़ सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं। रात में ज्यादा खाना न खाएं। खाना खाने के बाद टहलें। इससे खाना सही से हज़म हो जाता है। सोने से कम से कम 4 घंटे पहले खाना खाएं। इसलिए खाना 8 बजे के आसपास खा लेना चाहिए।
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