वकीलों की तरह न्याय नहीं मिलने पर क्या पत्रकारों को भी अब आत्महत्या करनी पड़ेगी?

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वकीलों की तरह न्याय नहीं मिलने पर क्या पत्रकारों को भी अब आत्महत्या करनी पड़ेगी?

   पत्रकार के सवालों पर मंत्री जी क्यों तिलमिला गए? मंत्री, रेरा और बिल्डर्स के बीच क्या है सेटिंग?
  कांग्रेस सरकार में यूडीएच यानी की अर्बन डेवलोपमेन्ट विभाग की कारगुजारिया उस समय सब के सामने आ गई जब हमारे खोजी पत्रकार ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी यूडीएच श्री कुंजीलाल मीणा से राजस्थान एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में सरेआम चल रही गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को लेकर चुभते सवाल पूछ लिए। आप को बता दे कि पत्रकार ने कई बार रेरा में चल रहे गैर क़ानूनी कामों को उजागर करने के लिए और इस सम्बन्ध में मीणा जी के स्टेटमेंट लेने के लिए फोन पर संपर्क किया लेकिन साहब ने मीटिंग में होने का हवाला देकर वह सवालों के जवाब से बचते रहे। वही बमुश्किल जब मीणा साहब ने गलती से पत्रकार का फोन उठाया तो सवालों की झड़ी के बीच फोन पर ही वह चुप हो कर बैठ गए जैसे उन्हें कोई सांप सूंघ गया हो। बताते चले की रेरा कोर्ट में एक बिल्डर द्वारा की गई धोखाधड़ी को लेकर पत्रकार ने खुद मुकदमा दर्ज करवा रखा है। 
  
   राजस्थान एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) एक न्यायिक ट्रिब्यूनल कोर्ट है, इसका काम अवैध बिल्डरों से आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना है। राजस्थान एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के अधिनियमों के तहत प्रत्येक बिल्डर्स को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। यदि कोई बिल्डर्स इस कानून का उल्लंघन कर बिना रजिस्ट्रेशन के बिल्डर्स का काम करता है तो इस अधिनियम में रेरा को उस अवैध बिल्डर्स की पूरी संपत्ति जप्त कर उस पर जुर्माना लगाकर उसे कारावास तक की सजा देने का अधिकार है। लेकिन मंत्रियों की सेटिंग से अवैध बिल्डर्स बेखौफ होकर आम जनता को सरेआम लूट रहे है। वही ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए मुकदमा दायर करने पर न्याय की जगह न्याय के लिए कोर्ट में लगाए गए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जिन्हे हकीकत में क़ानून की कोई जानकारी ही नहीं है वो उल्टा फरियादियों की ही गलती बताकर उन्हें ही धमकाते है। बताते चले की राजस्थान में कांग्रेसी सरकार और प्रशासन की गुंडागर्दी के चलते दो ईमानदार वकीलों ने आत्महत्या कर ली थी। वही पत्रकार का कहना है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह रेरा कोर्ट में घुसकर खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर लेगा। इसकी पूरी जवाबदार कांग्रेस की चोर सरकार होगी। 
  बताते चले की रेरा कोर्ट के निर्णयों को हाई कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। उच्च स्तर की इतनी महत्वपूर्ण कोर्ट में आरजेएस न्यायिक अधिकारीयों की जगह रेटायर्ड आईएएस अधिकारी को केस सुनवाई के लिए लगाना कितना उचित है? पत्रकार का कहना है कि सुनवाई के दौरान उसके केस को सुने बगैर ही एक आईएएस जज ने यह कहते हुए सीधे ही 3 महीने बाद की तारीख दे दी की यह बिल्डर्स रेरा में रजिस्टर्ड ही नहीं है, इसलिए इस केस की सुनवाई ही नहीं कर सकते, जबकि रेरा में ऑनलाइन केस दर्ज करने पर वहा बिल्डर्स रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड चुनने का विकल्प दिया हुआ है, फिर केस की सुनवाई के दौरान बिल्डर्स के अनरजिस्टर्ड होने की बात का हवाला देकर केस की सुनवाई ना कर उसे आगे की तारीख के लिए टाल देना अपने आप में क़ानूनी पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े करता है। वही पत्रकार ने जब कहा की बिल्डर्स को रजिस्टर्ड करने का काम तो रेरा का है, आरोपित बिल्डर्स के खिलाफ रेरा चैयरमेन साहब ने खुद पेनल्टी और रजिस्ट्रेशन के लिए आदेश निकाल रखे है और इसी बात को लेकर 19 सितम्बर 2022 को उस बिल्डर्स के विरुद्ध रेरा कोर्ट में सुनवाई है। लेकिन उन्होंने पत्रकार की सारी क़ानूनी दलीले को सीरे से ख़ारिज कर बेवजह ही तीन महीने बाद की तारीख दे दी, जबकी केस में सीधे निर्णय दिया जा सकता था। 
Journalist
 बताते चले की रेरा की भ्रष्टाचार से भरी हुई कार्यप्रणाली में रोज़ कई गरीब बर्बाद हो रहे है और इसकी सीधी जिम्मेदार कांग्रेस सरकार, रेरा और यूडीएच की मिलीभगत है। इसका पुख्ता सबुत बालाजी कंस्ट्रक्शन एन्ड बिल्डर्स बांसवाड़ा द्वारा जिले में अवैध रूप से सैकड़ों कॉलोनियां और घटिया मकान बना कर गरीबो को धोखे से लुटा गया, लेकिन रेरा सुमोटो (स्वतः ज्ञान) के नाम पर आरोपित शातिर अपराधी उक्त बिल्डर्स के खिलाफ कई नोटिस और पेनल्टी एवं रजिस्ट्रेशन जमा करवाने को लेकर कई आदेश निकाले लेकिन उसके बाद भी उस बिल्डर्स ने अपने रसूख के दम पर आज दिन तक ना तो पेनल्टी भरी ना ही कोई रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाया। वही सेटिंग से रेरा कोर्ट में डेरा डाले आईएएस जज फरियादियों को ही गुनेहगार साबित करने में लगे हुए है। अब देश की जनता ही बताए की कांग्रेस राज में राजस्थान में कही कोई न्याय हो रहा है क्या?           
 धोखा, लूट ओर फ़रेब के खेल में सरकार बेपर्दा हो गई! 
  कांग्रेस राज में राजस्थान में भ्रष्टाचार इस कदर चरम पर पहुँच चूका है की जनता अब कांग्रेस से हाय तौबा करने लगी है। कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले नौकरशाही की पारदर्शिता और आम जनता में विश्वास के लिए जो वादे किये थे उनका चीरहरण उन्ही के मंत्रियों ने कर दिया है। जहा तक बात आम जनता को न्याय दिलाने की है वहा भी कांग्रेस के मंत्रियों ने अपने मंत्री पद का दुरूपयोग कर न्यायिक संस्थाओं में बैठे अधिकारीयों को अपनी सत्ता का धोस दिखाते हुए उसे तबाह कर के रख दिया है। ऐसे में कांग्रेस शासन में अत्याचारों से त्रस्त आम जनता अब कांग्रेस को आगामी चुनावों में उखाड़ फेकने का पूरा मानस भी बना चुकी है।
 
