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अब क्या जनता को निचोड़ कर उसका तेल निकालोगे साहब ?

एक और अवैध घोटाला पनप रहा है सरकार के गर्भ में ?
जिसकी डिलीवरी पर घोटाले के कर्ताधर्ता गौतम अडानी को फायदा होगा 88 हजार करोड़ का ?
    पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने एक नीतिगत निर्णय लिया था कि राज्य सरकार दीर्घकालीन समझोतो के तहत बिजली खरीदेगी ताकि कम समय में महँगी बिजली खरीदने से बचा जा सके!
     इसी के तहत बीजेपी की गुजरात सरकार के ऊर्जा विकास निगम की तीनो कंपनियों ने 2 रूपये 40 पैसे और 2 रूपये 80 पैसे प्रति यूनिट की दर से २५ साल तक बिजली खरीदने का समझौता किया !  यही समझौता राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा सरकार ने भी बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से 25 साल के किया था !
     2007 से 2012 तक 5 साल ये व्यवस्था सुचारु रूप से चली उसके बाद अडानी, एस्सार एवं टाटा ने इंडोनेशिया में कोयले के एक्सपोर्ट पर हुए नीतिगत फैसले के कारण बिजली की दर बढाने की बात की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया !
    2014 में अडानी ने अपने मित्र मोदी से बात कर अपीलेंट अथॉरिटी में और उसमें हारने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अनुबंध की दरो पर किसी प्रकार के परिवर्तन पर रोक लगा दी और कहा कि किसी दूसरे देश में हुए नीतिगत निर्णय से स्थानीय समझौते प्रभावित नहीं हो सकते !
     अब तक घोटाला मोदी जी के गर्भ आ चूका था इसलिए अडानी को पुनर्निरीक्षण याचिका दायर करने सलाह देने के बजाय मोदी जी ने 3 जुलाई को गजट नोटिफिकेशन के जरिये बिजली की कीमतों को बढाने के लिए एक तीन सदस्ययी कमेटी का गठन कर दिया !
    इसमें एक सेवा निवृत न्यायधीश है दूसरा सदस्य CERC का पूर्व चेयरमैन है जिसने पहले भी अडानी का पक्ष लिया था और जो कानूनन इस कमिटी का सदस्य नहीं हो सकता है और तीसरा सदस्य एक बैंक का पूर्व CMD है जिसने इसी प्रोजेक्ट के लिए अडानी को धन उपलब्ध कराया था !
   कोई भी कमेटी हो, कैसी भी सिफारिश हो, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उपर नहीं हो सकती यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी ! दो महीने का समय है अक्टूबर के अंत तक सिफारिश आएगी क्या सिफारिश आएगी यह आप देख सकते है दिसम्बर में चुनाव होंगे फिर 5 राज्यों में बिजली की दरे बेतहासा बढ़ा दी जाएगी और एक झटके में जनता से 88 हजार करोड़ झटक लिए जायेंगे और फिर हर साल खून चूसने का काम चालू रहेगा !

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