जानिये फोटोग्राफी के तकनिकी पहलुओं को

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    फोटोग्राफी के समय आप मेगापिक्सल, सेंसर और आईएसओ जैसे शब्द सुनते तो हैं लेकिन क्या इन तकनीक के बारे में जानकारी है?
     आज स्मार्टफोन में कैमरे काफी ताकतवर हो गए हैं लेकिन इन कैमरों से आप तभी बेहतर तस्वीर ले सकते हैं जब कैमरा फीचर के बारे में आपको पूरी जानकारी हो। आगे हमने कैमरा फीचर्स के बारे में पूरी जानकारी दी है साथ ही उसके उपयोग को भी समझाया है।
1. मेगापिक्सल
आज लोग फोन कैमरे की क्षमता का अंदाजा मेगापिकसल देखकर ही लगाते हैं। कैमरा तस्वीर का निर्माण छोटे-छोटे डाॅट के आधर पर करता है जिन्हें पिक्सल कहते हैं। पिक्चर के निर्माण में जब इनकी संख्या लाखों में होती है तो उसे मेगापिक्सल कहते हैं। एक कैमरा पिक्चर निर्माण में जितना ज्यादा पिक्सल का उपयोग करेगा वह उतना बेहतर कहा जाएगा। इसे प्रति इंच डाॅट के हिसाब से मापा जाता है। [इसे भी पढ़ें: जानें क्या है फोन रूट और इसके फायदे]
2. इमेज सेंसर 
     कैमरे में इमेज सेंसर को सामन्यतः पिक्सल के साथ ही जोड़ा जाता है लेकिन ऐसा नहीं है। कैमरा लेंस से जो भी सूचनाएं आती हैं वह इमेज सेंसर पर रिकॉर्ड होता है। इमेज सेंसर जितना बड़ा होगा पिक्चर उतनी अच्छी आएगी। आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि क्यों समान मेगापिक्सल का कैमरा होते हुए भी फोन कैमरे की अपेक्षा डीएसएलआर कैमरा बड़ी तस्वीर बनाता है। क्योंकि इसमें बड़े सेंसर का उपयोग किया जाता है। डीएसएलआर कैमरे में सीसीडी का नाम आपने सुना होगा। एक बढ़िया कैमरा में थ्री सीसीडी इमेज सेंसर का उपयोग किया जाता है। आज कल स्मार्टफोन कैमरे में भी निर्माता सेंसर का जिक्र करते हैं। [इसे भी पढ़ें: जानें अपने फोन प्रोसेसर के बारे में सब कुछ]
3. लेंस
     लेंस को आप कैमरे की आंख के तौर पर देख सकते हैं। लेंस के बगैर कैमरे की कल्पना भी नहीं की जा सकती। फोन में लेंस की क्वालिटी जितनी अच्छी होगी वह उतना ही बेहतर तस्वीर लेने में सक्षम होगा। लेंस के फोकल लेंथ को एमएम द्वारा मापा जाता है। । 24 एमएम, 50 एमएम और 70 एमएम फोकल लेंथ इत्यादि। कैमरे के साथ उपयोग किए जाते हैं। मोबाइल फोन के लिए कार्लजीज और सोनी सहित कई कंपनियां हैं जो लेंस बनाने का कार्य करती हैं। [इसे भी पढ़ें: जानें क्या है कस्टम रोम और कैसे करें इंस्टॉल?