   आपको बताते चले की राजस्थान एस्टेट एन्ड रेगुलेटरी एक्ट प्राधिकरण (रेरा) में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और अन्याय को लेकर हमारे क्राइम और इन्वेस्टिगेशन के एक पत्रकार विगत कई समय से जांच में लगे हुए है। आपको यकीन नहीं होगा की कांग्रेस राज़ में भ्रष्टाचार इतनी चरम पर पहुंच चूका है कि कांग्रेस के नेता रेरा जैसी न्यायिक संस्था के न्यायिक अधिकारियों को दोषी बिल्डरों के विरुद्ध आदेश पारित करने से रोकने के लिए बिल्डरों की तरफ से धमकाते है, जिससे रेरा जैसी न्यायिक संस्था के अधिकारी तक डरे सहमे हुए है। 
Rahul Gandhi and Arjun Bamaniya
   बता दे की राजस्थान के बांसवाड़ा में बालाजी कंस्ट्रक्शन एंड डेवेलपर्स के द्वारा धोखे और शोषण का शिकार हुए लोग अब तक न्याय के लिए भटक रहे है। जब हमारे पत्रकार ने इससे सम्बंधित केस की बारीकी से जांच की तो कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी की रेरा के न्यायिक अधिकारियों का खुद कहना है की कांग्रेस के मंत्री अर्जुन बामनिया उन्हें बांसवाड़ा के जालसाज़ बिल्डरों के खिलाफ आदेश पारित करने से धमकाते हुए मना कर देते है। 
Arjun Bamaniya and Rahul Gandhi
   पत्रकार ने जब मंत्री जी से इस सम्बन्ध टेलीफोनिक बातचीत कर हकीकत जाननी चाही तो मंत्री जी पत्रकार पर ही रॉब जमाते हुए उसे भाषण न देने की सलाह देने लगे। पत्रकार के हकीकत भरे तीखे सवाल मंत्री जी को भाषण लगने लगे वही पीड़ितों को न्याय दिलाने की जगह मंत्री जी तो बिल्डरों की पैरवी करते नज़र आये। वही अब पीड़ितों का कहना है की राजस्थान में चल रहे इस भ्रष्टाचार और शोषण की आवाज़ अब सीधे सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी तक पहुंचाई जाएगी और उनसे यह पूछा जाएगा के आपने जिन्हे मंत्री बनाया है, उन्हें पीड़ितों के क़ानूनी अधिकारों का गला घोटने के लिए कितने में सौदा कर मंत्री पद दिया गया है। वही कांग्रेस सरकार में शोषण का शिकार हो चुके पीड़ितों का कहना है की जिस कांग्रेस राज में न्याय है ही नहीं उस सरकार को आगामी चुनावों में उखाड़ फेकने में ही फायदा है। क्योकि जब कांग्रेस सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण ही नहीं है कि आखिर कुछ ही सालो में उनका एक सामान्य कार्यकर्ता मंत्री बन कर ऐसा क्या काम कर रहा है की चंद सालों में ही वह कई क्रेशर गिट्टी के प्लांट, केरोसिन के टेंकरों की सप्लाई, माइंस, हज़ारों बीघा की जमीनों का मालिक, और कई बंगलों व करोड़ों का आसामी हो गया। कांग्रेस सरकार को तो परेशानी इसमें है की एक गरीब आदमी को आखिर न्याय कैसे मिल जाए? क्योंकि पूरी कांग्रेस तो अब जनता के शोषण का जिम्मा उठा चुकी है।      

