देवी ने तथास्तु बोल कर दिया था वरदान, चुनरी वाली माताजी के नाम से हुए प्रसिद्ध

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देवी ने तथास्तु बोल कर दिया था वरदान, चुनरी वाली माताजी के नाम से हुए प्रसिद्ध

सीसीटीवी में की गई जाँच 
   "प्रह्लाद जानी" वो इंसान जिसने 76 सालो से जीवन मे कुछ नही खाया और न ही कुछ पिया, फिर भी ताउम्र जीवित रहा। डॉक्टर इन पर शोध कर करके थक गए मगर कुछ न मिला। भारतीय सेना के डॉक्टर्स की टीम ने इन्हें 15 दिन तक एक ऐसे कमरे में बंद रखा जहां कुछ भी नही था, सिवाय बिस्तर के। 
   इनके कमरे में cctv लगाए गए। 15 दिन बाद इन्हें चेक किया तो सब कुछ नार्मल था, डॉक्टर भी हैरान थे। फिर देश विदेश के डॉक्टर्स की टीम ने इन पर अलग-अलग शोध किये मगर उन्हें कोई रिजल्ट न मिला कि कैसे कोई इंसान इतने सालों से बिना खाये पिये जीवित है।
 देवी ने तथास्तु बोलते हुये वरदान दिया
    प्रह्लाद जानी, गुजरात काठियावाड़ जिले में रहते थे और कल इन्होंने प्राण त्याग दिए। इनके अनुसार मात्र 9 वर्ष की आयु में भगवान श्रीनाथ (कृष्ण) की ये पूजा करते थे और एक दिन अचानक भगवती महामाया (काली) प्रगट हुई और इन्हें वरदान मांगने को कहा, इन्होंने मांगा की इन्हें कभी भूंख प्यास न लगे ! देवी ने तथास्तु बोलते हुये वरदान दिया। 
    तब से ये बिना अन्न जल के रहने लगे, इनकी तालु से अमृत गिरता था। इनका न बड़ा आश्रम, न ही अरबो की दौलत! मगर प्रह्लाद जानी ने विज्ञान की जड़े हिला दी थी। अच्छे-अच्छे नास्तिक न चाहते हुए भी स्वीकार करने को मजबूर थे। 
चुनरी वाली माताजी के नाम से हुए प्रसिद्ध 
    संत प्रह्लाद जानी - चुनरी वाली माताजी का गुजरात मे 26 मई को निधन हो गया। आप 90 साल के थे। आपके बारे में कहा जाता था कि आपने पिछले 76 साल से अन्न जल ग्रहण नही किया है। आप सिर्फ श्वास के सहारे जीवित हैं। 
    DRDO मतलब Defence Research & Development Organisation की एक अनुषांगिक संस्था DIPAS यानि कि Defence Institute of Physiology and Allied Sciences ने दो बार संत प्रह्लाद जानी के इस दावे की जाँच की कि उन्होंने पिछले 76 साल से अन्न जल ग्रहण नही किया। उनके ऊपर बड़ी वृहद Scientific Research हुई है। पहली बार 2003 मे और दोबारा 2010 में। 
शीशे के चेंबर में 15 दिन तक की गई निगरानी 
    सन 2010 में DIPAS , DRDO, AIIMS जैसे संस्थानों के Doctors, Scientists और Researchers ने अहमदाबाद के Sterling हॉस्पिटल के एक शीशे के Chamber नुमा रूम में पूरे 15 दिन तक उनकी निगरानी की। 
    कुल 40 Doctors की टीम और 24 घंटे CC TV कैमरा की निगरानी में उन्हें देखते जांचते रहे। पल पल उनका Temperature, BP, Heart Beat, Blood Sugar, Lipid Profile, CBC, Kidney एवं liver function जैसे तमाम tests होते रहे। 
      इस बीच उनके शौचालय जाने, मल मूत्र विसर्जन की भी निगरानी और Tests हुए। वैज्ञानिकों ने पाया कि उन पंद्रह दिनों में संतजी ने एक बूंद भी जल या कोई अन्न नही लिया। 24 घंटे में औसतन 100 ml पेशाब उनको होता
था। मल त्याग नही किया, एक बार भी। 
वैज्ञानिकों ने दिया चौकाने वाला निष्कर्ष 
     तमाम research के बाद वैज्ञानिकों ने यही निष्कर्ष निकाला कि संत जी एक अज्ञात रहस्यमयी प्राण शक्ति से ही ऊर्जा ग्रहण करते हैं। DIPAS और DRDO जैसी संस्थाएं सेना के लिए ऐसी research करती हैं जिनसे विकट परिस्थितियों में मरुस्थल या बर्फीली चोटियों पे सैनिक बिना कुछ खाये पिये भी न सिर्फ Survive कर सकें बल्कि लड़ सकें।
    इसी क्रम में DRDO Energy Drinks, Energy foods पर रिसर्च करती हैं जिससे जेब मे रखी एक चॉकलेट मात्र से हफ्ते भर की ऊर्जा मिल सके, तो DIPAS जैसी संस्था ने भी संत प्रह्लाद जानी के इस दावे को सत्य माना कि उन्होंने लंबे समय तक अन्न जल ग्रहण नही किया। 
     ऐसे में हमारे ग्रंथों में समाधि की जिस अवस्था का ज़िक्र आता है जिसमे योगी सिर्फ योग प्राणायाम और प्राण वायु के सहारे ही वर्षों समाधि में बिता देते थे। वैसे ही योगी थे संत प्रह्लाद जानी। 26 मई 2020 सुबह आपका निधन हो गया, आपको भावपूर्ण श्रद्धांजलि.. शत-शत नमन्।

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