इलाज़ के नाम पर गोरखधंधा, नीम-हक़ीम झोलाछाप डॉक्टर क्यों है बिंदास?

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इलाज़ के नाम पर गोरखधंधा, नीम-हक़ीम झोलाछाप डॉक्टर क्यों है बिंदास?

 आख़िर कितने मासूम की जान लेगे तथाकथित नीम-हक़ीम झोलाछाप डॉक्टर?
बेमौत मारे गए दो बच्चे कांग्रेस सरकार और विपक्ष हो गया फैल
Fake Doctor
  बांसवाड़ा/राजस्थान।। आए दिन राजस्थान के जनजाति क्षेत्रों में कई बच्चे अवैध झोलाछापों के इलाज़ से बेमौत  मारे जा रहे है, लेकिन राजस्थान की हरामखोर कांग्रेस सरकार और विपक्ष का दावा ठोकने वाली पूरी तरह से लूली हो चुकी बीजेपी कभी आम जनता के हितों की रक्षा के लिए आगे नहीं आई, क्योंकि यह दोनों ही नीच राजनैतिक पार्टिया अपने निजी राजनैतिक सुख और सत्ता पाने पर कमीशन की चाशनी चाटने के लिए कुत्ते की तरह जुबान निकाल कर देश को लूटने में अपनी-अपनी बारी का इंतज़ार करती रहती है। जी हां दोस्त इस तरह देश की लूट और आम जनता का शोषण कोई नई बात नहीं है। लेकिन इन सबसे परे बीटीपी और आम आदमी पार्टी ने जरूर जनहित में विगत कुछ समय से अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करवाई है। 
   जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का ताज़ा मामला राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में देखने को मिला है जहा हाल ही के दिनों में जिले में गरीब जनजाति वर्ग के कई बच्चे इलाज़ के अभाव में झोलाछाप डाक्टरों के चुंगल में फंस कर अपने मासूम बच्चो को अपनी आंखों के सामने बेमौत मरता देख चुके है। लेकिन कांग्रेस की लम्पट लुटेरी सरकार अब भी जागने को तैयार नहीं है। बता दे की राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में इन दिनों तथाकथित नीम हाकिम, बंगाली झोलाछाप डॉक्टर पुरे ज़िले में एक असाध्य संक्रमण की तरह अपने पैर जमा कर दीमक की तरह फेले हुए है जो बिना किसी वैध डिग्री के ईलाज करने से बाज नहीं आ रहें हैं। जिले के पाटन, छोटी सरवा सहित कई दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में ये सैकड़ों की तादात में यह मकड़जाल की तरह आपको आसानी से दिख जाएगे। 
Fake Doctor
  वहीं राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस व चिकित्सा विभाग ऐसे झोलाछाप नीम हकीमों द्वारा फेंके गए टुकड़ों के बोझ तले दब कर ढेर हो गया है। वही जिले में जाग्रत हो चुकी बीटीपी के कार्यकर्ताओं का कहना है की ईलाज के नाम पर ये तथाकथित नीम हकिम, बंगाली झोलाछाप डॉक्टर ईलाज के नाम पर गरीब भोली-भाली जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करके उनसे मोटी रकम लेकर अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं, भले ही ईलाज के दौरान किसकी जान भी क्यों ना चली जाए। इन नीम-हाकिमों को क्या पड़ी है की मरने वाला भले ही मर जाए, इनको तो बस रुपयों से मतलब है। वही इनके चुंगल में फंसा अबोध लोगो के अपने बेमौत मारे जाते है लेकिन इन पर कोई कभी कोई अंकुश नहीं लगता। 
कैसे बेमौत मारें गए मासूम? 
