मासूम के लिए मसीहा बने डॉ. अंकुर बजाज: माँ को आया हार्ट अटैक, फिर भी 3 घंटे की मुश्किल सर्जरी कर बचाई 3 साल के कार्तिक की जान
लखनऊ: चिकित्सा पेशा जब केवल व्यापार बनता दिख रहा हो, तब राजधानी लखनऊ के 'किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी' (KGMU) से आई यह खबर इंसानियत और फर्ज की एक अद्भुत मिसाल पेश करती है। डॉक्टर को भगवान का रूप क्यों कहा जाता है, इसे सच कर दिखाया है KGMU के डॉ. अंकुर बजाज और उनकी समर्पित टीम ने।
निजी अस्पताल मांग रहे थे 15 लाख, KGMU ने महज 25 हजार में रचा इतिहास निराश परिवार जब बच्चे को लेकर KGMU पहुंचा, तो डॉ. अंकुर बजाज और उनकी टीम तुरंत एक्शन में आई। बिना किसी उचित सीटी स्कैन के, बेहद जटिल और खतरनाक स्थिति में भी डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला लिया। लगभग तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस बेहद नाजुक सर्जरी के बाद, बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के उस लोहे की रॉड को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। जहाँ निजी अस्पताल 15 लाख रुपये वसूल रहे थे, वहीं KGMU में यह असंभव सी लगने वाली सर्जरी मात्र 25,000 रुपये में पूरी हुई।
एक तरफ माँ को हार्ट अटैक, दूसरी तरफ फर्ज का इम्तिहान इस चमत्कारिक सर्जरी के पीछे एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी भी रही। जिस वक्त डॉ. अंकुर बजाज ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में मासूम कार्तिक की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, ठीक उसी समय उनकी अपनी माँ को दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अपनी निजी भावना और पारिवारिक संकट के बावजूद, डॉ. बजाज ने मरीज के प्रति अपने कर्तव्य को पहली प्राथमिकता दी और पहले कार्तिक की सर्जरी पूरी की।
चिकित्सा जगत के असली 'सुपरहीरो' आज के दौर में जहां मेडिकल और टेस्टिंग के नाम पर आम जनता से भारी लूट की शिकायतें आती हैं, वहां डॉ. अंकुर बजाज जैसे डॉक्टर समाज के लिए एक महान मिसाल हैं। सुपरहीरो कोई काल्पनिक किरदार नहीं होते, वे हमारे बीच ही मौजूद होते हैं। डॉ. बजाज के इस कदम और समर्पण को आज पूरा देश नमन कर रहा है।

