काली कमाई से धनकुबेर यादव सिंह पर सीबीआई का शिकंजा बढा

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डासना जेल में दो घंटे पूछताछ, कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी
    नई दिल्ली।। काली कमाई से धनकुबेर बने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह पर केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई का शिकंजा बढ़ता ही जा रहा है। मंङ्गलवार को सीबीआई की एक टीम ने डासना जेल में बंद यादव सिंह से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों की माने तो पूछताछ में नोएडा के चर्चित टेंडर घोटाले में सीबीआई को कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं।
    पिछले दिनों कोर्ट में सीबीआई ने अर्जी देकर पूछताछ करने की मांग की थी। अर्जी पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी से अनुमति मिलने के बाद यादव सिंह से मंगलवार को जेल में करीब दो घंटों तक पूछताछ की गई। पूछताछ में नोएडा के चर्चित टेंडर घोटाले में सीबीआई को कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं।
    सूत्रों की मानें तो सीबीआई इस मामले में जल्द ही नई चार्जशीट कोर्ट में पेश करने जा रही है। यादव सिंह से पूछताछ के बाद उनके कुछ अन्य करीबियों पर भी शिकंजा कसे जाने की संभावना है। बता दें कि नोएडा में नियम विपरीत चहेती फर्मों से अंडरग्राउंड केबल डालने का काम कराया गया। इसमें करोड़ों रुपये का बंटाधार किया गया था। यह मामला गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट में विचाराधीन है।
    गौरतलब है कि 27-28 नवम्बर 2014 को यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता और उसत्त सहयोगियों की कम्पनियों पर पड़े आयकर विभाग के छापों के बाद भ्रष्टाचार का यह मामला सुर्खियों में आया था। आयकर छापों के बाद यादव सिंह, उनके रिश्तेदारों व सहयोगियों की कई फर्जी कम्पनियों व हजारों करोड़ की बेनामी सम्पत्तियों का पता चला था। इसके बाद से मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की जा रही थी। आयकर विभाग की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि यादव सिंह ने 2002 से 2014 तक अपने कार्यकाल में मनमाने तरीके से अपने लोगों को 8 हजार करोड़ के ठेके दिए और करोड़ों की संपत्तियां एकत्र कीं। यादव सिंह पर गलत तरीके से प्रमोशन पाकर जूनियर इंजीनियर से तीनों प्राधिकरणों के चीफ इंजीनियर पद तक पहुंचने और भ्रष्टाचार, प्लॉट आवंटन व फर्जी कंपनियां खड़ी कर हजारों करोड़ की संपत्तियां जुटाने के आरोप लगे थे।
     समाजसेवी नूतन ठाकुर ने यादव सिंह मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 जुलाई 2015 को हाईकोर्ट ने यादव सिंह और उसके करीबियों के खिलाफ सीबीआई जांच करने के आदेश दिए। इसके साथ ही प्राधिकरण द्वारा 2002 से 2014 तक जारी किए सभी ठेकों की भी जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 4 अगस्त 2015 को सीबीआई ने दो एफआईआर दर्ज कीं। एक में सिर्फ यादव सिंह को नामजद किया गया है, जबकि दूसरी एफआईआर में यादव सिंह के साथ उसकी पत्नी कुसुमलता, बेटे सनी सिंह, बेटी गरिमा भूषण तथा बिजनेस पार्टनर राजेंद्र मनोचा को भी नामजद किया गया है।

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