आम आदमी के लिए बुरी खबर है. गर्मियां शुरू होते ही बिजली महंगी होने की खबर आने लगी है. दरअसल बात ये है कि कोयले की कमी हो रही है, जिसका असर प्लांट लोड फैक्टर पर पड़ रहा है.कैपेसिटी यूटीलाइजेशन पूरा न हो पाने से इस सीजन की गर्मियों में पावर एक्सचेंज में बिजली की हाजिर कीमत बढ़ सकती है, यानी इस साल गर्मियों में बिजली के दाम ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं. गर्मियों में जब मांग पीक लेवल पर पहुंचेगी, तब बिजली की दरों में उसी तरह से बढ़ोत्तरी हो सकती है.
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के ताजा आंकड़े के अनुसार स्वतंत्र बिजली परियोजनाओं (आईपीपी) यानी निजी क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं का क्षमता उपयोग (पीएलएफ) फरवरी 2018 में 52.54 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 59.54 प्रतिशत था. आंकड़े के अनुसार केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं की पीएलएफ आलोच्य महीने में बढ़कर 76.59 प्रतिशत रहा, जो इससे पूर्व वर्ष के इसी महीने में 72.93 प्रतिशत था.
विशेषज्ञों का कहना है कि कोयले की कमी, बिजली वितरण कंपनियों से पेमेंट में देरी, इंपोर्टेड कोयले के भाव में उतार-चढ़ाव और उठाव को लेकर समझौते नहीं होने से आईपीपी गर्मियों में बिजली की मांग में बढ़ोत्तरी को पूरा करने समस्या होगी. इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार आईईएक्स में बिजली की दर मार्च महीने में पिछले महीने के मुकाबले 24 फीसदी बढ़कर 4.02 रुपए प्रति यूनिट पर पहुंच गई है.
