क्या भाजपा में फिर से किसी व्यक्ति विशेष को मुख्यमंत्री बनाने की अभी से साजिश हो रही है

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क्या भाजपा में फिर से किसी व्यक्ति विशेष को मुख्यमंत्री बनाने की अभी से साजिश हो रही है

मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा के लिए इतने उतावले क्यो ? थोडा काम करके भी दिखाये
देशभक्त पार्टी में हर कोई मुख्यमंत्री बनाना चाहता है 
   राजस्थान भाजपा दो साल से सत्ता से बाहर है। इन दो सालो मे भाजपा संगठन की तरफ से इसके कार्यकर्ताओ ने पहले स्वर्गीय मदनलालजी सैनी और फिर वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व मे अपना सर्वोतम काम किया है। जहाँ जरुरत थी वहीं गहलोत सरकार को घेरा है। सतीश पूनिया के अध्यक्ष बनते ही भयावह कोरोनो काल आया। इस विभित्सव समय मे भी भाजपा संगठन के हजारो कार्यकर्ताओ ने पूनिया के नेतृत्व मे अपनी जान हथेली पर रखकर लाखो भोजन के पैकेट घी तेल आटा गरिब लोगो मे बांटकर अपनी जोरदार उपस्थती दर्ज करायी है। देश के प्रधानमंत्री ने इस काम के लिए प्रदेश संगठन की तारिफ करी है।
    पिछले दिनो निकाय पंचायत चुनावो मे इसी संगठन ने पूनिया के नेतृत्व मे 125 विधायको के समर्थन से खडी गहलोत सरकार की हवा निकाल दी। चुंकि सरकारी मशीनरी सरकार के हाथो मे थी इसलिए इन्होने जोड-तोड करके संख्या जरुर बढाली मगर मत प्रतिशत मे ये भाजपा को लीड नही कर सके।
    यानी की भाजपा प्रदेश संगठन निरंतर अपने लक्ष्यो की तरफ चलता रहा है। लेकिन जो लोग आज राजस्थान मे मुख्यमंत्री के चेहरे का सवाल उठा रहे है वो लोग पिछले दो सालो से कहां थे? कोरोना काल मे वो घरो से जनता की सेवा मे बाहर क्यो नही निकले। पंचायत निकाय चुनावो मे क्यो भाजपा उम्मीदवारो की हारने की बांट जोहते रहे। हालांकि उनके मंसुबे पुरे नही हो सके। राजस्थान के अधिकतर शहरो मे भाजपा ने सतीश पूनिया के नेतृत्व मे बढत बना कर अपने मेयर जिला प्रमुख प्रधान ज्यादा से ज्यादा बना कर सतारुढ दल का दंभ निकाल दिया है।
    जब प्रदेश मे गहलोत सरकार द्वारा केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की राजनीतिक हत्या की साजिस रची जा रही थी तब ये लोग उसका विरोध करने की बजाय चुपचाप बैठकर क्यो तमाशा देख रहे थे? कांग्रेस सरकार के पायलेट प्रकरण मे जब सतीश पूनिया समेत भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेताओ गुलाब चंद कटारिया, गजेन्द्र सिंह शेखावत, राजेन्द्र सिंह राठोड पर खरीद फरोख्त के आरोप लगा कर मुकदमे दर्ज किये जा रहे थे तब ये लोग चूपचाप क्यो बैठ हुये थे? कांग्रेस द्वारा भढकाये गये किसान आंदोलन को ठंडा करवाने हेतु ये लोग अब तक घरो से निकल कर गांवो मे किसानो की चौपालो तक क्यो नहीं पहुँचे? विधानसभा की बैठको मे राजेन्द्र सिह राठोड, नेता प्रतिपक्ष गुलाबजी कटारिया, सतीश पूनिया और अन्य भाजपा विधायको की तरह उनके नेता सदन की कार्यवाहियो मे भाग लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने का काम क्यो नही करते है? क्या संगठन की बजाय ये व्यक्तिवादी की राजनीति मे ही अधिक विश्वास करते है। पिछले दो सालो मे भाजपा संगठन द्वारा आयोजित अनेक धरने प्रदर्शनो से ये लोग क्यो नदारद रहे है? क्या संगठनात्मक कामो के प्रति इन लोगो का कोई फर्ज नही बनता है?
    आप सभी भाजपा के ऐसे हजारो उन कार्यकर्ताओ को जानता होंगे जिनकी पुरी जिंदगी इस संगठन की सेवा मे निकल गयी, चाहे उनमे से कोई मुख्यमंत्री या प्रदेशाध्यक्ष रहा हो या नहीं उनको कुछ न मिलने पर भी उन्होने न तो पार्टी छोडी और न ही उन्होने पार्टी छोडने की कभी धमकी दी। जो लोग आज किसी व्यक्ति विशेष को मुख्यमंत्री बनवाने की घोषणा करवाने के लिए लामबंद हो रहे है वो पहले इन कार्यकर्ताओ से तो कुछ सीख कर सक्रिय होकर संगठन मे काम करके तो दिखाये। क्या उनको नही लगता जैसे संगठन मे चेहरे बदलते है वैसे ही सत्ता मे भी चेहरे बदलते रहने चाहीये। क्या पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओ को आगे बढने का मोका नही मिलना चाहिये? 
   फिलहाल भाजपा के इन मुट्ठीभर लोगो द्धारा संगठन की बजाय किसी व्यक्ती विशेष के पक्ष मे लामबंद होना जनता मे गलत संदेश दे रहा है। भाजपा मे व्यक्ति विशेष की पूजा कभी नही होती है। इस मामले मे कई बडे राजनेताओ की गलतफहमी दूर हो चूकि है वो बगावत के बाद घूम फिर कर फिर से भाजपा मे ही आ गये है।
     राजस्थान मे अभी मुख्यमंत्री की सीट के लिए ललचाने की बजाय कांग्रेस सरकार से जुंझने का समय है।गहलोत की पारी के बाद भाजपा की पारी आने मे अभी लंबा सफर तय करना होगा। सब कुछ नरेन्द्र मोदी पर ही न छोडे की इस बार भी उनके नाम से पार्टी को जीत मिल जायेगी कुछ सक्रिय रचनात्मक कामो द्वारा भी संगठन को मजबूत करवाना चाहिये अभी सरकार बनाने के लिए बहुत मेहनत करने की जरुरत है। उनको इस गलतफहमी से बचना चाहिये की उनके चहेते नेता के नाम से ही पार्टी को वोट मिलते है अगर ऐसा होता तो राजस्थान मे पार्टी हारती ही क्यो? भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व सही समय पर जिसे चाहेगा मुख्यमंत्री का प्रत्याक्षी या पार्टी के सत्ता मे आने के बाद सबकी राय से मुख्यमंत्री बना देगा वो अभी से अपनी ऊर्जा का कांग्रेस की बजाय भाजपा के विरुद् ही इस्तेमाल कर अपनी ही पार्टी को क्यो नुकसान पहुंचा रहे है सही समय तक थोडा इंतजार तो करले?


(Omendra singh raghav)

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