मेरा बचना समंदर की ज़िम्मेदारी है.
दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत,
यह एक चिराग कई आंधियों पर भारी है.
कुछ ऐसा ही हिम्मती है यह नौजवान सुनील. शारीरिक लाचारी और आर्थिक संकट के बीच जीवन बिता रहे हायर सेकेंडरी पास सुनील पटेल के हौसले ने उनकी बेबसी के आगे हथियार नहीं डाले. 16 साल पहले पेड़ से गिरने के कारण निःशक्त हो गए सुनील की ज़िन्दगी बिस्तर पर ही गुजर रही है. इसलिए उन्होंने 10वीं और 12वीं के बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाने का बीड़ा उठाया. वे पिछले 2 सालों से बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रहे हैं. उनके इस हौसले और जज़्बे की तारीफ़ हर ज़ुबान पर है.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला निवासी 32 वर्षीय सुनील पटेल के साथ किस्मत ने बेहद निर्दयी खेल खेला. साल 2000 में सुनील अपने दोस्तों के साथ आम तोड़ने गए थे. पेड़ पर चढ़ कर आम तोड़ते समय वह अचानक जमीन पर गिर गए. सुनील के पिता झगरू राम पटेल और माता सरोज बाई ने बताया कि अपने बेटे के इलाज में उन्होंने कोई कमी नहीं रखी. खेत बेचकर इलाज में खर्च कर डाला, लेकिन डॉक्टरों ने कह दिया कि सुनील अब जीवन भर चल नहीं पाएगा. मजबूरन सुनील को अपने हालात से समझौता करना पड़ा.
सुनील कहते हैं कि पिछले 2 सालों से वे 10वीं, 12वीं के विद्यार्थियों को अपने पास बुलाकर उन्हें निःशुल्क कोचिंग दे रहे हैं. इससे उनका समय कट जाता है, साथ ही इस बात की खुशी होती है कि वह बच्चों में ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं. अपनी निःशक्तता को धता बता कर युवाओं को नई प्रेरणा देने के सुनील के फ़ैसले का हर कोई कायल हो गया है.
राशन कार्ड भी छिन गया
सुनील पटेल ने बताया कि निःशक्त होने पर उन्हें राशन कार्ड प्राप्त हुआ था. बाद में निरीक्षण के समय उनका राशन कार्ड यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि शासन द्वारा राशन कार्ड का मुखिया महिला को बनाने का आदेश है. चूंकि निःशक्तजनों के लिए अलग से राशन कार्ड देने का प्रावधान है, इसलिए उन्हें राशन कार्ड भी मिलना चाहिए. सरकार की ओर से इस परिवार को आर्थिक मदद की दरकार है.
