चुनाव आयोग ने पाया कि उन्होंने साल 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज पर खर्च की गई रकम को अपने चुनावी खर्च में नहीं दर्शाया था. कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की 2009 में की गई शिकायत पर यह फैसला आया. उन्होंने नरोत्तम मिश्रा पर 2008 के चुनावों के दौरान करप्ट प्रैक्टिस और पेड न्यूज का आरोप लगाया था. चुनाव आयोग ने जनवरी 2013 में नोटिस जारी कर नरोत्तम मिश्रा से जवाब मांगा था.
उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली थी. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिल पाई. पिछले साल नरोत्तम से दिल्ली में चुनाव आयोग ने सवाल किए थे. गौरतलब है कि फिलहाल उनके पास जल संसाधन, जनसंपर्क और संसदीय कार्य मंत्रालय का जिम्मा है. वह दतिया से जीतकर आते हैं. शिवराज सिंह संकट मोचक माने जाने वाले राज्य के पीडब्ल्यूडी और जनसम्पर्क मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा चुनाव को निर्वाचन आयोग द्वारा शून्य घोषित करने की पहली खबर भाजपा सांसद और कभी उमा भारती के ख़ास माने जाने वाले प्रहलाद पटेल ने सोशल मीडिया पर की थी। उन्होंने डॉ मिश्रा का नाम तो नहीं लिखा था लेकिन उन्होंने इसके लिए हमारे एक मंत्री शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने इससे आगे जो लिखा वह चौकाने वाला और भाजपा की अंदरूनी सियासत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर ये लिखा –
उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर ये लिखा –
आज निर्वाचन आयोग ने हमारे एक मंत्री के विरूद्ध फैसला सुनाया है जिसका मै व्यक्तिगत रूप मे सम्मान करता हूँ ।मै चुनाव खर्च घटाने का समर्थक हूँ। निर्वाचन से जुड़े फैसले समयसीमा के भीतर ही हो ताकि कोई साधन एवं पद के दुरूपयोग करने का दुस्साहस न कर सके।
