वह कहते हैं कि कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे जिद जल्द त्याग दें, वरना यदि
वह जिद्दी बन गए तो उनके लिए ही मुश्किल होगी। एक अन्य मनोविज्ञानी का कहना
है कि बच्चों की मानसिकता को समझना बेहद जरूरी होता है। अभिभावकों को यह
देखना चाहिए कि उनके बच्चों की दिलचस्पी किस क्षेत्र में है और किस विषय को
वह पसंद नहीं करता। इस नापसंद का कारण पता लगाना चाहिए और फिर इस तरीके से
बच्चों को प्यार से समझा कर उसकी नापसंद दूर करने की कोशिश करनी चाहिए कि
उस विषय में रुचि लेने लगे। यदि उसकी नापसंद का विषय पढ़ने के लिए उस पर
जोर डाला गया तो वह जिद्दी हो जाएगा और उस विषय को बिल्कुल पढ़ना नहीं
चाहेगा।
बच्चों को जिद्दी बना सकता है कॉम्टीशन का दबाव
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