राजस्थान एस्टेट एन्ड रेगुलेटरी एक्ट प्राधिकरण (रेरा) के चेयरमैन से आज एक पत्रकार ने रेरा की कार्यप्रणाली में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े किये। देखिये पत्रकार के सवालों पर क्या कहा रेरा के चेयरमैन निहाल चंद जी गोयल साहब ने!

  

 रेरा के अधिकारीयों ने कहा कांग्रेस के मंत्रियों के कहने पर नहीं होती अवैध बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई

बालाजी बिल्डर्स एन्ड डेवेलपर्स के काले कारनामे को बचा रहा है कांग्रेस का मंत्री अर्जुन बामनिया और शांति धारीवाल  

धोखाधड़ी के इस खेल में सरकार के कई अधिकारी है शामिल, अपराधियों को सज़ा देगा कौन?   

5 लाख रूपये की लगी थी पेनल्टी ना जमा करवाई ना ही लिया रजिस्ट्रेशन बोला कोर्ट हमारा क्या उखाड़ लेगा?

इतने कानून बने लेकिन बिल्डरों की लूट से गरीब आम जनता को न्याय की जगह कानून के रखवाले ही बिल्डरों को बचाने में लगे हुए है!
क्या न्याय के लिए आम जनता को अब हथियार उठाने को मज़बूर होना पड़ेगा?
आपके रोंगटे खड़े कर देगी क्राइम और इन्वेस्टीगेशन की यह ख़ास रिपोर्ट! 

   
    सरकार ने तो पैसे खा लिए लेकिन हम कब दब कर मर जाएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता?
    बांसवाड़ा/जयपुर/राजस्थान।। कांग्रेस के मंत्री पहले भी घटिया मानसिकता के थे और आज भी थर्ड क्लास ही है। एक और जहा पूरा देश कोरोना में बर्बाद हो गया वही सारे हरामखोर कांग्रेसी नेता और मंत्री भृष्टाचार करके करोड़पति बन गए। विदित है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत रोज़गार और अच्छे दिनों का हवाला देकर जनता को दिन-रात बेवकूफ बनाने में लगे हुए है। आपको बताते चले की इसका ताज़ा उदाहरण कई समय से राजस्थान के बांसवाड़ा में एक खोजी पत्रकार द्वारा राजस्थान सरकार की कानून व्यवस्था में हो रहे भ्रष्टाचार और काले कारनामों को उजागर करने में लगा हुआ है। 
   आपको जान कर हैरानी होगी की राजस्थान एस्टेट एन्ड रेगुलेटरी एक्ट प्राधिकरण (रेरा) जैसी न्यायिक संस्था के अधिकारियों ने हमारे क्राइम और इन्वेस्टिगेशन के पत्रकार को बताया की कांग्रेस की राजस्थान सरकार में मंत्री बने बैठे छूट भैयन टाइप के कुछ नेता जनता के साथ न्याय ना हो इसलिए उक्त संस्था को अवैध बिल्डरों के खिलाफ कारवाही करने से रोक रहे है। जानकारी देने वाले अधिकारीयों का कहना है कि काले कारनामों में राजस्थान सरकार में जनता की रहमत से बने हुए बांसवाड़ा का मंत्री अर्जुन बामनिया और कोटा क्षेत्र का मंत्री शांति धारीवाल शामिल है जो अवैध बिल्डरों को बचाने वाले माई-बाप बने हुए है। अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया की कांग्रेस के इन नेताओं ने बांसवाड़ा के अवैध बिल्डर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन एन्ड डेवेलपर्स के विरुद्ध रेरा राजस्थान में चल रहे केस को दबाने के लिए 25 लाख रूपये, प्लॉट एवं जमीन कब्ज़ा ली है। उन्होंने बताया की रेरा में भी इस बिल्डर्स ने अपने केस को दबाने के लिए बहुत पैसा बांटा है।    
    
   अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया की यह रेरा राजस्थान के चैयरमेन निहालचंद गोयल को अवैध बिल्डरों के पक्ष में निर्णय करने के लिए, अवैध बिल्डरों के खिलाफ सुओमोटो (स्वतः संज्ञान) कारवाही को रोकने के लिए और पीड़ितों द्वारा अवैध बिल्डरों के खिलाफ दायर किये गए मुकदमों को बंद करने और लंबित रखने के लिए अक्सर धमकाते रहते है। अधिकारी का कहना था कि रेरा राजस्थान एक न्यायिक संस्था है जो अवैध बिल्डरों से आम जनता के अधिकारों की सुरक्षा करती है, लेकिन अशोक गेहलोत के शय पर थर्ड क्लास जनविरोधी मंत्री अवैध बिल्डरों की चंद पैसों के टुकड़ों के खातिर गुलामी कर रहे है। 
   अधिकारी ने बात गुप्त रखने का कहते हुए बताया की बांसवाड़ा राजस्थान के अवैध बिल्डर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन एन्ड डेवेलपर्स के काले कारनामों में यह दोनों मंत्री हिस्सेदार है और इन्ही के माध्यम से वो जनता को धोखे से लूट के लिया गया काला धन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचाया जाता है।
    
आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है, क्या है मामला? 
    ना कोई खाता ना कोई बही जो बिल्डर्स ने कह दिया वही सही पुलिस, प्रशासन और कॉर्ट सब को जेब मे रख कर घुमतेे है बिल्डर्स। ऐसा हम नहीं बल्कि बांसवाड़ा का एक बिल्डर्स लोगो को खुद धमकाते हुए कहता है। सस्ते मे मकान और प्लॉट का सब्जबाग दिखा कर कई गरीबो को घटीया क्वालिटी के मकान बना कर एक बिल्डर द्वारा बांसवाड़ा मे दे दिये गये है, वही अब खरीददार न्याय के लिए मारे-मारे फिर रहे है, बिल्डर्स के पैसों की खनक से सभी जगह के न्याय के दरवाजे बंद हो गए है ओर कही कोई सुनवाई नहीं हो रही है।    
    आपको बता दे कि राजस्थान के बांसवाड़ा में सैकड़ों बिल्डर्स रेरा (राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट अथॉरिटी) में रजिस्ट्रशन करवाए बिना ही आम जनता को धोखे से लूटने में लगे हुए है। एक बार इस बात को मान भी लिया जाए की जनता को इस कानून की  जानकारी नहीं है लेकिन इसकी रोकथाम और न्याय के लिए राज्य लेवल पर बने हुए राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बिल्डरों की चोरी पकड़ने की जगह सिर्फ अपनी सेटिंग में लगा हुआ है।   
Balaji Green City Developers
  लोगो के साथ कई झूठे वादे कर सब्जबाग दिखाकर धोखाधड़ी और लूटमार का यह खेल आज से नहीं बल्कि कई सालों से राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के द्वारा खेला जा रहा है। कही कोई जांच नहीं, कोई देखने वाला नहीं क्योंकि जिम्मेदारों ने तो बिल्डर्स के पैसों के आगे अपने पतलून भी खोल रखी है, फिर ऐसे बिल्डर्स को किसका डर होगा यह बात आप भी अच्छी तरह से समझ सकते है। हम बात बांसवाड़ा जिले के जयपुर रोड़ पर स्थित बालाजी ग्रीन सीटी की कर रहे है जहा कुछ ऐसी ही कारगुजारीया बिल्डर्स द्वारा की गई है। बालाजी ग्रीन सीटी कॉलोनी मे क्वालिटी वाला डेमो हाऊस ओर कैटलोग दिखा कर, मकान के खरीदारो को घटीया क्वालिटी के मकान बना कर देने का मामला प्रकाश मे आया है। 
Balaji Green City Developers
वह कब जमीनोदोज होकर धरती मे समा जाए कुछ कहां नही जा सकता
   उक्त कॉलोनी के 1 बीएच के मकानो मे रहने वाले कुछ लोगो ने बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के खिलाफ आरोप लगाते हुए बताया कि महज एक से दो वर्षो पूर्व खरीदे गये उनके मकानो के हालात आज ऐसे हो गये है कि कब वह जमीनोदोज होकर धरती मे समा जाए कुछ कहां नही जा सकता है।
Balaji Green City Developers
सरकार को रखते है जेब में
   ठगी का शिकार हुए उक्त कॉलोनी वासीयो ने बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के विरूद्ध आक्रोश जताते हुए कहां कि उक्त कम्पनी के मालिको जिनमे प्रवीण भट्ट एवं हेमन्त जोशी जो कि बांसवाड़ा जिले के ही एक सरकारी विद्यालय मे सरकारी अध्यापक के पद पर कार्यरत है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जोशी जी कभी स्कूल नहीं जाते है लेकिन सरकार से महीना होते ही पगार पूरी लेते है, आखिर वह ले भी क्यों ना क्योंकि सरकार को तो वह अपनी जेब में रखते है।  
