कश्मीर समस्या पर अमेरिका हमेशा पाकिस्तान का ही पक्ष क्यों लेता है?

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कश्मीर समस्या पर अमेरिका हमेशा पाकिस्तान का ही पक्ष क्यों लेता है?

कश्मीर समस्या पर अमेरिका हमेशा पाकिस्तान का ही पक्ष क्यों लेता है?
    दोस्तो पाकिस्तान की साजिश है कि 1971 में भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश अलग करवा दिया तो अब वो भारत को जम्मु और कश्मीर अलग करवाना चाहता है। इसीलिए 1971 के बाद पाकिस्तान में जितने भी शासक हुए उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और आज आतंकवाद यहाँ इतना बढ़ चूका है की अब तक हमारे 1 लाख से ज्यादा जवान उसमे शहीद भी हो चुके है। 
भारत के कानून कश्मीर पर लागु क्यों नहीं?
  बता दे की जम्मु कश्मीर हमारे देश में रहे इसके लिए हमारे देश में संविधान बदल गया है। जी हां संविधान में एक Article 370 दाखिल किया गया। उसके तहत जम्मु कश्मीर को एक देश का दर्जा दिया गया है। भारत का सुप्रीम कोर्ट कोई भी फैसला सुनाये जम्मु कश्मीर में वो लागु नहीं होता। भारत की संसद जो भी कानून बनाये जम्मु कश्मीर में वो लागु नहीं होता। हमारी संसद जो कानून बनाती हे, उस कानून का जब आप पहला पन्ना पढेंगे तो उसमे पहले ही वाक्य में कहा जाता हे Except Jammu and Kashmir. मतलब ये कानून बनाया जा रहा है जम्मु कश्मीर को छोड़कर। हमारी सरकार ने आज़ादी के 64 साल बाद ऐसे कई कानून बनाये है, जो आप पर लागु है, हम पर लागु है, सारे देश पर लागु है लेकिन जम्मु कश्मीर के ऊपर लागु नहीं है। उनके कानून उनकी संसद में जिनको वो Assembly कहते हे वहाँ बनते है। भारत की संसद मे नहीं बनते। 
खर्चो का हिसाब जम्मू कश्मीर की सरकार के पास
   आपको शायद मालूम नहीं होगा की आज़ादी के कई सालो बाद तक जम्मु कश्मीर के मुख्यमंत्री को "सदरे रियासत" कहा जाता था जिसको हिंदी में प्रधानमंत्री कहते है। उनका झंडा अलग है भारत का झंडा अलग है। उनका कानून अलग है, भारत का कानून अलग है। उनका संविधान अलग है भारत का संविधान अलग है। फिर हमारी सरकार कहती है की, “Jammu and Kashmir is the INTEGRAL PART OF INDIA (जम्मु कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है)” यह भारत सरकार हमें मुर्ख बनाने के लिए कह रही है ताकि की हम जम्मु कश्मीर को भारत मे विलय के लिए बगावत ना करे। आपको सुनकर हैरानी होगी की भारत सरकार आपके लिए कोई भी खर्चा करे उसकी पाई पाई का हिसाब CAG (Controller Auditor General of India) रखता है, लेकिन जम्मू कश्मीर के लोगो के ऊपर हजारों साल से करोडो रुपये खर्च होता है उसका हिसाब किसी के पास नहीं है। क्योकि जम्मू कश्मीर का हिसाब दिल्ली में नहीं रखा जाता उनका हिसाब जम्मू कश्मीर की सरकार के पास रखा जाता है। 
Rajiv Dixit on Kashimir
कितना पैसा कहाँ खर्च किया उसका हिसाब ही नहीं 
    CAG (Controller Auditor General of India) को जब पूछा गया कि जम्मू कश्मीर कि सरकार ने आजतक कितना पैसा कहाँ खर्च किया है इसका हिसाब दो? तो जवाब आया हमारे पास नहीं है कश्मीर की सरकार को पूछो और जब कश्मीर की सरकार को चिठी लिखी गई। तब वहाँ से जवाब आया कि हम किसी भारतवासी को अपना हिसाब बताने के लिए मजबूर नहीं है, वो मानते ही नहीं की हम भारत का अंग है। हम जबरजस्ती कहते है की यह भारत का अंग है। यह बात सभी जानते है कि पाकिस्तान वहाँ जबरदस्ती आतंकवादी भेजता रहता है, उनके लिए पैसे उपलब्ध कराता रहता है। आपको क्या लगता है पाकिस्तान (जो खुद भुखमरी के कगार पर खड़ा है) जिसका 95% बजट विदेशी कर्जे पर बनता है, जो सुई भी खुद नहीं बना सकता उसमे में उतनी ताकत है की वो 60 सालो तक आतंकवादीओ को पैसा भेज सके? 
