उदयपुर: झील में कूदे व्यक्ति के लिए 'फरिश्ता' बने नागरिक सुरक्षा जवान गौरव बागोरा, जान पर खेलकर बचाई जिंदगी
दाईजी की पुलिया और गणगौर घाट के पास हुआ घटनाक्रम; स्थानीय लोगों के सहयोग से निकाला बाहर, ICU में उपचार जारी
विशेष रिपोर्ट | उदयपुर (राजस्थान) : झीलों की नगरी उदयपुर में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जहाँ नागरिक सुरक्षा विभाग (Civil Defence) के जवान गौरव बागोरा ने अदम्य साहस और तत्परता का परिचय देते हुए एक व्यक्ति को डूबने से बचा लिया। जवान ने अपनी जान की परवाह किए बिना झील में छलांग लगा दी और समय रहते व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गौरव की इस बहादुरी और त्वरित सूझबूझ की पूरे शहर में सराहना हो रही है।
📌 दाना डालते समय अचानक घटी घटना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 3:00 बजे दाईजी की पुलिया के सामने स्थित गणगौर घाट पर नागरिक सुरक्षा जवान गौरव बागोरा रोज की भांति मछलियों को दाना डाल रहे थे। उसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति अचानक आया और उसने गहरी झील में छलांग लगा दी।
व्यक्ति को पानी में छटपटाते और डूबते देख गौरव बागोरा ने बिना एक पल गंवाए झील में छलांग लगा दी। उन्होंने स्थानीय नागरिकों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला।
🚑 इंसानियत की मिसाल: तत्काल पहुंचाया अस्पताल
व्यक्ति को झील से बाहर निकालने के तुरंत बाद गौरव बागोरा ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने बिना समय गंवाए पीड़ित को नजदीकी इमरजेंसी अस्पताल पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
📱 पर्स से मिला लाइसेंस, दोस्त को भेजा था भावुक संदेश
घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के अनुसार, पीड़ित के पर्स से एक ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुआ है, जिससे उसकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, घटना से ठीक पहले व्यक्ति द्वारा अपने एक दोस्त को भेजा गया एक व्हाट्सएप/मोबाइल संदेश भी सामने आया है। इस संदेश में लिखा था:
"भाई, अब तेरे भाई के जाने का वक्त आ गया है।"
इस संदेश के सामने आने के बाद यह अंदेशा जताया जा रहा है कि व्यक्ति मानसिक तनाव या किसी व्यक्तिगत परेशानी के कारण आत्मघाती कदम उठाने पहुंचा था। हालांकि, उसने यह कदम क्यों उठाया, इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगी।
🎖️ साहस और इंसानियत की चौतरफा सराहना
यदि समय रहते जवान गौरव बागोरा वहां मौजूद न होते और तुरंत निर्णय न लेते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। गौरव की इस मुस्तैदी और बहादुरी ने साबित कर दिया कि संकट के समय दूसरों की रक्षा के लिए तत्पर रहना ही सच्ची इंसानियत है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और शहरवासियों ने गौरव बागोरा के इस साहसिक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