Balaji Green City Developers
अवैध कम्पनिया चला कर सरकार को करोड़ो रूपये के राजस्व का किया नुकसान
    बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के प्रवीण भट्ट एवं हेमन्त जोशी द्वारा बांसवाड़ा के उदयपुर रोड पर ही ब्लूमून हॉटल का संचालन भी किया जा रहा है, जहा कई बार अवैध गतिविधियों के चलते पुलिस के छापे भी पूर्व में पड़ चुके है। यह दोनों अपराधी इतने शातिर है की इन्होने इनकम टैक्स एवं अन्य सरकारी टैक्सो से बचने के लिये अपनी पत्नी एवं अपनी मॉ के नाम से बालाजी ग्रीन सीटी डेवलपर्स, बालाजी वेली, बालाजी हाईट, बालाजी नगर, मंगलम रेजीडेन्सी, बालाजी विहार, खमेरा कॉलेज एण्ड रेजीडेन्सी आदि कई अलग-अलग नामो से सेटिंग से कई फर्जी कम्पनीया खोल कर ना केवल सरकार को राजस्व का नूकसान कारित किया जा रहा है, बल्कि गरीब लोगो को भविष्य मे मकान निर्माण का करार बना कर देने का कह कर उन्हें घटीया मकान बना कर बेच दिये गये। वही इनके सबके पीछे जिम्मेदार सरकारी अधिकारी दो नंबर के पैसे खाकर मौन बैठे हुए है। 
Balaji Green City Developers
डेमो हाऊस बता कर किया फर्जीवाड़ा, कई सुविधाओं को देने का दिया था झूठा आश्वासन 
   उक्त कॉलोनी के कई पिड़ित परिवारो का कहना है, कि बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स ने जयपुर रोड़ पर उन्हें एक गुणवत्ता युक्त डेमो हाऊस व कैटलोग बता कर एवं उक्त कॉलोनी मे बने 1 बीएच के मकान संख्या 10 एवं 11 के पास से ही उदयपुर-जयपुर बायपास रोड बना कर देने, उक्त कॉलोनी में 40 फीट के सीसी सीमेंटेड रोड़, 24 घण्टे सीसी केमरो एवं चोकीदार से निगरानी, प्राईवेट स्कूल का निर्माण करने व बालाजी मन्दिर का निर्माण करने सहित कई झूठे आश्वासन एवं वादे कर लोगो को गुमराह करते हुए घटीया मकान बना कर लोगो को बेच दिये गये।
Balaji Green City Developers
पुलिस में शिकायत करने पर फरियादियों को ही धमकाया गया 
   इस सम्बन्ध मे जब कुछ लोगो ने बिल्डर्स के खिलाफ पुलिस मे डिप्टी एसपी को को लिखित परिवाद दिया तो कई महिनो तक उसको जांच के नाम पर अटका के रखा गया। लेकिन जब इसकी जांच के विषय मे लोगो ने डिप्टी एसपी से पूछा तो उल्टा वह फरीयादियो को ही धमकातेे हुए सबूत मांगने लगे। वही बिल्डर्स से इस सम्बन्ध मे बात करने पर उसने कहा कि हमने पुलिस, प्रशासन और कॉर्ट सबको खरीद कर जेब मे रख लिया है। तुम कही भी चले जाओ तुम्हारी कोई नही सुनेगा।
कॉलोनी मे मकान बिना नीव के ही बना दिये गये
   उक्त कॉलोनी के मकान संख्या 10 के पीड़ित दम्पत्ती कमलेश निनामा एवं उनकी पत्नी श्रीमती बसंती मीणा ने बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स पर आरोप लगाते हुए कहां इन लोगो ने हमे फंसा दिया है। पीड़ित दम्पत्ती ने बताया की हाल ही में हमने एक साल पहले ही यहां पर घर ख़रीदा था, हमारे घर के किचन की दिवारे पूरी तरह से फट चुकी है, जिससे वहां से बारीश मे नहर की तरह पानी अन्दर आता है। घर केे बेडरूम, हॉल एवं पॉर्च सहित सभी जगह से मकान पूरी तरह से फटने से दरारे आ गयी है, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहां कि कॉलोनी मे मकान बिना नीव के ही बना दिये गये है, जिनका गिरने का खतरा सदैव बना रहता है।
अब जान से मरवाने की दी जा रहीं है धमकिया 
  पीड़ित दम्पत्ती परिवार ने बिल्डर्स के विरूद्ध आरोप लगाते हुए कहां कि हमारा एक छोटा से बच्चा है अब हम कहां जाऐगे? पीड़ित दम्पत्ती ने बताया कि उन्होंने कई बार बिल्डर्स को इस बारे मे सूचीत किया लेकिन बिर्ल्ड़स द्वारा पीड़ित परिवार को ही जातिगत मां-बहन की गालिया देते हुए जान से मरवाने की धमकिया दी जा रहीं है। मौके पर मकान की गुणवत्ता की बात करे तो मकान 5 लाख की कीमत का भी नही है जिसके एवज मे बिल्डर्स द्वार 15 से 20 लाख रुपए जोरजबरदस्ती से फंसा कर लिए जा रहे है।
RERE order against Balaji Green City Developers


