


पहले दलितों की जमीन छीन ली, विरोध किया तो दो भाइयों को गोली मार दी, अब कह रहे हैं, पक्ष में गवाही दो नहीं तो खानदान को मिटा देंगे...भवानीपुर में 60-70 दलितों को मिली 110 एकड़ जमीन पर 20 सालों से कर रखा है कब्जा
हत्या, अपहरण और रंगदारी के 46 मुकदमें हैं और विधायक पत्नी बता रही हैं जान को खतरा
पूर्णिया के मरंगा गांव और न्यू सिपाही टोला के बीच के बियाबान में बने एक झोपड़े के आगे एक टैंट लगा है. इस टेंट के नीच एक एसआई और चार सिपाही इस भीषण ठंड में पुआल से बने बिछावन पर चिथड़ी रजाई ओढ़े लेटे हुए हैं. इन पर एक दलित परिवार को इस इलाके कुख्यात अपराधी अवधेश मंडल के कहर से बचाने की जिम्मेदारी है. अवधेश मंडल जो पूर्व मंत्री, वर्तमान में रुपौली विधानसभा की विधायक बीमा भारती के पति हैं, फैजान नामक अपराधी समूह के मुखिया बताये जाते हैं. उन पर 46 आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं, इनमें से ज्यादातर हत्या, अपहरण और रंगदारी के मुकदमें हैं. उनमें से यह भी एक मुकदमा है जिसमें इस दलित परिवार के मुखिया चंचल पासवान की हत्या करने का आरोप उन पर है. मरहूम चंचल पासवान के पुत्र सुनील पासवान कहते हैं कि पिछले दिनों अवधेश मंडल ने खुद आकर उन्हें और उनकी मां को धमकी दी थी कि या तो उनके पक्ष में गवाही दें या वे पूरे खानदान को खतम कर देंगे.
गौरतलब है कि इसी मामले में पिछले दिनों अवधेश मंडल की गिरफ्तारी मरंगा थाना में हुई थी. मगर आरोप है कि उनकी पति और जदयू विधायक बीमा भारती व जदयू सांसद संतोष कुशवाहा की मौजूदगी में उनकी मदद से अवधेश मंडल थाने से भाग गया. हालांकि मीडिया में हाइलाइट होने के बाद पुलिस ने दबिश तेज कर दी और अवधेश मंडल को फिर से गिरफ्तार कर लिया. मगर इस बीच यह दलित परिवार जो पिछले दो दशकों से अवधेश मंडल के कहर का शिकार हो रहा है, दहशत में आ गया और वह इस इलाके से पलायन करने की तैयारी करने लगा. इन हालात में पुलिस की ओर से इस परिवार को यह खास सुरक्षा दी गयी है.
37 वर्षीय सुनील पासवान जो चंचल पासवान के बड़े लड़के हैं, कहते हैं यह कहानी 1988 में शुरू हुई जब उनके पिता समेत 60-70 भूमिहीन दलित परिवारों को जिले के भवानीपुर प्रखंड के डुमरा में सरकार की ओर से जमीन दी गयी थी. वह 110 एकड़ का प्लॉट था, जो वहां के जमीन्दार नुनू राय से लैंड सीलिंग के तहत ली गयी थी. जब उन दलित परिवारों को खेती करने के लिए वह जमीन दी गयी तो स्थानीय दबंगों की बुरी निगाह उस जमीन पर पड़ने लगी. वे कहते हैं, अभी वे लोग पांच साल भी जमीन जोत नहीं पाये थे, कि अवधेश मंडल के फैजान गिरोह ने दलितों को डरा धमका कर उनसे जमीन छीनना शुरू कर दिया. शुरुआत में उन्होंने 25 बीघा जमीन पर कब्जा किया.
सुनील कहते हैं कि उनके बड़े बाबूजी कैलाश पासवान और उनके पिता चंचल पासवान हमेशा से इन लोगों का विरोध करते थे. थाना-पुलिस और सरकारी अधिकारियों से इनके द्वारा जमीन कब्जा किये जाने की शिकायत करते थे.