क्या पाकिस्तान को ये सब करने के लिए अमरीका उकसाता है?
  आपको शायद पता होगा की पाकिस्तान में इतना दम नहीं है लेकिन पाकिस्तान को ये सब करने के लिए अमरीका उकसाता रहता है और हर साल उसको सहायता के नाम पर करोडो रूपये उपलब्ध कराता रहता है और पाकिस्तान वो पैसा जम्मू कश्मीर में भेजता है और आखिर वो पैसा लश्करे तैयबा, जैश ए मोहमद, हिजबुल मुजाहिद्दीन जेसे खतरनाक आतंकवादी संगठनो को पैसा मिलता है और वो पैसे से वो सारे देश में बम ब्लास्ट करते है।  
     हमारी आर्मी की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर में जो भी सभी आतंकवादी गतिविधि करते है वो सब विदेशो से घुसाए गए है। पाकिस्तान से और अफघानिस्तान से रोज आ रहे हैं, और पैसो की लिए यह सब करते है। हमारी सरकार भी कैसी विचित्र है, जम्मु कश्मीर में एक संगठन है उसका नाम है हुर्रियत कोन्फेरेंस यह छोटी-छोटी पार्टियो का एक बड़ा समूह है। इस हुर्रियत कोन्फेरेंस में एक आदमी है उसका नाम है यासीन मलिक आपने शायद टीवी पर देखा हो उस यासीन मलिक को जानबूझ कर भारत सरकार ने सुपर हीरो बनाकर रखा है क्यों? भारत सरकार जब भी बातचीत करती है। यासीन मालिक से ही करती है। इन चक्करों में अखबारों में नाम आता है, टीवी की चर्चा में नाम आता है और वो चर्चा में चढ़ता ही चला जाता है वो चर्चा फिर अमेरीका तक जाती है और बाद में अमरीका की सब N.G.O. से सीधा पैसा उसको आना शरू हो जाता है। आप पूछेंगे की इसमें अमरीका को क्या Interest है? असल में भारत का जो जम्मु कश्मीर है वो अमरीका को चाहिए। पाकिस्तान के लिए तो ये कुछ इतने काम का नहीं है। पाकिस्तान खुद अपने देश को संभाल नहीं पा रहा है, जो हमारा छीना हुआ कश्मीर उसके पास है, वही उससे संभाला नहीं जा रहा। जम्मु और कश्मीर को क्या संभालेगा? अमरीका को इसलिए चाहिए क्योकि जम्मु कश्मीर की सीमा चीन से लगी हुई है। अमेंरीका और चीन की पुरानी दुश्मनी है, तो अमेंरीका की योजना है की एक दिन चीन पर हमला करना है जैसा इराक पर किया तो हमला करने के लिए अमरीका के जहाजों को एक ऐसा ग्राउंड चाहिए जहाँ से हवाई जहाज उड़े और चीन पर जाकर मिसाइल डाले और वो स्थान जम्मु में मौजूद है।  
Rajiv Dixit on Kashimir
अमेरिका को कश्मीर पर कब्जा कर वहाँ सैनिक अड्डा बनाना है? 
 कुछ साल पहले अमेरिका कि विदेश मंत्री हेलेरी कलिंटन भारत आई और हमारे यहाँ एक tv चैनल जिसका नाम आजतक है के प्रभु चावला ने उसका interview लिया और interview मे एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब गलती से हेलेरी कलिंटन ने सच बता दिया (कई बार ऐसा हो जाता मुह से कोई छुपाने वाली बात सच निकल ही जाती है) प्रभु चावला ने पूछा था कि अमेरिका ने पिछले 50 साल मे united nation मे कश्मीर मुद्दे पर भारत का हमेशा विरोध किया है, और पाकिस्तान का साथ दिया है क्यूँ? (आप जानते है 1952 -53 से जम्मू कश्मीर का मुद्दा नेहरू कि मूर्खता के कारण united nation मे है। वरना युद्ध मे तो भारतीय सेनिकों ने बुरी तरह से रौंद दिया था पाकिस्तान को और दो दिन अगर और मिलते तो लाहोर भी भारत मे आ जाता। तब नेहरू को internationalism याद आ गया और वह बिना मतलब के मुद्दा united nation मे ले गया और तब से अमेरिका उसको दबा कर बैठा है और हमेशा भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देता गया) तो प्रभु चावला ने पूछा एक तरफ आप कहते है भारत से रिश्ते अच्छे बनाने है और आपने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है! आखिर आप चाहते क्या है? तो हेलेरी कलिंटन ने गलती से बोल दिया कि हमारी अमेरिका की संसद मे प्रस्ताव पारित हुआ है, कि जम्मू कश्मीर पर हमे सैनिक अड्डा बनाना है, तो उससे पूछा प्रस्ताव कब पारित हुआ था? तो उसने कहा 1989 मे! तो उससे पूछा प्रस्ताव नम्बर? तब एक दम हलेरी क्लिंटन को लगा कि जल्दबाज़ी में कुछ गलत बोल दिया है! तो उसने बात को घूमा दिया और कहा मुझे ज्यादा नहीं मालूम! बस ऐसा है वैसा है! 