  हम आपको बता दें की राजस्थान के बांसवाड़ा शहर सहित गत दिनों कुशलगढ़ में निम हाकिमों के ईलाज के दौरान ज़िले में कुल दो मासुमो की मौत हो चुकी है, सरकार प्रसासन चिकित्सा विभाग ने आनन-फानन में कुशलगढ़ में कार्यवाही की जो उट के मुंह में जीरो साबित हुई कुछ तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टर के अवैध दवाखाने सिल भी किए एक को जेसी भी किया वही प्रसासन व चिकित्सा विभाग ने इन तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों से डीग्री व अन्य दस्तावेज भी मंगवाएं लेकिन चार दिन की चांदनी फीर अंधेरी रात वाली कहावत यहां चरितार्थ हुई कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र में आज भी तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों ने राजस्थान सरकार जिला प्रशासन कुशलगढ़ प्रसासन चिकित्सा विभाग पुलिस विभाग को धत्ता बताते हुए अपने दवा खाने खोल कर ईलाज करना शुरू कर दिया मगर सरकार प्रसासन चिकित्सा विभाग पुलिस सब के सब इन तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों के आगे नतमस्तक हो कर इन्हें ईलाज के नाम पर लुटने का आज भी तमाशा देख रहे हैं सरकार प्रसासन चिकित्सा विभाग पुलिस को सिर्फ अपनी तनख्वाह से मतलब भले ही किसी की ईलाज के दौरान मौत हो जाए हम आपको बता दें कि कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र में कुछ तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों पर पंचायतें सरकार प्रसासन भी मैहरबान रहा इन के वोटर आईडी,राशन कार्ड,सहित अन्य दस्तावेज भी बनादिए वैसे भी बड़ी सरवा पाटन छोटी सरवा, मोहकमपुरा कोटड़ा रामगढ़ टिमेडा कुशलगढ़ सज्जनगढ़ सहित पुरे बांसवाड़ा जिले में दिमक की तरह फेले तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों का मकड़जाल फेला हुआ है मगर जिम्मेदार अपनी आंखें मुंद कर मासुमो की मौत का तमाशा देखने में मशगूल हैं ऐसा क्यों चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष चाहे स्वयंसेवी संस्था सब के सब कुंभकर्णी नींद सोए हे,क्या सरकार प्रसासन चिकित्सा विभाग पुलिस इस और ध्यान दे कर इन तथाकथित निमहाकिम झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने में सफलता प्राप्त करेंगी या मासुमो की मौत का तमाशा देखती रहेगी यह तो वक्त ही बताएगा,
गलत इंजेक्शन लगाने से पहले भी हो चुकी है एक बच्चे की मौत   
   राजस्थान के जनजातीय जिलों में कई लोग झोलाछाप डॉक्टर बन कर अपना निजी क्लिनिक खोल कर बेधड़क लोगो की जान के साथ खेल रहे है। ऐसे झोलाछापो के पास ना तो कोई मेडिकल की डिग्री होती है ना ही कोई विशेष अनुभव होता है। ऐसे नीम-हकीमों का सिर्फ एक ही मकसद होता है गरीब जनजातीय वर्ग के लोगो से पैसा ऐठना। ऐसे लोग अपने पास इलाज करवाने के लिए आये लोगो से अपनी असलियत छुपा कर उन्हें बीमारी से जल्दी ही ठीक करने के नाम पर कोई भी इंजेक्शन लगाते और बोतल चढ़ाते व ज्यादा कमीशन वाली दवाइयों को बेचते इन निजी क्लिनिको में आप उन्हें आसानी से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रो देख सकते है, भले ही इससे किसी की जान ही क्यों ना चली जाए? वही इसके रोकथाम के लिए बना चिकित्सा विभाग और प्रशासन सिर्फ इनसे हफ्ता वसूली कर इन गोरखधंधे वालों पर अपनी मेहरबानी भी बनाये रखते है।
Banswara Kotwali 
  ऐसा ही एक मामला बीते कल बांसवाड़ा शहर में घटित हुआ जहा बीमार होने पर उपचार के लिए लाई गई एक तीन साल की बच्ची की शहर के पाला मस्जिद से डेगली माता वाले मार्ग पर स्थित एक निजी क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद ही उस बच्ची की मौत हो गई। वही मृतक बच्ची के परिजनों ने संचालक डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही करते हुए बच्ची को गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए निजी क्लिनिक संचालक के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई के लिए कोतवाली थाना बांसवाड़ा में रिपोर्ट दी। वही पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज दर्ज कर देर शाम को मृतक बच्ची का पोस्टमार्टम करवाया। 
  जानकारी के अनुसार बांसवाड़ा जिले के पलोदरा, लीमथान निवासी गटूलाल दायमा ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि उसकी तीन साल की बेटी गुंजन को पेट दर्द और उल्टी होने की शिकायत पर शाम करीब पांच बजे वह इलाज के लिए बांसवाड़ा के पाला मस्जिद से डेगली माता मार्ग पर एक निजी क्लीनिक पर दिखाया। जिस पर यहां खुद को डॉक्टर बताने वाले एक व्यक्ति ने उपचार शुरू कर बच्ची को इंजेक्शन लगाया। इसके कुछ देर बाद ही बच्ची को और ज्यादा उल्टियां होने लगी और वहीं बेसुध हो गई। 