RERE order against Balaji Green City Developers

   उक्त कॉलोनी के ही कुछ वर्षों में जर्जर हो चुके मकान संख्या 11 के मालिक ने बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स पर आरोप लगाते हुए कहां इन लोगो ने हमे झूठा आश्वासन देकर फंसा दिया है। हम कही भी जा रहे है हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा की कुछ ही साल पहले ही इसी बिल्डर्स से यह घर ख़रीदा था, लेकिन इस घर में पॉर्च, बेडरूम, छत, हॉल, बाउंड्री, टॉयलेट तक में दरारे आने से वह जर्जर हो चुके है। उन्होंने बताया कि घर केे बेडरूम, हॉल एवं पॉर्च सहित सभी जगह से मकान पूरी तरह से फटने से दरारे आ गयी है, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहां कि कॉलोनी मे मकान बिना नीव के ही बना दिये गये है, जिनका गिरने का खतरा सदैव बना रहता है। इस ठगी का शिकार हो चुके पीड़ित ने बताया की बिल्डर्स ने हमें हमारे मकान के पास में से ही उदयपुर-जयपुर बायपास रोड़ निकलेगा जिससे आपके मकान की क़ीमत 40 लाख रूपये हो जाएगी ऐसा झूठा आश्वासन एवं कई वादे जिनमे सीसी रोड, बालाजी का मंदिर, प्राइवेट स्कूल, सीसी टीवी और चौकीदार से 24 घंटे सुरक्षा आदि कई झूठे वादे कर पीड़ितों को फंसाने का आरोप लगाया। 
5 लाख रूपये की लगी थी पेनल्टी ना जमा करवाई ना ही रजिस्ट्रेशन लिया 
   आपको बताते चले की राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चैयरमेन श्री निहाल चंद गोयल द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए 07-11-2020 को राजस्थान पत्रिका के बांसवाड़ा एडिशन में बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स द्वारा बिना रेरा में रजिस्ट्रेशन किये बालाजी पेरेडाइस के नाम से प्रकाशित विज्ञापन पर 08-11-2021 को शोकॉस नोटिस जारी कर उक्त बिल्डर्स को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश जारी किया था, जिसकी पलना नहीं होने पर पुनः गोयल साहब ने 14-02-2022 को 5 लाख रूपये की पेनल्टी एवं जब तक उक्त पेनल्टी जमा नहीं हो तब तक 500 रूपये प्रतिदिन के हिसाब कोर्ट में जमा करवाने का आदेश सुनाया था। 
RERA Order against Balaji Gree City Developers


RERA Order against Balaji Gree City Developers


RERA Order against Balaji Gree City Developers


RERA Order against Balaji Gree City Developers
  लेकिन बालाजी कंस्ट्रक्शन एण्ड़ डेवलपर्स द्वारा उसे आज तक ना तो जमा करवाया गया ना ही रेरा में बालाजी कंस्ट्रक्शन एण्ड़ डेवलपर्स द्वारा अपनी किसी भी फर्म का रजिस्ट्रेशन किया गया। 
लगता है सब कुछ अंदर खाते ले देकर सेट हो गया 
 
     इस सम्बन्ध में न्यूज़ टुडे टाइम के एक पत्रकार ने जब राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चैयरमेन श्री निहाल चंद गोयल द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के विरुद्ध बिना किसी रजिस्ट्रशन के बिल्डर्स एन्ड कंस्ट्रक्शन का अवैध काम करने को लेकर 5 लाख रूपये की पेनल्टी एवं जब तक उक्त पेनल्टी जमा नहीं हो तब तक 500 रूपये प्रतिदिन के हिसाब कोर्ट में राशि जमा करवाने के उक्त आदेश की पालना की स्थिति जानी तो हैरान करने वाली बात सामने आई। आपको जान कर हैरानी होगी बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स के विरुद्ध पारित उक्त आदेश की आज दिनांक तक ना तो वसूली की गई ना ही फाइल पर कोई आगे कार्रवाई की गई। मतलब सब कुछ अंदर खाते ले देकर सेट कर दिया गया। जनता मरे तो मरे हमें तो बस दो नंबर का पैसा चाहिए। जनता की रक्षा के लिए बनाया गया कानून रेरा एक्ट आज जनता के ही शोषण का काम कर रहा है।
बिल्ड़ेर्स ने दी धमकी कहा उपभोक्ता कोर्ट हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता 
   उक्त कॉलोनी के ही मकान संख्या 11 के पीड़ित ने बताया कि जब बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स द्वारा घटिया क्वालिटी के बना कर दिए गए मकान के रिफंड के लिए उपभोक्ता कोर्ट में जाने के लिए जब वह किसी रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट्स की मौका मुआयना रिपोर्ट बनाने के लिए बांसवाड़ा जिले के कई आर्किटेक्टों के पास गया जिनमे अलाप जोशी और शैलेन्द्र भट्ट सहित कई आर्किटेक्टों ने पीड़ित को मौका मुआयना कर रिपोर्ट बना कर देने का कह कर पीड़ित की सारी जानकारी बिल्डर्स को देकर पीड़ित को गुमराह करने का काम किया।
   
