कांस्टेबल धर्मेंद्र रोज़ की तरह अपनी ड्यूटी के लिए जा रहे थे तभी एक ऑटो ड्राइवर उनके पास आया और उन्हें सूचित किया कि सड़क पर एक बच्चा रो रहा है। तभी पुलिस कांस्टेबल धर्मेंद्र ने बिना कोई देरी किए तुरंत उस बच्चे को अपनी निगरानी में लिया। जिसके बाद वह उस बच्चे के परिवारवालों को ढूंढने में लग गए। बाद में बच्चे की पहचान पारुल के रूप में हुई।
सुबह करीब 8 बजे की घटना ,है जब यह बच्चा अचानक से एक ऑटो में बैठ गया और अपने माता-पिता को ढूंढने लगा। जब अन्य ऑटो-रिक्शा चालकों ने उससे पूछा कि वह कहा रहता है, तो बच्चा रोने लगा।
जैसे ही कांस्टेबल धर्मेंद्र को बच्चे की सूचना मिली, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और बच्चे के माता-पिता की तलाश शुरू कर दी।
कांस्टेबल धर्मेंद्र ने ऑटो-रिक्शा चालक से कालकाजी के ए, बी और सी के एक-एक घर ले जाने का आग्रह किया, ताकि बच्चे को सुरक्षित उसके घर पहुंचाया जा सके। एक पुलिस अधिकारी ने कहा:
“धर्मेंद्र जहां भी गए लोगों ने उन्हें बच्चे के घर तक पहुंचने का रास्ता बताया। चूंकि धर्मेंद्र बीट कॉन्स्टेबल हैं, इसलिए उस इलाके की अच्छी जानकारी रखते थे।”
बच्चे को सही सलामत घर पहुंचाने की यह कवायद इतनी आसान नहीं थी। बच्चा इलाके के कुछ घरों को ही पहचानता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कांस्टेबल ने इलाके के किसी घर को नहीं छोड़ा, बच्चे के माता-पिता तक पहुंचने के लिए हर घर का दरवाजा खटखटाया।
बच्चे के घर पहुंचकर उसकी पहचान पारुल के तौर पर हुई। पारुल अपने दादा तीरथ कोहली के साथ रहता है, जिनका उसी इलाके में एक छोटा सा कारोबार है। 2 साल पहले पारुल के पिता की मौत हो गई थी, जिसके बाद मां की शादी कहीं और करा दी गई थी।
बच्चा गलती से अपने घर के बाहर आ गया था। कहा यह भी जा रहा है कि बच्चे को किसी ने टॉफी या खिलौने का लालच दिया हो सकता है। पुलिस का कहना है कि बच्चा मेन रोड से दो किलोमीटर तक आ गया था।
कांस्टेबल धर्मेंद्र की इस मामले में दिखाई गई सूझबूझ के चलते उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। डीसीपी मनदीप सिंह रंधावा ने कहा कि ‘कांस्टेबल धर्मेंद्र को इस मामले के लिए इनाम दिया जाएगा।’
