नारी शक्ति की अनूठी मिसाल: बांसवाड़ा की बेटी कनिष्का सिसोदिया का राजस्थान अंडर-23 महिला क्रिकेट टीम में चयन, वागड़ का नाम रोशन
कुशलगढ़/बांसवाड़ा : "कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो!"
यह पंक्तियां बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटी सरवा गांव की बिटिया कनिष्का सिसोदिया पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। अपनी कड़ी मेहनत, अटूट संघर्ष और बुलंद हौसलों के दम पर कनिष्का ने राजस्थान अंडर-23 महिला क्रिकेट टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे वागड़ अंचल में जश्न और गर्व का माहौल है।
छोटी सी सरवा से राजधानी जयपुर तक का सफर
बांसवाड़ा जिले के ग्रामीण आंचल की छोटी सरवा जैसे छोटे से गांव से निकलकर राज्य स्तर तक का सफर तय करना आसान नहीं था। एक ऐसा इलाका जहां आज भी रूढ़िवादी सोच के चलते बेटियों को घर की चारदीवारी से बाहर भेजने में कई तरह की पाबंदियां होती हैं और क्रिकेट को मुख्य रूप से लड़कों का खेल माना जाता है, वहां कनिष्का ने इन तमाम बाधाओं को दरकिनार कर एक नई इबारत लिखी है।
कनिष्का के पिता एडवोकेट दौलतसिंह सिसोदिया बताते हैं कि बचपन से ही उनका झुकाव पढ़ाई के साथ-साथ खेलों की तरफ था। गांव में क्रिकेट खेलने के लिए कोई विशेष बुनियादी ढांचा या मैदान न होने के बावजूद कनिष्का ने कभी हार नहीं मानी। उसने लड़कों के साथ कच्चे मैदानों और टेनिस बॉल से कड़ा अभ्यास किया। कई सामाजिक ताने और रुकावटें आईं, लेकिन उसके कदम नहीं डगमगाए। कुशलगढ़ से शुरुआती पढ़ाई के बाद उसने बांसवाड़ा पहुंचकर जिला क्रिकेट अकादमी में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली। सुबह की अलसुबह उठकर कड़ा अभ्यास, फिटनेस और पसीना बहाना उसकी रोजमर्रा की दिनचर्या बन गई।
ऑलराउंडर खेल से बिखेरा जलवा
कनिष्का एक बेहतरीन ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं, जो दाएं हाथ से बल्लेबाजी के साथ-साथ लेग स्पिन गेंदबाजी में भी माहिर हैं। जिला स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर ही उनका चयन राजस्थान की अंडर-23 टीम के लिए हुआ है, जिसके बाद अब वह राजधानी जयपुर और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले टूर्नामेंटों में अपना जौहर दिखाने के लिए तैयार हैं।
गांव में खुशी का माहौल, ग्रामीणों ने किया स्वागत
जैसे ही कनिष्का के चयन की खबर छोटी सरवा और आसपास के क्षेत्रों (बड़ी सरवा, भंवरदा, सरोना आदि) में पहुंची, ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव में ढोल-नगाड़े बजाकर और आतिशबाजी कर जश्न मनाया गया। पंचायत और परिजनों ने कनिष्का का साफा बंधवाकर और माला पहनाकर भव्य स्वागत किया।
ग्रामीण महिलाओं ने गर्व से कहा कि हमारी बेटी ने साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। कनिष्का अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और अपने गांव के स्नेह को देती हैं। उनका कहना है कि अगर सही मौका और प्रोत्साहन मिले, तो ग्रामीण इलाकों की बेटियां भी देश और दुनिया में बड़ा नाम रोशन कर सकती हैं।
कनिष्का सिसोदिया की यह सफलता हर उस माता-पिता के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी बेटियों के सपनों को पंख देना चाहते हैं। वागड़ की यह बेटी अब राजस्थान के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम (टीम इंडिया) का हिस्सा बनकर देश का नाम रोशन करने का बड़ा सपना संजोए हुए है।