     पीड़ित ने बताया कि बालाजी बिल्डर्स एण्ड़ डेवलपर्स को पीड़ित द्वारा उपभोक्ता कोर्ट में मुकदमा दायर करने की जानकारी होने पर पीड़ित को कहा की उपभोक्ता कोर्ट क्या तुम दुनिया के किसी भी कोर्ट में चले जाओ तुम्हारी कही कोई सुनवाई नहीं होगी। तुम्हारे पास कोई सबुत नहीं है, हमने तुम्हे इसलिए ही करार की कॉपी भी आज तक नहीं दी है। पीड़ित ने बताया की बिल्डर्स ने धमकी देते हुए पीड़ित से कहा की उपभोक्ता कोर्ट हम पहली बार नहीं जा रहे है, उपभोक्ता कोर्ट हमारा क्या बिगाड़ लेगा? 
डिप्टी एसपी साहब तो बिल्डर्स की भाषा बोलने लगे 
   पीड़ितों को पुलिस प्रशासन और अपराधीगणो की मिलीभगत से चल रहे इस खेल का पता तब चला जब जिले के ही डिप्टी एसपी साहब ने पीड़ित से इस सम्बन्ध में परिवाद लेकर कई महीनों तक उसको लटकाए रखा और जब पीड़ित द्वारा इस सम्बन्ध में परिवाद की स्थिति जाननी चाही तो बिल्डर्स की भाषा बोलते हुए डिप्टी साहब फरियादियो पर ही अपना पुलिसिया रॉब झाड़ते हुए बोले की तुम्हारे पास करार की कॉपी है क्या? बात यही नहीं रुकी साहब को जब पता चला की अपराधीगण तो वही है जिनकी अवैध होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बिल्डर्स की काली कमाई का कुछ हिस्सा डिपार्टमेंट के कई कई लोगो तक पहुंचता है फिर तो साहब का पारा और अधिक पो बारह हो गया, ओर बेकसूर फरियादियों पर तमतमाते हुए कहने लगे की पुलिस तुम्हारे क्या इसी काम के लिए बैठी है। 
   वैसे पूरी दुनिया पहले से ही यह जानती है साहब कि हमारे देश की पुलिस वैसे भी किसी काम की नहीं है। इसका ताज़ा उदाहरण एसीबी द्वारा राजस्थान के डूंगरपुर जिले में हाल ही में रिश्वतखोरी में पकडे गए कई पुलिस अधिकारी है, जिन्होंने अपना ईमान अपनी दो नंबर की काली कमाई के लिए गिरवी रख दिया। भ्रष्टाचार और लूट की कड़ी जोड़ी जाए तो बांसवाड़ा जिले में चल रहे बिल्डर्स की लूट के इस खेल में जिले से लेकर जयपुर तक में सब इसी मिलीभगत की चैन में बंधे हुए है।    
श्रीगंगानगर में वकील ने किया सुसाइड, पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप
  श्रीगंगानगर में भी सोमवार देर रात एक वकील ने आत्महत्या कर ली। वकील के परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं इस मामले को लेकर भाजपा और आरएलपी ने गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। 
   राजस्थान के गंगानगर जिले में एक वकील ने अपने घर में फांसी लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस पिछले कई दिनों से वकील को प्रताड़ित कर रही थी। वही परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है।
Sri Ganganagar Advocate Sucied
  घटना गंगानगर जिले के घड़साना कस्बे में सोमवार रात हुई। वकील के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसे स्थानीय पुलिस द्वारा अवैध नशीले पदार्थ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने शव लेने से इनकार करते हुए आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर क़ानूनी कार्रवाई की मांग की है। वही घटना से आक्रोशित वकीलों ने पुलिस पर मादक पदार्थो की तस्करी में कमीशनखोरी और गैर  क़ानूनी स्मगलीन करने में तस्करों की मदत करने के संगीन आरोप लगाते हुए दोषी पुलिस कर्मियों को दण्डित कर उक्त केस की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। 
   वहीं राज्यभर के अधिवक्ताओं ने इस मामले को लेकर एक दिन के कार्य बहिष्कार का भी आह्वान किया है।वही पुलिस के अनुसार वकील विजय सिंह झोरड़ ने सोमवार को अपने घर में फांसी लगाने से पहले अपने एक साथी अधिवक्ता मित्र को फोन किया था। झोरड़ के दोस्त ने तुरंत वकील की अध्‍यापक पत्नी को फोन कर इसकी जानकारी दी जिसके बाद वह स्कूल से घर पहुंची तो विजय सिंह फांसी के फंदे पर लटके मिले।
  पुलिस के मुताबिक मृतक वकील के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब से झोरड़ ने इलाके में अवैध नशीले पदार्थ के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था तब से पुलिस उन्हें परेशान कर रही थी।
   उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने इस साल अप्रैल में झोरड़ की इसी बात को लेकर पिटाई की थी। झोरड़ की पत्नी कांता देवी ने घड़साना के थानाधिकारी मदन लाल और पांच अन्य पुलिसकर्मियों पर उनके पति को परेशान करने का आरोप लगाया है।