Pvt. Clinic Child death due to wrong injection
   दायमा ने बताया की बच्ची के अचेत होते ही क्लिनिक संचालक ने उसे बच्ची को बड़े हॉस्पीटल ले जाने को कह दिया। बाद में वे मोहन कॉलोनी में स्थित निजी अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें एमजी अस्पताल भेज दिया गया। जहां अस्पताल के सरकारी डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पेशे से ऑटो चालक दायमा ने बच्ची की मृत्यु इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन लगाने से होना बताते हुए पुलिस से जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर रिपोर्ट दर्ज करवाई है। वही रिपोर्ट पर एएसआई नटवरलाल ने बताया है कि रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज कर पोस्टमार्टम करवाया है। विसरा एफएसएल को भेजा जाएगा। इसके बाद ही जांच से स्थिति स्पष्ट होगी।
लौटे तो बंद हो गया था क्लिनिक 
   मृतका के पिता गटूलाल और परिजन कचरू कटारा ने बताया कि बाजार में दुकान में चल रहे क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के बाद बच्ची को यह कहते हुए मोहन कॉलोनी एक निजी अस्पताल भेज दिया गया कि वह भी अपना ही अस्पताल है। लेकिन बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उधर से वापस एमजी अस्पताल भेज दिया गया। जहा बताने पर डॉक्टरों ने बच्ची की मृत्यु की पुष्टि की। इस पर मृतक बच्ची के परिजन उसे वापस बाजार स्थित उसी क्लिनिक ले गए लेकिन तब तक वह क्लीनिक बंद हो चुका था।
2 साल के मासूम को ईलाज कराने ले गए थे निजी क्लीनिक, गलत इंजेक्शन से हो गई मौत
   हाल ही में कुछ समय पहले भी बांसवाड़ा जिले में निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाने से 2 साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई थी। वही बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा कर मामला दर्ज कराया था। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है मामला
  राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ थाना क्षेत्र में निजी क्लीनिक में दो साल के मासूम की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जिसके बाद क्लीनिक की महिला चिकित्सक खुद बच्चे को लेकर दो निजी अस्पतालों में गई, जहां डॉक्टर्स ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। वही बच्चे की मौत से आहत परिजनों ने जमकर हंगामा किया जिसकी सूचना पर पुलिस रात को ही मौके पर पहुंची। जहा मौके पर पुलिस ने पीड़ित परिवार की रिपोर्ट दर्ज कर की। यह मामला कुशलगढ़ के थांदला रोड स्थित एक निजी क्लिनिक का है।
10 लाख रुपये के मुआवज़े की मांग की गई
  प्रत्यक्षदशिर्यों का कहना है कि बच्चे के इलाज के दौरान हुई मौत से परिजनों ने मुआवज़े के लिए निजी क्लिनिक संचालक के साथ झगड़ा कर 10 लाख रुपये के मुआवज़े की मांग की गई। वही भांजगड़े के बाद मामला 5 लाख रुपये तक पहुंच गया, लेकिन तब भी बात नहीं बनी तो पीड़ित परिवार ने बाद में थाने में FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने बताया कि परनाला निवासी श्रद्धा लबाना, जो कि जो एक निजी क्लीनिक चलाती है, उसके क्लीनिक में गुरुवार शाम को जाड़ी निवासी रेखा उसके भतीजे आयुष को लेकर आई थी। जहा बच्चे का बुखार देख आरोपी महिला ने उसे दो इंजेक्शन लगा दिए। तभी बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगे और वह अचेत हो गया।
मरने के बाद भी आरोपित महिला ने चढ़ाई ड्रिप 
  रेखा ने आरोप लगाते हुए बताया कि बच्चे के मरने के बाद भी आरोपित महिला ने उसे ड्रिप चढ़ाई। लेकिन महज दो मिनट बाद ड्रिप अपने ही आप बंद हो गई। इसके बाद आरोपी महिला बच्चे को गोद में लेकर कुशलगढ़ के भारती हॉस्पिटल पहुंची, जहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस पर आरोपित महिला बच्चे और रेखा को साथ लेकर बांसवाड़ा के केएल दोसी हॉस्पिटल आई। वहां भी डॉक्टर ने बच्चे को मृत बताया। जिसके बाद देर रात को महिला रेखा बालक के शव को लेकर कुशलगढ़ की ओर रवाना हुई। रात को सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर आई और शव को मोर्चरी में शिफ्ट कराया और रेखा को लेकर थाने गई।

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