बरेली।। मुस्लिम पर्सनल लॉ दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के अपराधों में लागू नहीं होगा। इन मामलों में भारतीय वयस्कता अधिनियम के तहत ही विचार किया जाएगा। इस आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सय्यद सरवर हुसैन रिजवी ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील नामंजूर कर दिव्यांग की जमानत अर्जी खारिज कर दी। पीड़िता के पिता ने थाना फरीदपुर में आठ अक्टूबर 2015 को तहरीर दी कि उसकी नाबालिग बेटी को नन्हे, मुंटी, सलीम, बुंदन बेग, अफसाना व जब्बार ने अपहृत कर लिया। आरोप लगाया कि मोटी रकम लेकर पीड़िता को जब्बार को बेच दिया है और उसकी बेटी की हत्या कर दी है। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर धारा 164 के तहत उसका बयान कराया। लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया कि उसने जब्बार से निकाह कर लिया है तथा पति के साथ रहना चाहती है।
गुरुवार को अभियुक्त जब्बार की जमानत अर्जी पर सुनवाई की गई। जब्बार के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत रजस्वला होने के बाद मुस्लिम लड़की अपने माता-पिता की सहमति के बगैर भी अपनी मर्जी से निकाह कर सकती है। किशोरी की जन्मतिथि 18 अगस्त 2001 थी। पीड़िता जब्बार से निकाह कर पति-पत्नी की तरह रह रही थी। लिहाजा उसे जमानत पर रिहा किया जाए। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने अपने निर्णय में उल्लेख किया है कि भारतीय दण्ड संहिता और पाक्सो एक्ट के तहत आपराधिक मामलों पर मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू नहीं होता है। लिहाजा नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में अपराध है। पीड़िता की सहमति कोई मायने नहीं रखती। न्यायालय ने जब्बार की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। वह भूरे खां की गौटिया थाना फरीदपुर का रहने वाला है। जमानत का विरोध एडीजीसी राजपाल सिंह ने किया।
गुरुवार को अभियुक्त जब्बार की जमानत अर्जी पर सुनवाई की गई। जब्बार के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत रजस्वला होने के बाद मुस्लिम लड़की अपने माता-पिता की सहमति के बगैर भी अपनी मर्जी से निकाह कर सकती है। किशोरी की जन्मतिथि 18 अगस्त 2001 थी। पीड़िता जब्बार से निकाह कर पति-पत्नी की तरह रह रही थी। लिहाजा उसे जमानत पर रिहा किया जाए। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने अपने निर्णय में उल्लेख किया है कि भारतीय दण्ड संहिता और पाक्सो एक्ट के तहत आपराधिक मामलों पर मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू नहीं होता है। लिहाजा नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में अपराध है। पीड़िता की सहमति कोई मायने नहीं रखती। न्यायालय ने जब्बार की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। वह भूरे खां की गौटिया थाना फरीदपुर का रहने वाला है। जमानत का विरोध एडीजीसी राजपाल सिंह ने किया।
