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तब तक भारत का एक विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ ........ सड़को पर भूख से तड़पता रहा

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श्री वशिष्ठ नारायण सिंह जी
   सन् 1961 में बिहार बोर्ड में गणित के टॉपर, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय से सन् 1969 में पीएचडी की तदोपरान्त NASA (associated scientists pro 1972) तक रहें, इसके बाद स्वदेश सेवा के उदेश्य से भारत लौटे और IIT कानपुर में 5 बर्ष तक प्राध्यापक रहें। सन् 1977 में दिमाग़ी संतुलन बिगड़ जाने के कारण प्राध्यापन का कार्य छोड़ना पडा। घर की आर्थिक स्थिती ठीक नहीँ होने के कारण सुचारू रूप से इलाज नहीँ चल सका। उस समय की सरकार ने इस व्यक्ति में अपने वोट बैंक नहीँ नजर आई और ये व्यक्ति बिहार (सिवान) की सड़को पर भूख से तड़पता रहा और बिहार कि सरकार और केंद्र की सरकार ने अपने दायित्व से मुख मोड़ लिया और न कोई मानवाधिकार के ठेकेदारो ने अपना पुरस्कार लौटाया और न कोई प्रेस ने इस व्यक्ति के साथ न्याय किया और हम भारत के लोग मुखदर्शक बन बैठे रहे।
     तब तक भारत का एक विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ ........सिवान के सड़को पर भूख से तड़पता रहा। ऐसे वशिष्ठ नारायण सिंह, बेशक हम भारत के लोग और हम बिहार के लोग आप के इस तप को समझ नहीं पाए, क्योंकि आप हमारे वोट बैक के आधार नहीँ थे, और न कोई सामजिक क्रांति कि अलख आप में नजर आयी थी .....हे गणित महात्मन आप को ये देश या बिहार याद करे या न करें लेकिन बिहार बोर्ड और NASA बहुत याद करेगा।

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