यह चायवाला है ‘कोहिनूर हीरे’ का असली वारिस, खुद को कोलंबस का वंशज बताता है

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  कोहिनूर हीरा दुनिया का बेशकीमती हीरा है. फ़िलहाल ये ब्रिटेन के पास है. भारत सरकार इस हीरे पर कई बार दावा कर चुकी है, लेकिन अभी तक इसमें सफ़लता नहीं मिली है. वहीं भारत के मध्य प्रदेश में एक ठेलेवाले ने दावा किया है कि कोहिनूर उसकी अपनी खानदानी संपत्ति है. कोहिनूर से जुड़े कई और तथ्य हैं, जिन्हें जान कर आप भी विश्वास नहीं करेंगे.
क्रिस्टाफेर कोलंबस का है वंशज
     मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले स्टेनली जॉन लुईस का दावा है कि कोहिनूर भारत सरकार की नहीं, बल्कि उनकी खानदानी संपत्ति है. लुईस कहते हैं कि वे क्रिस्टाफेर कोलंबस के वंशज हैं. आपको बता दें कि कोलंबस ने ही अमेरिका की खोज की थी.
कोहिनूर के लिए कानूनी लड़ाई
     कोहिनूर के लिए लुईस ने 2008 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की. इस याचिका में उन्होंने भारत व ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सहित अन्य को पक्षकार बनाया है. इस याचिका की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने जनहित याचिका के स्थान पर डब्ल्यूपी दायर की, जिसके जरिए वह कोहिनूर को बजाए भारत के अपनी प्राइवेट संपत्ति साबित करने में जुटे हैं.
कोहिनूर से संबंधित तथ्य
कोहिनूर हीरे की कीमत 150 हजार करोड़ रुपए है.
यह कोहिनूर हीरा 105 कैरेट का है.
इस हीरे को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज में सजाया गया है.
वहीं लुईस के अनुसार, यदि इस हीरे को बेचा जाए तो उससे 700 सालों तक सारी दुनिया को खाना खिलाया जा सकता है.
इंटरनेशनल कोर्ट तक जाएंगे
    कोहिनूर के लिए लुईस सुप्रीम कोर्ट और इंटरनेशनल कोर्ट जाएंगे. उनका कहना है कि ख़ानदान की निशानी के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं.

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