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फ्यूल स्टेशन पर यूं कट जाती है जेब और आप पकड़ भी नहीं पाते, जानें कैसे

    फ्यूल स्टेशन मालिकों द्वारा पेट्रोल चोरी की बढ़ती शिकायत के बाद राजधानी सहित प्रदेश में नापतौल विभाग पेट्रोल चोरी रोकने के लिए एक नया सिस्टम लागू कर रहा है। अब यदि फ्यूल भरने वाली मशीन से छेड़छाड़ होगी तो कंट्रोलिंग अथॉरिटी इसे पकड़ लेगी। फ्यूल स्टेशन से कम फ्यूल भरने की शिकायत पूरे देश में होती है। आपको बता रहा है फ्यूल स्टेशन पर फ्यूल कैसे चोरी होता है और कैसे इससे बचा जा सकता है। पहले जानिए, क्या है चोरी पकड़ने का नया सिस्टम?...
     राजधानी में पिछले एक साल में नापतौल विभाग ने एक दर्जन से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर गड़बड़ी पकड़ी है। बताया जाता है कि कई फ्यूल स्टेशन गाड़ियों में 1 लीटर फ्यूल में से 200 एमएल फ्यूल कम डालते थे। नापतौल विभाग के निरीक्षक राजेश पिल्लई ने पेट्रोल मशीन में एक सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल किया है। यह सॉफ्टवेयर मशीन से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की पोल खोल देगा।
     साॅफ्टवेयर इन्स्टॉल होते ही यह 4 डिजिट का एक केलीब्रेशन नंबर जारी करेगा। यह केलीब्रेशन नंबर फ्यूल स्टेशन के नाम से दर्ज हो जाएगा। फ्यूल स्टेशन वालों ने सॉफ्टवेयर रीसेट किया या फिर कोई छेड़छाड़ की तो सॉफ्टवेयर एक नया केलीब्रेशन नंबर जारी कर देगा, जो यह साबित करेगा कि मशीन के साथ छेड़छाड़ हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक चिप से भी करते थे चोरी
       कुछ समय पहले भोपाल क्राइम ब्रांच ने फ्यूल स्टेशन की मशीनों में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर चोरी करने वाले को पकड़ा था। आरोपी एक चिप पेट्रोल-डीजल भरने वाली मशीन में लगाता था। मशीन के सर्किट में एक सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करता था और सॉफ्टवेयर में यह इनपुट दिया जाता था कि कितना प्रतिशत पेट्रोल-डीजल कम भरना है। फिर उस सर्किट को मशीन की डिस्प्ले यूनिट में इन्स्टॉल किया जाता था, जिससे मशीन कम पेट्रोल देती थी, लेकिन डिस्प्ले बोर्ड में मात्रा पूरी दिखाई देती थी। यह चिप फ्यूल स्टेशन को 10 से 50 हजार रुपए में बेची जाती थी।