ना ही आखों की ज्योति ना ही कोई दिव्यज्ञान फिर भी बाबा थे महान

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ना ही आखों की ज्योति ना ही कोई दिव्यज्ञान फिर भी बाबा थे महान

  उदयपुर/बांसवाड़ा।। इस जमाने में भी कोई सूरदास धरती पर हुए है तो आप कहेंगे यह नामुकिन सा है लेकिन यह सही है। इसका जीता जागता सबुत वागड़ में दिखाई दिया, जब आप राजस्थान के डूँगरपुर जिले के सागवाडा से उदयपुर की और जाते है या बांसवाड़ा से उदयपुर जाते हुए आसपुर से जैसे ही आगे निकलने के बाद जल्लारा नाम से एक गांव आता है, वहा पुलीस स्टेशन को पार करने के बाद एक मोड आता है, वही पर एक छोटे से मंदिर मे वर्तमान के सूरदास विराजमान रहते है। 
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  जानकारों का कहना है कि जब आप सही वक्त पर वहा जाओगे तो यह महाराज आपके मन की बात भी बता देते है। बता दे कि इन महाराज को आंखों से दिखाई नहीं देता है। इनकी खासियत यह है की आप किसी भी वक्त वहा जाकर उनसे समय (टाईम) पूँछेगे तो वह आपको एकदम 100% सही टाईम बतायेंगे जो भी आपकी घड़ी मे उस समय बज रहा होगा। 
   इन बाबा के बारे में जितने शब्द कहें उतना कम है क्योंकि इनसे कुछ भी पूछो उसका वह एकदम सटीक जवाब देते है। जब की यह बाबा आंखों से देख नहीं पाते फिर भी यह बाबा कुदरत का एक अजब करिश्मा है, जिनसे आप पैसों के बारे में समय के बारे में कुछ भी पूछो इनका जवाब एक दम सही होता है। 
 कुछ लोगो का कहना है कि पहले अलग-अलग तरह की गाड़ियां चलती थी, तब गाड़ी की आवाज से बाबा बता देते थे कि कौन सी गाड़ी आई है? एसटी रोडवेज है या जैन बस है। जानकारों का कहना है कि अब देवलोक सिधार चुके है।  

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