शमशाद रोज़ 50 गायों को पानी पिलाता है

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     प्यास का अहसास क्या होता है, ये हमें उस समय पता चलता है, जब हम बहुत ही ज्यादा प्यासे होते हैं, और हमारे पास पानी की कमी होती है. इस समय देश के कई हिस्सों में इंसानों को पानी मुश्किल से मिल रहा है. कई इलाके सूखे की मार झेल रहे हैं, तो कई जगहों पर पानी माफियाओं का जाल बिछा है. इंसान मुश्किलों और चुनौतियों का सामना कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन बेजुबान प्यासे ही मरते जा रहे हैं. सरकार बेहाल जनता की सुध नहीं ले रही है, तो इनकी सुध क्यों ले? ऐसे में इन जानवरों की प्यास बुझाने के लिए 25 वर्षीय शमशाद नाम का एक शख़्स आता है, जो इनके लिए भगवान का ही एक रूप है. आइए इस साधारण इंसान की असाधारण कहानी बताते हैं.
      दिल्ली से सटे देवली में इन दिनों पानी की कमी चल रही है. पानी पर माफियाओं ने कब्ज़ा कर रखा है. प्यास से परेशान जनता पैसे देकर पानी ख़रीदने को मजबूर है. लेकिन सड़कों पर रहने वाली गायों के पास पैसे नहीं है, इस कारण उनकी प्यास नहीं बुझती है. पर जैसे ही ये गायें शमशाद का चेहरा देखती हैं, इनके चेहरे पर चमक आ जाती है.
साइकिल वाला बना भगवान
    देवली स्थित बी-ब्लॉक में शमशाद की एक साइकिल की दुकान है. उन्होंने अपनी दुकान के बाहर गायों के लिए विशेष प्रकार की थर्माकोल की दो टंकियां बना रखी हैं. प्रतिदिन 40 से 50 गायें इनकी दुकान पर आकर पानी पीती हैं.
शमशाद की सेवा
    देश में इन दिनों 'गाय की राजनीति' इस क़दर हावी है कि लोग गाय के नाम से भी घबराने लगे हैं. लेकिन शमशाद को देख कर मालूम होता है कि इनके लिए इंसानियत मायने रखती है. निस्वार्थ सेवा से काम करने वाले शमशाद को हमारा सलाम.
     हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि गाय को रोटी खिलाना पुण्य का काम है. तो सोचिए ज़रा! गाय को पानी पिलाने से कितना पुण्य मिल सकता है.
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