एक बार फिर उठी भील प्रदेश की मांग, मानगढ़ को बनाया जाएगा भील प्रदेश की राजधानी

Breaking News

10/recent/ticker-posts

Ad Code

एक बार फिर उठी भील प्रदेश की मांग, मानगढ़ को बनाया जाएगा भील प्रदेश की राजधानी

Mahesh Bhai Vasava
  बांसवाड़ा/राजस्थान।। राजस्थान के मानगढ़ धाम पर बीटीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने आज वहा पहुंच कर गोविंद गुरु की धोणी पर आदिवासी संस्कृति के अनुसार प्रकृति पूजन कर गोविंद गुरु का पाठ करते हुए दीप प्रज्वलित किया। जानकारी अनुसार वसावा ने गोविंद गुरु की आरती उतारी इसके बाद आदिवासी संस्कृति एवं गोविंद गुरु का नेजा उनकी धोणी पर चढ़ाया। 
  प्रतक्षदर्शियों ने बताया की बीटीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश भाई वसावा आदिवासी संस्कृति के उद्धारक गोविंद गुरु के भजनों के माध्यम से आदिवासी समाज के भक्त के साथ में जिन्हे क्षेत्रीय भाषा में कोतवाल कहा जाता है के साथ अन्य संतो ने भक्ति आंदोलन से राजनीतिक आंदोलन की आगाज करते हुए सभा स्थल तक पहुंचे जहां उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।  
वसावा ने संघ और भाजपा पर साधा निशाना
   आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने कहा कि यह आदिवासियों का स्थान है, इसमें आदिवासी समाज का ही अधिकार है। वसावा ने संघ और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया की यहां पर कुछ दिन पूर्व भगवा ध्वज फहराया गया था जो संघ और भाजपा की आदिवासियों में राजनैतिक पेठ बनाने की साज़िश है उसका आदिवासी समाज पुरजोर तरीके से विरोध करता है। 
चार राज्यों का केंद्र स्थल है मानगढ़
   वसावा ने कहा की यहां पर आदिवासी संस्कृति की ध्वजा चढ़ती है और यह एक शहीद स्मारक है। इसको धार्मिक स्थान नहीं बनाया जाना चाहिए। इसकी सुरक्षा करना आदिवासी समाज का संवैधानिक अधिकार बनता है। उन्होंने मानगढ़ को लेकर कहा कि यह चार राज्यों का केंद्र स्थल है जिनमे राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र आते है इसलिए यहाँ के भीलों का यह स्थान भील प्रदेश की मांग करता है। वसावा ने कहा की भील प्रदेश की राजधानी मानगढ़ को बनाया जाएगा। 
मानगढ़ को बनाया जाएगा भील प्रदेश की राजधानी
    वसावा ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा की आज उनका मानगढ़ पर सभा करने का औचित्य यह है की संघ और बीजेपी का राजनैतिक षड्यंत्र चलते उन्होंने आदिवासियों की आस्था के स्थलों भगवा ध्वज फहराया गया था जो की नहीं होना चाहिए, अतः आज सभा उसी के विरोध में रखी गई है। आदिवासी समाज ने यही से अपनी लड़ाई पूर्व में भी प्रारम्भ की थी और वर्तमान में भी यही से प्रारंभ करता है। 
जान देनी पड़े तो दे देंगे पर पीछे नहीं हटेंगे
  वसावा ने अपने सम्बोधन में कहा की संवैधानिक अधिकारों में पांचवी, छठवीं अनुसूची, पेसा एक्ट, तथा आदिवासियों के मौलिक अधिकार प्राप्त करने का आगाज क़ानूनी रूप से किया गया है और हमारी लड़ाई इस मुल्क में दलित, आदिवासी, पिछड़े, माइनॉरिटी, और दबे कुचले लोगों को उनके अधिकार दिलाने की है, जिसके लिए हमें जान देनी पड़े तो दे देंगे पर पीछे नहीं हटेंगे। 
सभा में यह रहे उपस्थित 
   इस अवसर पर बीटीपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंबालाल जाधव, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विजय भाई मईडा, डॉक्टर वेलाराम घोघरा, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र कटारा आदि ने अपने विचार रखे तथा कार्यक्रम में बसंत गरासिया, बीएल छानवाल, मोहन डिंडोर, प्रवीण परमार, रणछोड़, पवन, देवचंद मूवी, डॉक्टर एल सी मईडा, धीरज मल निनामा, हक्करचंद, मानसिंह डामोर, बापुलाल आदि कार्यकर्ता एवं सामाजिक जनप्रतिनिधि उपस्थित हुए।

Ad Code