  पुलिस के अनुसार, परिजनों को समझाने की कोशिश की जा रही है और मामले की जांच जारी है। वहीं, राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने इस मामले को लेकर राज्‍य सरकार पर न‍िशाना साधा।उन्‍होंने ट्वीट किया, “घड़साना बार संघ के पूर्व अध्यक्ष विजय सिंह द्वारा पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या करने की घटना सरकार के माथे पर कलंक है। इससे वकीलों में गहरा आक्रोश है।” राठौड़ ने कहा, “कस्बे में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाने वाले वकील की पुलिसकर्मियों ने पहले भी बेरहमी से पिटाई की थी। पुलिस प्रताड़ना के कारण ही वकील को मजबूरन आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।” उन्‍होंने कहा, “मेरी मांग है कि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।” राठौड़ ने कहा कि कस्बे में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले वकील के साथ पुलिसकर्मियों ने पूर्व में भी बेरहमी से मारपीट की थी। पुलिस प्रताड़ना के कारण ही वकील को मजबूरन आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा। उन्होंने मांग की है कि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिले और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएं।
सुसाइड से पहले दोस्त को किया फोन-
   पुलिस ने बताया कि वकील विजय सिंह झोरड़ ने सोमवार को अपने घर में फांसी लगाने से पहले एक अधिवक्ता मित्र को फोन किया था। झोरड़ के दोस्त ने तुरंत वकील की अध्‍यापक पत्नी को फोन कर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद वह घर पहुंची तो विजय सिंह फांसी के फंदे पर लटके मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। इसके बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया था। 
Advocate Sucied
5 पुलिसकर्मियों पर आरोप- 
   वकील के परिजनों ने आरोप लगाया कि जब से झोरड़ ने इलाके में अवैध नशीले पदार्थ के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था, तब से पुलिस उसे परेशान कर रही थी। उन्होंने पुलिस पर मारपीट का भी आरोप लगाया। वकील की पत्नी ने घड़साना के थानाधिकारी मदन लाल और पांच अन्य पुलिसकर्मियों पर उनके पति को परेशान करने का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार परिजनों को समझाने की कोशिश की जा रही है और मामले की जांच जारी है।
घटना को लेकर बेनीवाल ने साधा निशाना    
  वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी ट्वीट कर गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर जिले के घड़साना में घड़साना बार संघ के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता विजय सिंह झोरड़ द्वारा आत्महत्या कर लेने का दु:खद प्रकरण संज्ञान में आया है. आरएलपी अधिवक्ता के परिजनों के साथ है। 
पुलिस प्रशासन से प्रताड़ित हो कर सीकर में वकील द्वारा की गई आत्महत्या का मामला क्या था?
 आप जानते ही है हाल ही में राजस्थान के सीकर जिले में भी एक वकील ने सरकार में फैले प्रशासनिक भृष्टाचार से दुखी होकर खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या करने वाले वकील का सुसाइड नोट वायरल होने पर पता चला था की जिले का एसडीएम ही उस वकील को लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहा था। 
Sikar Advocate Suicide
  जानकारी के अनुसार रिश्वतखोरी से परेशान होकर वकील ने यह कदम उठाया। वकील ने खुद को आग लगा ली। जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां जयपुर में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
  वकील के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में वकील ने एसडीएम और एसएचओ पर उसे हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। वहीं दोनों ही भृष्ट और चोर टाइप के अधिकारी इन आरोप को सिरे से नकार रह हैं।
एसडीएम हर सुनवाई पर मांगते थे रिश्वत
  वहीं मृतक वकील के भाई के अनुसार जब मृतक घर से हर रोज की तरह निकला था तो उसके पास कोई पेट्रोल की बोतल नहीं थी। वहीं दोपहर के समय उसे एसडीएम कोर्ट में उनके सुसाइड करने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही वह अस्पताल पहुंचा और वीडियो बनाया।
   यहां मृतक वकील ने बताया था कि उसे एसडीएम ने सुसाइड के लिए उकसाया है। साथ ही यह आरोप भी लगाया कि एसडीएम हर केस की सुनवाई के लिए उससे पैसे मांगते थे। इसके साथ ही एसएचओ पर भी धमकाने का आरोप लगाया।
जाने क्या है पूरा मामला
    जानकारी के अनुसार रानौली थाना क्षेत्र के नांगल अभयपुरा का एक पिछले करीब 10 साल से वकालत कर रहा था। वहीं गुरुवार को दोपहर के समय वकील एसडीएम कार्यालय पहुंचा। जहां एसडीएम अपने कार्यालय में बैठे थे। इसी दौरान वकील ने खुद को आग लगा ली।
    वकील ने इस दौरान एसडीएम को भी पकड़ना चाहा। लेकिन एसडीएम ने उसे अपनी तरफ आता देख लिया था। जिसके चलते वह पहले ही पिछे हो गए। इस हादसे में वकील गंभीर रूप झुलस गया। जिसके बाद उसे खंडेला अस्पताल ले जाया गया। लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे जयपुर रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
  ऐसे ही कई मामले हमारे देश में रोज़ सामने आ रहे है, जिसमे कही प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, बिल्डर्स या कोई और आम गरीब जनता का शोषण करने में लगे हुए है, जिसके कारण एक आम इंसान मज़बूरी में आत्महत्या करने या अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए हथियार उठाने को अब मज़बूर हो चूका है।   

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