  दूसरी और जब राजीव दीक्षित ने वो interview सुना तो उन्होने बिना देरी किए हुये अमेरिका मे अपने कुछ दोस्तो को फोन लगाया और कहा पता करो 1989 मे अमेरिका कि संसद मे ऐसा कौन सा प्रस्ताव पारित हुआ? जिसमें कहा गया अमेरिका को जम्मू कश्मीर चाहिये, वहाँ सैनिक अड्डा बनाने के लिए? तो पता चला प्रस्ताव का नंबर है, 657 और 1989 को अमरीकी संसद मे पास हुआ और उसमे कहा गया है, कि एक न एक दिन तो अमेरिका को जम्मू कश्मीर पर कब्जा कर सैनिक अड्डा बनाना ही है। क्यूँ? कारण एक ही है। जम्मू कश्मीर ही एक ऐसा area है, जहां अमेरिका सैनिक अड्डा बना कर चीन, भारत और पाकिस्तान तीनों पर नजर रख सकता है और भविष्य मे कभी चीन हमला करना पड़े तो उससे बढ़िया कोई स्थान नहीं जहा से जवाबी कार्रवाई की जा सके।  इसलिए अमरीका को ये चाहिए, तो अमरीका बंदूक चला रहा है पाकिस्तान के कंधे पर रख के और ये बंदूक है की जम्मु कश्मीर भारत से अलग हो जाये। अपना खुद देश बना ले (जेसे बांग्लादेश बना) अमरीका पाकिस्तान को सहायता देकर अपने प्रभाव में ले लेगा और वहा सैनिक अड्डा बनाएगा और वो सैनिक अड्डा एक दिन चीन के खिलाफ काम आयेगा। ये राजनीती चल रही है भारत को बर्बाद करने के लिए, ये राजनीती चल रही है भारत को बर्बाद करने के लिए! अब आप कहेंगे कि इसमें हम क्या कर सकते है? तो आपसे एक ही निवेदन है! आप कुछ साल के लिए जम्मू कश्मीर जाना छोड़ दो।  
Rajiv Dixit on Kashimir
    आप कहेगे सारी ज़िंदगी इसी के लिए तो पैसा इख्ठा करते है कि जम्मू कश्मीर घूमने जाएँगे और आप कह रहे है वहाँ जाना छोड़ दो? मित्रो आपको मालूम नहीं! जब आप वहाँ घूमने जाते है तो जितना tax भारत सरकार आपके ऊपर नहीं लगती उससे कई गुना ज्यादा tax जम्मू कश्मीर सरकार आपके ऊपर लगती है और वो सारा पैसा कुछ हाथो से घूमता हुआ आतंकवादियो के पास जाता है और सरकार मे आतंकवादियो के आदमी बैठे हुई है। वैष्णो देवी के मंदिर का सारा हिसाब किताब shrine bord संभालता है। हर साल लाखो हिन्दू करोड़ो रुपए वहाँ चढ़ाते है और आप वहाँ कि सरकार से एक पैसे का हिसाब नहीं मांग सकते कि उन्होने वह पैसा कहाँ खर्च किया, कितना खर्च किया? दोस्तो सेना जब युद्ध लड़ती है तो उसका मुख्य काम होता है, दुश्मन की supply line काटना और कश्मीर के आतंकवादियो कि supply line भारत सरकार के मिलने वाले पैसे के बाद हमारे हाथ से गुजर कर जाती है। सिर्फ 2 या 3 साल के लिए ही हम सब भारत के लोग कश्मीर घूमने जाना छोड़ दे तो 100% वहाँ सरकार कि आर्थिक कमड़ टूट जाएगी और जम्मू कश्मीर झकमार के हिंदुस्तान मे वापस आ जाएगा। इसके इलावा आजकल वहाँ एक और काम शुरू हुआ है, कश्मीर से कुछ लोग आपके शहर आते है शाले बेचने ले किए आपको मालूम नहीं है कि कौन उनमे से आतंकवादी है कौन सच्चा भारतीय? आप हाथ जोड़ कर उनको माना करे दे कि हम आपकी शाले तब तक नहीं खरीदेगे जब तक जम्मू कश्मीर घोषणा न कर दे कि वे भारत का अभिन्न अंग है। 

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