हालांकि कोई अधिकारी इनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करता, मगर फैजान गिरोह वाले इस वजह से उनके और खफा हो गये थे. अक्सर घर आकर हमलोगों को धमकाते रहते थे. इन्हीं हालात में 2004 में पहले कैलाश पासवान की हत्या कर दी गयी और फिर 2005 में उनके पिता चंचल पासवान की हत्या कर दी गयी. कैलाश पासवान की हत्या के बाद वे लोग काफी भयभीत थे इसलिए ठीक से अपना पक्ष नहीं रख पाये. मगर चंचल पासवान की हत्या के बाद उन्हें समझ में आ गया कि लड़े बगैर कोई उपाय नहीं है, कब तक इनके जुल्मों को सहा जाये.
दस साल पहले हुई उस वारदात को याद करते हुए सुनील कहते हैं कि एक रात कुछ लोग उनके घर आये. उन लोगों ने कहा कि जमीन का मामला निबटाने के लिए पूर्व विधायक बीमा भारती उन्हें बुला रही हैं. उस वक्त बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू था. उनके पिता चंचल पासवान को लगा कि इन लोगों को ईश्वर ने सद्बुद्धि दे दी है, पत्नी राजनीति में आ गयी है, इसलिए आपराधिक गतिविधियों से खुद को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं. वे चले गये. मगर बाद में उनकी लाश मिली. इसके बाद उन लोगों ने गांव छोड़ दिया और अपने ननिहाल मरंगा में शरण ले ली. तब से वे यही हैं. इस बीच फैजानों ने डुमरा में दलितों को मिली सारी जमीन पर कब्जा कर लिया.
अचानक फिर से यह मामला कैसे शुरू हुआ इसकी कहानी बताते हुए सुनील कहते हैं, दरअसल दस साल बाद अब जाकर इस मामले की सुनवाई शुरू हुई है और अब उनकी मां सोनिया देवी की गवाही होनी है. अवधेश मंडल और फैजान गिरोह के दूसरे लोग कई दिनों से फोन पर और उनके घर आकर उन्हें धमकी दे रहे हैं कि या तो उनके पक्ष में गवाही दें या पूरे खानदान को मिटा देंगे. वे कहते हैं, अवधेश मंडल तो पहले से खूंखार अपराधी है, अब उसको अपनी विधायक पत्नी और जदयू सांसद संतोष कुशवाहा का साथ मिल गया है. ऐसे में उनके परिवार के लोग डरते रहते हैं कि न जाने क्या हो... और तो और बीमा भारती ने उनके परिवार के लोगों पर मुकदमा कर दिया है कि हमलोगों से अवधेश मंडल को जान से मारने की कोशिश की है. बताइये, हमलोग अवधेश मंडल को छू भी सकते हैं.
रोचक तथ्य यह है कि भवानीपुर के उस 110 एकड़ की जमीन पर जो दलितों के बीच 28 साल पहले बांटी गयी थी, आज भी अवधेश मंडल का कब्जा है और उसके फैजान गिरोह के लोग उस पर खेती करते हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले भवानीपुर प्रखंड के अधिकारियों ने उस जमीन पर दलितों को दखल दिलाने की कोशिश की थी, मगर अवधेश मंडल ने उस वक्त अधिकारियों के साथ मारपीट की. भय की वजह से अधिकारियों ने उस काम से अपने हाथ खींच लिये. विडंबना तो यह है कि कथित तौर पर अवधेश मंडल के फैजान गिरोह की स्थापना जमीन्दारों से जमीन छीन कर गरीबों के बीच बांटने के लिए की गयी थी. मगर इस मामले में उक्त गिरोह ने दलितों की जमीन छीन कर खुद हड़ल ली है. भवानीपुर के डुमरा में आज भी वे दलित परिवार भूमिहीन हैं और उन्होंने उस जमीन की आस तकरीबन छोड़ दी है. इधर सुनील और उसके पांच भाई समेत उसका पूरा परिवार इस उम्मीद में है कि मामले के हाइलाइट होने पर नीतीश कुमार इसमें हस्तक्षेप करेंगे. उन्हें उनके पिता की हत्या का न्याय मिलेगा और दलितों को इस दबंग के खौफ से मुक्ति.
(बासु मित्र की रिपोर्ट)
