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जब अकूत संपत्ति की लालच में सब्जी बेचने वाले का लड़का बन गया टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड

एटीएस ने पुणे से किया गिरफ्तार
    गोरखपुर।। टेरर फंडिंग के मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी एटीएस की रडार पर कई ऐसे सफेदपोश हैं, जिन्‍होंने कम समय में अकूत संपत्ति अर्जित की है। गोरखपुर से मोबाइल विक्रेता भाईयों नसीम-अरशद, मुशर्रफ उर्फ निखिल राय, सुशील राय, दयानंद और मुकेश की 24 मार्च को गिरफ्तारी के बाद से सब्‍जी विक्रेता के बेटे रमेश शाह को एटीएस ने पुणे से गिरफ्तार कर लिया है और अब लखनऊ लाने की तैयारी में है।
     बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हरिशंकर अपनी पत्‍नी सुशीला के साथ 30 साल पहले गोरखपुर आए तो यहीं के होकर रह गए। उनके परिवार में बड़े बेटे रमेश शाह, के अलावा एक छोटा बेटा और तीन बे‍टियां हैं, दो बेटियों की वे शादी कर चुके हैं। गोरखपुर के शाहपुर थानाक्षेत्र के बिछिया के सर्वोदयनगर कालोनी में उन्‍होंने जमीन तो खरीद ली, लेकिन मकान नहीं बनवा पाए। मोहद्दीपुर चारफाटक ओवरब्रिज के नीचे बरसों से सब्‍जी की दुकान चलाने वाले हरिशंकर ने बताया कि उनकी दुकान ठीक-ठाक चलती है।
      उन्होनें बताया कि जब बेटे का नाम टेरर फंडिंग से जुड़ा तो पुलिस उन्‍हें उठाकर ले गई थी। चार दिन तक शाहपुर थाने में रखने के बाद उन्‍हें छोड़ा गया। पुलिस ने उनका पहचान पत्र, आधार कार्ड और मोबाइल भी अपने पास रख लिया। उन्‍होंने बताया कि पुलिस उनसे बस यही पूछती रही कि उनके बेटे रमेश शाह के पास इतने रुपए कहां से आए कि उसने मार्ट खोल लिया। पुलिस ने उनके सभी रिश्‍तेदारों और जानने वालों का नाम और पता भी नोट किया है।
      हरिशंकर के बड़े बेटे रमेश शाह ने सात माह पहले मेडिकल कॉलेज रोड पर सत्‍यम मार्ट नाम से सुपर मार्केट खोला था। हरिशंकर ने बताया कि बेटे रमेश शाह की शादी हो चुकी है, उसके दो बच्‍चे भी हैं। उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली में साली की शादी में शामिल होने की बात कहकर घर से निकला था। उसके बाद से ही वो कहां है इसका पता नहीं था।
      वहीं रमेश शाह की मां बताती हैं कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे घर बनवा सकें इसलिए टीनशेट का कच्‍चा मकान बनाकर ही रहते हैं। उनका बड़ा बेटा रमेश शाह भी उनके साथ ही रहता रहा है। वो 25 दिन पहले साली की शादी में शामिल होने के लिए दिल्‍ली गया था। उसके बाद से अभी तक नहीं लौटा है। वे बताती है कि अक्‍सर वो काम पर बाहर जाता रहा है और 15 से 20 दिन बाद ही वापस लौटता है। उन्‍होंने बताया कि सात माह पहले उसने असुरन-मेडिकल कॉलेज रोड पर सत्‍यम मार्ट के नाम से सुपर मार्केट खोला था। उन्‍होंने बताया कि उसने प्रॉपर्टी डीलिंग और कंपनी में काम से पैसे जुटाए थे। उन्‍होंने भी 10 लाख रुपए उसकी मदद के लिए दिए थे।
     चाहें जो कुछ भी हो, ये तो साफ है कि एटीएस की रडार पर आए ऐसे लोगों का बचना मुश्किल है, जिन्‍होंने कम समय में अधिक संपत्ति अर्जित कर रसूखदारों की श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इसके साथ ही उनके आतंकियों से सांठ-गांठ और फायदा पाने के जरा भी संकेत मिले हैं। इस आपराधिक षडयंत्र में छह लोग शामिल थे और उन्होंने पकिस्तानी हैंडल के दिशा-निर्देश पर इंटरनेट के जरिए विभिन्न बैंक खातों में राशि वितरित की। इन छह लोगों को 24 मार्च को गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया था। 28 साल का रमेश शाह इस गैंग का सरगना है।
      एटीएस अधिकारी ने बताया कि शाह के इशारे पर पाकिस्तानी हैंडलर और आतंकवादी ऑपरेटरों के बीच एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि का आदान-प्रदान हुआ। बड़ी रकम मध्यपूर्व, जम्मू एवं कश्मीर, केरल से आती है और इसका वितरण विभिन्न राज्यों में किया जाता है।