इस मुस्लिम शख्स ने 'मां' की मौत पर कराया मुंडन, गंगा में विसर्जित की अस्थियां

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    जोधपुर।। रामेश्वर नगर क्षेत्र में दोस्ती की ऐसी मिसाल देखी गई है जिसमें बेगाने ने अपने की तरह फर्ज निभाया है। इस दोस्ती में धर्म-मजहब का कोई दस्तूर नहीं है। जी हां 25 वर्षीय दो युवकों प्रवीण दैय्या और फराज खान की ऐसी ही दोस्ती सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल बनी हुई है।
    दोनों बचपन से दोस्त हैं। प्रवीण के परिजनों के समझाने पर फराज ने मांसाहार छोड़ शाकाहार बन गया। पिछले दिनों 15 अप्रैल को जब प्रवीण की मां कौशल्या देवी की किडनी फेल होने से मृत्यु हो गई तो फराज ने न केवल अपना मुंडन करवाया, बल्कि अंतिम संस्कार में भाग लेकर हरिद्वार में अस्थियां विसर्जन करने भी गया। अब प्रवीण और उसके परिजनों के साथ गरुड़ पुराण भी सुन रहा है।
   चार साल पहले प्रवीण की मां कौशल्या की किडनी फेल हो गई और वे डायलिसिस पर रहने लगीं। फराज कौशल्या को अपनी मां की तरह मानता था। वह उन्हें किडनी देने को तैयार हो गया, लेकिन किडनी मैच नहीं होने से डाक्टर्स ने मना कर दिया। वह प्रतिदिन प्रवीण की मां को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेता था उनकी सलामती के लिए उसने ख्वाजा साहब की मजार पर चादर पेश की, तो सिद्धि विनायक मंदिर में माथा भी टेका। आखिर प्रवीण की मां नहीं रही, लेकिन फराज ने दोस्ती का धर्म निभाया। फराज का कहना है कि मित्रता का धर्म ही सबसे बढ़ कर है।
     प्रवीण के पिता सुखदेव दैय्या जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी में ड्राइवर है जबकि फराज के पिता बैंक में मैनेजर हैं। दोनों ने छठी कक्षा से बीटेक तक की पढ़ाई साथ में की। पढ़ाई के दौरान दोनों में घनिष्ठता बढ़ी, एक-दूसरे के घर आना-जाना चलता रहा। प्रवीण के परिजनों की बातों से प्रभावित होकर फराज ने मांसाहार त्याग दिया। 
     दोनों ही परिवार आपस में अच्छा मेल-मिलाप व प्रेम रखते हैं, सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते हैं। दीपावली, होली और ईद भी साथ मनाते हैं। फराज खान पढ़ाई के बाद मुंबई में बस गया। वहां टीवी सीरियल में काम करने लगा।
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