टीएसपी के मूलनिवासियों के साथ धोखा, विश्वविद्यालय ने सरकारी पदों पर जालसाज़ी से कर दी भर्ती
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टीएसपी के मूलनिवासियों के साथ धोखा, विश्वविद्यालय ने सरकारी पदों पर जालसाज़ी से कर दी भर्ती

   बांसवाड़ा/राजस्थान।। गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय बांसवाड़ा में टीचिंग और नॉन टीचिंग के कई पदों पर भर्ती में होने वाले घोटाले ओर अनियमितता की संभावनाओं को लेकर भारतीय ट्रायबल पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विजय भाई मईडा के नेतृत्व में जिला कलेक्टर बांसवाड़ा को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया गया। मईड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें समाचार पत्रों एवं विभिन्न स्त्रोतों से ज्ञात हुआ कि गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय बांसवाड़ा में टीचिंग और नॉन टीचिंग के 69 पदों पर संविदा आधार पर भर्ती की जा रही है, वह संवैधानिक प्रक्रिया की विरुद्ध है जिसमें जनजाति क्षेत्र के लोगों के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान लागू नहीं है, उसे लागू किया जाए तथा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक सभी पदों पर नियमित भर्ती की जाए एवं अनुसूचित क्षेत्र में लागू आरक्षण के प्रावधानों की पालना की जाए। 
 मईड़ा ने एक पत्रकार की आरटीआई व उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे एवं पुलिस जाँच में लंबित केस के हवाले से बताया कि उक्त विश्वविद्यालय मे स्थापना से लेकर आज तक कई अशैक्षणिक पदो पर सेटिंग से भ्रष्टाचार करते हुए बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किये दो नंबर में पैसे लेकर सरकारी अधिकारियो द्वारा नेताओं की अनुशंषा पर नियमित भर्ती कर दी गई है। स्थितियों को देखते हुए मईड़ा ने कहा कि वागड़ क्षेत्र में उच्च शिक्षा का वातावरण चिंताजनक है, विश्वविद्यालय में वर्तमान में दिखावे की तौर पर एजेंसी के माध्यम से कार्यरत 90% कार्मिक एक ही समुदाय विशेष के प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मईड़ा ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई अब तक भर्तीयों को बैकडोर भर्ती का षड्यंत्र बताया है। 
  मईड़ा ने एक गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय बांसवाड़ा में दो नंबर से भ्रष्टाचार से नौकरी में लगे हुए कुछ लोगो की सूची जारी करते हुए बताया कि वह लोग बीना किसी योग्यता के नेपोटिज़्म ओर सेटिंग से पैसे देकर नौकरी पर लग गए है। मईड़ा का कहना है कि टीएसपी क्षेत्र को लेकर कांग्रेस ओर बीजेपी एक होकर यहाँ के मूलनिवासियों के विरुद्ध साजिशन युद्ध लड़ते हुए यहाँ के मूलनिवासियों का अधिकार खत्म करने में लगे हुए है ओर इनके इस अपराध में पुलिस, प्रशासन, न्यायालय सब मूकदर्शक बने हुए है। 
 मईड़ा ने कहा कि उक्त विश्वविद्यालय की स्थापना जनजाति समुदाय के उत्थान को ध्यान में रखते हुए खोला गया था जो कि अपने मूल उद्देश्यों से भटक गया है, टीएसपी क्षेत्र में होने के बावजूद इस विश्वविद्यालय में जालसाज़ी करके भर्ती किये गए उम्मीदवारों में ब्राह्मण एवं बनियों की तादात की भरमार है जो उक्त विश्वविद्यालय की गैरकानूनी नीतियों को प्रदर्शित करता है। सरकार द्वारा शिक्षा में ध्यान ना देकर मात्र प्रतियोगिता परीक्षाओं पर ही ध्यान केंद्रित है, साथ विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा नियंत्रक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कॉलेज शिक्षा सेवा से प्रतिनियुक्ति सहायक आचार्य को लंबे समय तक बनाए रखना संदेह के घेरे में आता है। 
  मईड़ा ने बताया कि विश्वविद्यालय में वेद विद्यापीठ पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है तथा शिक्षा संकाय मैं वेद विद्यापीठ के कोर्सेज अनिवार्य करके जबरजस्ती थोपे जा रहे हैं, जो बीजेपी की देशविभाजन जैसी नीतियों से प्रभावित है जिसका समय-समय पर छात्र संगठनों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध किया गया इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा जनजाति क्षेत्र के विद्यार्थीयों के साथ धोखा किया जा रहा है। आधुनिक समय में यूवा तकनीकी एवं रोजगारमुखी शिक्षा की ओर तेजी से बढ़ना चाहता है, लेकिन कर्मकांड जैसे पाठ्यक्रम थोप कर यहां के विद्यार्थियों को पंगु बना कर भ्रमित किया जा रहा है, अर्थात इस प्रकार की भर्ती की जा रही है उसे विश्वविद्यालय तुरंत प्रभाव से रोके और संशोधित करवा कर जनजाति क्षेत्र के लिए आरक्षण के प्रावधान को लागू किया जाए। 
  वही ज्ञापन देते समय कुशलगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष दीपक कटारा, महासचिव राजेंद्र डोडियार, अर्जुन, राम केश्वर, अजीत, दिनेश, देवीलाल आदि कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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