गरीबों की ज़मीन पर पटवारी का 'साम्राज्य': MP के खंडवा में 51 पट्टे अपने और पत्नी के नाम किए, शिकायत के बाद सस्पेंड
खंडवा (मध्य प्रदेश): सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक नया और अनोखा मामला सामने आया है। गरीबों को सिर छुपाने के लिए ज़मीन देने की सरकारी योजना का फायदा उठाकर खंडवा जिले के एक पटवारी ने खुद का ज़मीनी साम्राज्य खड़ा कर डाला। पटवारी ने सार्वजनिक संपत्तियों से लेकर गरीबों के मकानों तक के कुल 51 पट्टे अपने और अपनी पत्नी के नाम दर्ज करवा लिए। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी को तुरंत निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश सरकार की स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत बेघर और भूमिहीन गरीबों को रहने योग्य सरकारी जमीन के निशुल्क पट्टे बांटे जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य उन लोगों को अधिकार देना था जिनके पास खुद का मकान या जमीन नहीं है। जमीन के सीमांकन और पट्टा आवंटन का मुख्य अधिकार स्थानीय पटवारी के पास होता है।
खंडवा जिले के कोलगांव में पदस्थ पटवारी राजेश मंडलोई ने इस अधिकार का गलत फायदा उठाया। योजना के तहत गरीबों को जमीन आवंटित करने के बजाय पटवारी ने:
48 पट्टे सीधे अपने नाम कर लिए।
3 पट्टे अपनी पत्नी के नाम नामांकित करके गिफ्ट कर दिए।
हड़पी गई जमीनों में गरीबों के मकानों की जगह, सरकारी चबूतरे और गांव की सार्वजनिक बावड़ी तक शामिल हैं।
शिकायत और कार्रवाई
पटवारी के इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस नेता उत्तम पाल सिंह ने मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर हुई प्राथमिक जांच में सभी आरोप सही पाए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाया और पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया। प्रशासन अब इन सभी फर्जी पट्टों को निरस्त करने और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
आरोपी: राजेश मंडलोई (पटवारी, कोलगांव, खंडवा)
कुल फर्जी पट्टे: 51 (48 अपने नाम + 3 पत्नी के नाम)
हड़पी गई संपत्ति: गरीबों के मकान, सरकारी चबूतरे, सार्वजनिक बावड़ी
संबंधित योजना: स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना
कार्रवाई: कलेक्टर ऋषभ गुप्ता द्वारा पटवारी निलंबित

