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ऐसे आया विचार
डॉ. पुनीता वर्मा ने बताया कि कॉलेज की दो छात्रएं जब मेट्रो स्टेशन पर खड़ी थी तो मेट्रो के आने के कारण टनल से तेज हवा निकली, जिससे उनके कपड़े और बाल उड़ने लगे उनको लगा इस हवा में वेग है और इसका उपयोग किया जा सकता है। उसके बाद उन्होंने यह विचार हमें दिया और हम लोगों ने उनके साथ इसे आगे बढ़ाया। उस वक्त लगा कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल ईंधन व बिजली की लागत में गिरावट के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में काफी कमी होगी बल्कि यह बेहतर विकल्प के रूप में भी सामने आएगा। इसके बाद हमने छात्रों के साथ मेट्रो स्टेशनों को खोजना शुरू किया, जहां पर हवा का वेग अधिक है। सबसे अधिक हवा का वेग चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन पर है। वहीं पर टरबाइन लगाए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट में मेट्रो का योगदान महत्वपूर्ण है।
डीयू ने दिए 15 लाख रुपये
एक अनुमान के मुताबिक, तीव्र गति मेट्रो द्वारा उत्पादित वायु से प्रतिदिन २ किलो वाट से 50 किलो वाट की सीमा में विद्युत उत्पन्न किया जा सकता है। यह ऊर्जा मेट्रो प्लेटफार्मो को अपनी ऊर्जा जरूरतों के मामले में कुछ हद तक स्वावलंबी बनाने के लिए उपयोग की जा सकती है। यह ऊर्जा बैटरी में भी संग्रहीत की जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के लिए डीयू ने 15 लाख रुपये दिए हैं लेकिन इसके सफल प्रयोग के बाद इससे कई गुना कीमत बिजली के रूप में वसूली जा सकती है।
