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राम मंदिर अभी मंदिर नहीं, BJP-RSS का दफ्तर है... शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सबसे बड़ा बयान!

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अयोध्या राम मंदिर 'BJP-RSS का कार्यालय' जैसा... अभी नहीं जाऊंगा: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर बड़ा और विवादित बयान दिया है। शंकराचार्य ने कहा है कि वे अब तक अयोध्या में रामलला के दर्शन करने नहीं गए हैं और जब तक वह स्थान पूरी तरह से मंदिर के स्वरूप में स्थापित नहीं हो जाता, तब तक वे वहां नहीं जाएंगे। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि फिलहाल वह स्थान उन्हें “BJP और RSS का कार्यालय” प्रतीत होता है।

Avimukteshvaranand on Ram Mandir


"पूर्ण उपासना स्थल बनने पर ही करूंगा दर्शन"

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ किया कि उनकी दृष्टि में अभी वह स्थान एक शुद्ध धार्मिक उपासना स्थल के रूप में स्थापित होना बाकी है। उन्होंने कहा, "जब वह स्थान पूर्ण रूप से आराधना का स्थल बन जाएगा, तब मैं वहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए जाऊंगा।"

शंकराचार्य का मानना है कि मंदिर के निर्माण और वहां की व्यवस्थाओं में राजनीतिक और सांगठनिक हस्तक्षेप ज्यादा दिख रहा है, जिससे इसकी धार्मिक स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।

धार्मिक और राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप

शंकराचार्य के इस तीखे बयान के बाद देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।

  • विपक्षी दलों को मिला मौका: विपक्ष इस बयान को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा पर हमलावर हो गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो बात वे पहले से कह रहे थे, आज उस पर देश के सर्वोच्च धार्मिक गुरुओं में से एक ने मुहर लगा दी है।

  • संत समाज में बंटी राय: वहीं दूसरी ओर, संत समाज और राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोग इस बयान पर सधी हुई प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ संतों का कहना है कि मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा पूरी विधि-विधान से हुई है, इसलिए इसे राजनीति से जोड़कर देखना ठीक नहीं है।

पहले भी उठा चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर को लेकर अपनी असहमति जताई हो। इससे पहले जनवरी 2024 में हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के समय भी उन्होंने 'अधूरे मंदिर' में मूर्ति स्थापना को शास्त्रसम्मत न मानते हुए कार्यक्रम से दूरी बनाई थी।

अब उनके इस नए बयान ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के घालमेल पर देशव्यापी बहस को हवा दे दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस तीखी टिप्पणी पर क्या आधिकारिक रुख अपनाते हैं।

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