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एक मां के सैकड़ों सवाल, सवाल उस मां के जिसकी आठ साल की बेटी से सामूहिक बलात्कार कर गला घोंट दिया गया, सवाल उस मां के जिसकी बच्ची के साथ किए गए अपराध ने मज़हबी लक़ीरों को और गहरा कर दिया है. 'बच्ची हमारी... उसने क्या खाया था?क्या गुमाया था उसने?क्या चोरी किया था? उन्होंने क्यों मारा?' उधर दूर से ले गया. पता नहीं गड्डी में ले गये,पता नहीं कैसे उठा के ले गया,पता नहीं किस तरह मारा?...'
'हमको यही अफ़सोस है... मारा किस तरह से मारा उसे' सवाल हैं कि रुकते नहीं. एक के बाद एक. या एक मां के कोमल दिल की गहराइयों से फूट पड़ता दर्द! कठुआ के दूघर नाला की पहाड़ियों पर जब वो हमपर सवालों की झड़ियां लगा रही होती हैं तो मेरे ज़हन में आठ साल की बलात्कार का शिकार हुई उनकी बेटी का चेहरा आ जाता है.
दुख में डूबी मां मीडिया को बताती हैं, "पहले तीन बेटियां थीं मेरी, अब दो ही रह गई हैं." उस बेटी को उन्होंने भाई को दे दिया था, भाई की बेटी की एक हादसे में मौत के बाद. हादसे के वक़्त पीड़िता के असली माता-पिता सांबा में डेरा डाले थे. उनकी गोद ली बच्ची अपने मामू के साथ कठुआ में उस गांव में रह रही थी.
सात दिनों के बाद भी शव मिलने और उसे हासिल करना कोई आसान काम नहीं था. पिता बताते हैं, "पुलिसवाले कहने लगे कि आपके बकरवालों में से ही किसी ने मारा होगा. वो कह रहे थे गांववाले तो ऐसा बुरा काम नहीं कर सकते."
शलवार जंपर पहने और हरी शाल ओढ़े बच्ची की मां कहती हैं, "अपनी मौत मर जाती तो सबर कर लेते. बोलते मर गया अपने से. दुनिया मरती है वो भी मर गई." क्रीम-कलर की शलवार-क़मीज़ पहने और चेक गमछे की पगड़ी बांधे पीड़िता के पिता बताते हैं, ''हम अपनी बेटी को अपने क़ब्रिस्तान में दफ़न भी नहीं कर पाये. उसे हमें रात में ही दूसरे गांव ले जाना पड़ा.''
