माँ की ममता कानूनी दांव-पेंचों में उलझी..हाल ही में कुछ दिनों पहले एक नवजात बच्ची को उसको जन्म देने वाली माँ ने झाड़ियों में फेंक दिया गया। लेकिन कानपुर नगर निवासिनी शालू यादव ने उस बच्ची को उठाकर हंसपुरम के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाकर उसका इलाज करवाया। बच्ची से शालू का इतना लगाव हो गया कि वो उसे कानूनी तौर पर अपनी पुत्री बनाने को तैयार हो गईं।
उन्होंने बताया कि जब बच्ची उन्हें मिली थी तो बहुत से लोगों एवं चाइल्ड लाइन को उन्होंने फ़ोन किया कि कोई इस लड़की की जान बचा ले मगर कोई भी आगे नही आया। जिस पर उन्होंने खुद अस्पताल में उसे भर्ती कराया। अभी तक बिटिया के इलाज में 15,000 रूपये भी वह खर्च कर चुकी हैं। अब जब बिटिया स्वस्थ हो गई है तो चाइल्ड लाइन वाले उस बिटिया पर अपना हक जताने आ गए हैं और बोल रहे हैं कि इस बिटिया पर आपका कोई भी अधिकार नही है, आप कानूनन बिटिया को अपने पास नही रख सकते हैं। माननीय न्यायालय ही ये निर्धारित करेगा कि बिटिया किसके पास रहेगी।
सरकार भी यह चाहती है कि अनाथ बच्चों का भविष्य बने और जब इन मासूम बच्चों की तरफ कोई हाँथ बढ़ाता है तो कानूनन उसे इतना मजबूर कर दिया जाता है कि वो अनाथ बच्चे को सहारा देने की बजाय बेऔलाद रहना ही पसंद करता है।
