विशेष समाचार: ऐतिहासिक राजस्व संग्रह के बावजूद बुनियादी ढांचे पर उठते तीखे सवाल
रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण: राजस्थान कर विभाग की बड़ी उपलब्धि
जयपुर/बांसवाड़ा : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन एवं प्रमुख शासन सचिव (कर) के कुशल निर्देशन में राजस्थान के कर विभाग ने राजस्व संग्रहण में एक नया इतिहास रच दिया है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश ने 1 जुलाई 2017 को GST लागू होने के बाद से अब तक का सर्वाधिक मासिक GST एवं VAT राजस्व संग्रहण दर्ज किया है।
अक्टूबर 2026 में कुल संग्रहण: ₹7,047.27 करोड़
पिछला रिकॉर्ड (मार्च 2026): ₹6,826.60 करोड़ (इस बार ₹220.67 करोड़ की वृद्धि)
अक्टूबर 2025 की तुलना में अंतर: ₹6,303.88 करोड़ के मुकाबले ₹743.39 करोड़ (लगभग 11.79%) की बढ़त
चालू वित्तीय वर्ष (अप्रैल-अक्टूबर 2026) का कुल संग्रह: ₹44,034.09 करोड़
कर विभाग द्वारा कर अनुपालन में सुधार, पारदर्शी व्यवस्था और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने की रणनीतियों के बल पर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई है।
जनता का सवाल: रिकॉर्ड कमाई का लाभ धरातल पर कहां?
एक ओर जहां सरकार करोड़ों रुपये के रिकॉर्ड राजस्व का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और स्थानीय निवासियों के बीच विकास के दावों की जमीनी हकीकत को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है।
1. बांसवाड़ा की बदहाल सड़कें और पैचवर्क का सहारा
चुनावी वादों के दौरान बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और 'अच्छे दिनों' के सपने दिखाए गए थे, लेकिन बांसवाड़ा शहर की मुख्य सड़कों पर गड्डों को भरने के नाम पर महज पैचवर्क (थिगड़े) लगाकर इतिश्री की जा रही है। जगह-जगह टूटी सड़कें हादसों को न्योता दे रही हैं और जनता हिचकोले खाने को मजबूर है।
2. जर्जर सरकारी स्कूल और बुनियादी सुविधाएं
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्थित कई सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
3. कार्यालयों की भव्यता बनाम जनता का बुनियादी ढांचा
स्थानीय नागरिकों और विपक्ष द्वारा यह तीखा सवाल उठाया जा रहा है कि जहां एक तरफ आम जनता के टैक्स के पैसे से जनसुविधाएं और बुनियादी ढांचा पटरी पर नहीं आ पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ देशभर के जिलों में राजनीतिक दलों एवं संगठनों के कार्यालय किसी फाइव-स्टार होटल जैसे आलीशान और भव्य बनते जा रहे हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार का कर विभाग भले ही राजस्व के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हो, लेकिन बांसवाड़ा जैसे जिलों की जमीनी हकीकत यह बयां करती है कि खजाने में आते इन करोड़ों रुपयों का लाभ आम नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी तक सही मायने में पहुंचना अभी बाकी है।

