वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत पर भरोसा, दिग्गज कंपनियां करेंगी $90 अरब से अधिक का निवेश
नई दिल्ली: दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक बाधाओं और अनिश्चित आर्थिक माहौल के बावजूद, वैश्विक दिग्गजों और संस्थागत निवेशकों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा दांव खेला है। प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने हाल के महीनों में भारत में 90 अरब डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के नए निवेश की घोषणा की है। यह निवेश भारत के दीर्घकालिक विकास (Long-term growth) में उनके मजबूत भरोसे को दर्शाता है।
यह भारी-भरकम निवेश मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी जैसे हाई-टेक सेक्टर्स में किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने और तेजी से बढ़ते बाजारों में विस्तार करने के लिए भारत को सबसे सुरक्षित और रणनीतिक ठिकाने के रूप में देख रही हैं।
प्रमुख कंपनियों के बड़े ऐलान: कौन कितना करेगा निवेश?
भारत को डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए दुनिया की दिग्गज कंपनियों ने अपनी तिजोरी खोल दी है:
अमेज़न (Amazon): कंपनी के मुख्य कार्यकारी (CEO) एंडी जैसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद, अमेज़न ने भारत में अपना कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़ाकर 48 अरब डॉलर (2030 तक) करने का फैसला किया है। यह पैसा क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, AI और डिजिटल सेवाओं पर खर्च होगा।
एयरट्रंक (AirTrunk): ऑस्ट्रेलियाई डेटा सेंटर ऑपरेटर एयरट्रंक ने भारत में 5 गीगावाट की डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश की योजना बनाई है। यह देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में से एक है।
गूगल (Google): दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने भारत में AI इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, सबसी कनेक्टिविटी, क्लाउड क्षमता और वर्कफोर्स स्किलिंग (कौशल विकास) के लिए 15 अरब डॉलर के 5-वर्षीय प्लान का अनावरण किया है।
सेंट-गोबैन (Saint-Gobain): फ्रांसीसी बिल्डिंग मैटेरियल कंपनी ने अगले पांच वर्षों में भारत में अतिरिक्त 1.15 अरब डॉलर (1 बिलियन यूरो) निवेश करने की बात कही है। कंपनी के मुताबिक, भारत उनके लिए दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है।
अन्य बड़े निवेश: कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) ने CtrlS डेटासेंटर्स के साथ मिलकर हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता के विस्तार के लिए 7,000 करोड़ रुपये का निवेश तय किया है। वहीं, औद्योगिक प्रौद्योगिकी कंपनी ABB ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च क्षमता बढ़ाने के लिए 75 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
क्यों बढ़ रहा है भारत पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा?
यह निवेश ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया के कई बड़े देश आर्थिक मंदी, पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव और बदलती व्यापार नीतियों से जूझ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वैश्विक बोर्डरूम्स में भारत को लेकर आकर्षण बढ़ने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
विशाल घरेलू बाजार: भारत की बड़ी और युवा आबादी कंपनियों को एक बड़ा उपभोक्ता आधार देती है।
तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था: भारत का डिजिटल और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है।
बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नीतियां: सरकार द्वारा विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए किए जा रहे नीतिगत सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास निवेशकों को लुभा रहा है।
निष्कर्ष:
वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में, जहाँ कंपनियां दूसरे देशों में पैर खींच रही हैं, वहीं भारत में अरबों डॉलर का यह निवेश साबित करता है कि आने वाले समय में भारत दुनिया की डिजिटल क्रांति, मैन्युफैक्चरिंग और भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य इंजन (Key Driver) बनने जा रहा है।