4. शटर स्पीड
     कैमरे में शटर स्पीड भी बहुत महत्वपूर्ण चीज है। शटर स्पीड को प्रती सेकेंड के आधर पर मापा जाता है। शटर स्पीड का आशय उस समय से होता है जितने में लाइट कैमरे के अंदर इमेज सेंसर तक पहुंच सके। शटर स्पीड को आॅटो और मनुअल आधार पर सेट किया जाता है। तेज रोशनी में शटर स्पीड तेज होगा जबकि कम रोशनी में धीमा।
     तस्वीर लेने के लिए जब आप किसी सबजेक्ट पर कैमरे को केंद्रीत कर उसे साफ व स्पष्ट करते हैं उसे फोकस कहा जाता है। कैमरे में साधारण आॅटोफोकस, फिक्सड फोकस और मैनुअल फोकस फीचर होता है। आटोफोकस के दौरान आप स्क्रीन पर जहां टच करते हैं कैमरा उस विषय वस्तु को साफ कर पीछे के चीजों को ब्लर कर देती है जिससे तस्वीर में आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। वहीं फिक्सड फोकस में स्क्रीन पर दिखने वाला सभी चीज फोकस होता है आप किसी एक को ब्लर या फोकस नहीं कर सकते। फोटोग्राफी के सयम स्क्रीन पर हरे रंग का डब्बा बन जाता है और उस क्षेत्र को वह साफ कर देता है। यह आॅटोफोकस का कमाल है। टच स्क्रीन फोन में टच फोकस फीचर भी दिया गया है जहां स्क्रीन पर टच कर किसी विषय वस्तु की साफ व स्पष्ट तस्वीर ले सकते हैं।
6. स्टोरेज
    स्टोरेज मैमोरी क्षमता जहां आप पिक्सचर सुरक्षित रख सकते हैं जितनी ज्यादा मैमोरी होगी उतने अध्कि पिक्चर रख सकते हैं।
7. इमेज स्टेबलाइजेशन
     फोटोग्राफी के समय हाथ हिल जाने से पिक्चर स्पष्ट नहीं आता है ऐसे में इमेज स्टेबलाइजेशन साफ व स्पष्ट तस्वीर लेने में मदद करता है। इसमें सॉफ्टवेयर की मदद से इमेज को स्थिर किया जाता है।
8. आॅप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन
     नए स्मार्टफोन में शेक के दौरान बेहतर तस्वीर लेने के लिए आॅप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन का प्रयोग किया जाता है। आॅप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन में सेंसर लगा होता है जो हाथ या सब्लेक्ट हिलते की स्थिति में भी बेहतर तस्वीर लेने में सक्षम होता है। साधारण इमेज स्टेबलाइजेशन की अपेक्षा यह तकनीक ज्यादा बेहतर है।
9. जूम
     जूम का उपयोग दूर की तस्वीर लेने के लिए की जाती है। कैमरे में डिजिटल जूम और आॅप्टिकल जूम का फीचर होता है। डिजिडल जूम की अपेक्षा आॅप्टिकल जूम ज्यादा बेहतर होता है जहां फोटोग्राफ की गुणवत्ता बरकरार होती है जबकि डिजिटल जूम में गुणवत्ता पर असर होता है। दूर की चीजों को पास करने के लिए जूम इन करते हैं और पास की चीजों को दूर करने के लिए जूम आउट।
10. रेड आई करेक्शन और रेड आई रिडक्शन
    फोटोग्राफी के दौरान फ्लैश रोशनी में अक्सर आंखें लाल हो जाती हैं। ऐसे में रेडआई करेक्शन और रेड आई रिडक्शन फीचर के माध्यम से उसे ठीक कर सकते हैं।
11. व्हाइट बैलेंस
     अलग-अलग स्थान पर रोशनी में भी भिन्नता होती है। ऐसे में व्हाइट बैलेंस के माध्यम से आप रोशनी को समायोजित कर सकते हैं। आॅटो, टंगस्टन, सन्नी क्लाउडी इत्यादि व्हाइड बैलेंस के ही विकल्प हैं।
12. आईएसओ
    आईएसओ सेंसर की सेसेटिविटी को बढ़ा देता है। इसके माध्यम से कैमरा कम रोशनी में भी बेहतर तस्वीर लेने में सक्षम हो जाता है। आईएसओ का उपयोग साधरणत: रात में किया जाता है। हाईसेंसिटिविटी पर जब कैमरा तस्वीर लेता है तो पिक्चर पर थोड़े डॉट दिखाई देते हैं।
13. जियो टैगिंग
     इस फीचर में आप वीडियो और फोटोग्राफ की सहायता से अपनी भगौलिक स्थिति की जानकारी दे सकते हैं कि फिलहाल आप किस स्थान पर हैं और कहां की तस्वीर है।
14. पैनरोमा
     कैमरे में इस फीचर के माध्यम से आप 3डी तस्वीरे ले सकते हैं। इसके दौरान एक निश्चित समय में आपको कैमरे को घुमाना होता है। बाद में कैमरा उस तस्वीर को मिलाकर आपके सामने पेश करता है। आप चाहें तो इसे प्ले कर भी देख कसते हैं। हां, यह ध्यान रहे कि पैनरोमा शाॅर्ट में समय बड़ा महत्वपूर्ण है।
15. फेस व स्माइल डिटेक्शन
    इस फीचर को आॅन करते ही कैमरा फोटोग्राफी के समय स्वतः ही चेहरे पर फोकस कर उसे साफ व स्पष्ट कर देगी। वहीं स्माइल डिटेक्शन में हस्ते हुए चेहरे पर फोकस होगा।


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