मुंबई।। महाराष्ट्र के परभानी जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पति के कर्ज के मामले को खत्म करने के लिए छह लाख रुपए देने से इंकार करने के बाद जातिगत पंचायत के आठ पंचों ने उसकी पत्नी से संबंध बनाने की मांग की। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) के सफल हस्तक्षेप के बाद इस दंपत्ित पर लगाया गया सामाजिक प्रतिबंध हटा लिया गया और साथ ही गुरुवार को पंचायत भी भंग कर दी गई। पति की पहचान दीपक भोरे के रूप में हुई है, जो गोंधाली समुदाय का है। यह दंपति मराठवाड़ा के परभानी जिले में सेलु में रहता है। इस दंपत्ित ने अपने समुदाय के पंचों से दो साल पहले नौ लाख रुपए का कर्ज लिया था। उन्होंने दावा किया कि 2.50 लाख रुपए पंचायत को लौटा दिए। जातिगत पंचायत ने बकाया राशि का सेटलमेंट करने के लिए छह लाख रुपए की मांग की, जिसे देने से दंपत्ित ने इंकार कर दिया।
इससे नाराज पंचायत ने उन्हें निष्काषित कर दिया। दीपक के मामा सुभाष उगले ने कहा कि पंच जबरन सूले में दीपक के घर घुस गए और उसकी पत्नी से दुर्व्यवहार किया। घर का सामान अपने साथ ले जाने के अलावा उन्होंने एक चप्पल उनके घर के बाहर बांध दी। यह इस बात का सूचक है कि दीपक को जाति से बाहर कर दिया गया है। दीपक की पत्नी ने आरोप लगाया कि पंचों ने उससे मांग की थी कि यदि पति कर्ज की राशि चुकाने में असमर्थ है, तो इसके बादले में वह उनसे संबंध बना ले। समाज से बहिष्कृत किए जाने के बाद वे नासिक चले गए। उगले ने कहा कि पंचायत ने यह चेतावनी भी दी कि यदि किसी ने दीपक और उसकी पत्नी की मदद की, तो उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान उगले ने नासिक में MANS के कार्यकर्ता कृष्ण चंदगुदे से संपर्क कर उनकी मदद मांगी।
कृष्ण ने पहले दंपति को इस बात के लिए राजी किया कि वह पंचायत के फरमान के खिलाफ आवाज बुलंद करें और उन्होंने जिला प्रशासन को भी इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने गोंडाली समुदाय के सदस्यों से बात की और उन्हें समझाया कि पंचों का फैसला गलत है। नतीजतन समुदाय के लोगों ने पंचायत की ओर से लगाए गए सामाजिक प्रतिबंध को हटाने की मांग की और बाद में इस जातिगत पंचायत को भंग करने के लिए वे तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि अन्य पंचायतें भी इस कदम को उठाएंगी। कृष्ण ने कहा कि इस तरह के खाप पंचायत व्यवस्था के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
इससे नाराज पंचायत ने उन्हें निष्काषित कर दिया। दीपक के मामा सुभाष उगले ने कहा कि पंच जबरन सूले में दीपक के घर घुस गए और उसकी पत्नी से दुर्व्यवहार किया। घर का सामान अपने साथ ले जाने के अलावा उन्होंने एक चप्पल उनके घर के बाहर बांध दी। यह इस बात का सूचक है कि दीपक को जाति से बाहर कर दिया गया है। दीपक की पत्नी ने आरोप लगाया कि पंचों ने उससे मांग की थी कि यदि पति कर्ज की राशि चुकाने में असमर्थ है, तो इसके बादले में वह उनसे संबंध बना ले। समाज से बहिष्कृत किए जाने के बाद वे नासिक चले गए। उगले ने कहा कि पंचायत ने यह चेतावनी भी दी कि यदि किसी ने दीपक और उसकी पत्नी की मदद की, तो उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान उगले ने नासिक में MANS के कार्यकर्ता कृष्ण चंदगुदे से संपर्क कर उनकी मदद मांगी।
कृष्ण ने पहले दंपति को इस बात के लिए राजी किया कि वह पंचायत के फरमान के खिलाफ आवाज बुलंद करें और उन्होंने जिला प्रशासन को भी इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने गोंडाली समुदाय के सदस्यों से बात की और उन्हें समझाया कि पंचों का फैसला गलत है। नतीजतन समुदाय के लोगों ने पंचायत की ओर से लगाए गए सामाजिक प्रतिबंध को हटाने की मांग की और बाद में इस जातिगत पंचायत को भंग करने के लिए वे तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि अन्य पंचायतें भी इस कदम को उठाएंगी। कृष्ण ने कहा कि इस तरह के खाप पंचायत व्यवस्था के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
