Headline
Loading latest headlines...

यहां होता है हनुमान भोज, ऐसे खाते हैं पत्तलों में खाना

0
Translate Post:
     बेगूसराय के जयमंगला गढ़ स्थित देवी मंदिर में हर साल बड़े स्तर बंदरों के लिए भोज का आयोजन किया जा रहा है। सालों से चली आ रही परंपरा रविवार को निभाई गई। यहां इस भोज को हनुमान भोज कहा जाता है। यहां के लोग कहते हैं कि बंदरों को अच्छी तरह से आमंत्रित कर भोजन कराने से देवी माता औऱ हनुमानजी खुश होते हैं। इस हनुमान भोज के लिए नियमानुसार बंदरों को आमंत्रित किया जाता है। इसके लिए भोज का आयोजन करने वाले लोग उन पेड़ों के पास जाते हैं जहां बंदर बैठे रहते हैं। फिर उनको होने वाले भोज में सपरिवार आमंत्रित करते हैं। इसके बाद दूसरे दिन भोजन में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। एक तरह से ये भोजन उसी तरह से बनता है जैसे किसी बरात के लिए बनाया जाता है।भोजन बनने के बाद दरियां बिछाई जाती है, और पत्तल में कई तरह का खाना मिठाई और फल परस दिए जाते हैं। इसके बाद बंदरों से अनुरोघ किया जाता है कि आकर भोजन गृहण कर लें। इसके बाद वहां पहले से घूम रहे बंदरों के लिए वह स्थान खाली छोड़ दिया जाता है। थोड़ी देर में ही बंदरों के झुंड दरियों पर बैठ खाना खाने लगता है। बंदरों को भोजन कराने की ये प्रक्रिया दिनभर चलती रहती है। भोजन के दौरान बंदर की पत्तल में रखा कोई खाने का सामान खत्म हो जाता है तो उसे फिर से परोसा जाता है।
    गढ़पुरा निवासी पंडित आशुतोष झा ने बताया कि जयमंगलागढ़ में माता के गण के रूप में बंदर ही हैं। उनकी सेवा से माता प्रसन्न होती हैं। इससे बल, बुद्धि संस्कार बढ़ता है। इसी कारण प्रति वर्ष हनुमान भोज का आयोजन किया जाता है।



Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)
  • Loading Posts...