ऑनलाइन फ्रॉड पीड़ितों के लिए खुशखबरी: 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे RBI के नए नियम, जानें 7 सबसे बड़े बदलाव
नई दिल्ली।। डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी (Cyber Fraud) के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। RBI ने 24 जून 2026 को 'रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट' के तहत नए निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी, 2027 से सभी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन (EBT) पर लागू होंगे।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हुए ग्राहकों को सुरक्षा देना और बैंकों की जवाबदेही तय करना है।
आइए जानते हैं इस नए नियम की 7 सबसे महत्वपूर्ण बातें जो हर बैंक ग्राहक के लिए जानना बेहद जरूरी है:
1. बैंकों को बनानी होगी 'कस्टमर प्रोटेक्शन पॉलिसी'
अब सभी बैंकों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के लिए एक विशेष ग्राहक सुरक्षा नीति (Policy) बनानी होगी। इसमें यह साफ लिखा होगा कि धोखाधड़ी की रिपोर्ट कैसे की जाएगी, ग्राहकों के क्या अधिकार होंगे, और शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा क्या होगी। साथ ही बैंकों को ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी करना होगा।
2. सुरक्षा और फ्रॉड को पहले ही रोकने का सिस्टम
बैंकों को अपने डिजिटल पेमेंट सुरक्षा सिस्टम को और मजबूत करना होगा। बैंकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे किसी भी अनधिकृत (Unauthorized) ट्रांजैक्शन या फ्रॉड का पहले ही पता लगाएं और उसे रोकने के लिए कदम उठाएं, ताकि ग्राहक सुरक्षित महसूस कर सकें।
3. हर छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलेगा अलर्ट
₹500 से ऊपर के ट्रांजैक्शन: बैंक के लिए ग्राहकों को तुरंत SMS अलर्ट भेजना अनिवार्य (Mandatory) होगा। इसके लिए ग्राहकों का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
₹500 तक के ट्रांजैक्शन: बैंक इस पर भी SMS भेज सकते हैं, लेकिन इसके लिए वे ग्राहकों से कोई चार्ज (फीस) नहीं वसूल सकते।
अलर्ट में पूरी जानकारी: SMS अलर्ट में अकाउंट/कार्ड नंबर, रकम, तारीख, समय और पैसे कहां ट्रांसफर हुए, इसकी पूरी डिटेल होगी।
4. फ्रॉड की रिपोर्टिंग होगी बेहद आसान (24x7 सुविधा)
अगर किसी ग्राहक के साथ फ्रॉड होता है, तो वह तुरंत बैंक के साथ-साथ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर (1930) पर शिकायत दर्ज करा सकता है। बैंकों को शिकायत के लिए 24 घंटे सातों दिन (24x7) चालू रहने वाले माध्यम देने होंगे, जैसे:
फोन बैंकिंग, SMS, IVR और टोल-फ्री नंबर।
ट्रांजैक्शन वाले SMS में ही एक नंबर होगा, जिस पर रिप्लाई करके ग्राहक तुरंत उस ट्रांजैक्शन को ब्लॉक या आपत्ति दर्ज करा सकेगा।
बैंक की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के होमपेज पर फ्रॉड रिपोर्ट करने का सीधा (Direct) लिंक देना होगा।
5. किसकी होगी गलती और किसकी जिम्मेदारी? (Liability Rules)
धोखाधड़ी के मामलों में खुद को बेकसूर साबित करने की जिम्मेदारी ग्राहक की नहीं, बल्कि बैंक की होगी।
बैंक की लापरवाही: अगर फ्रॉड बैंक की किसी कमी या लापरवाही की वजह से हुआ है, तो ग्राहक की Zero Liability (शून्य जिम्मेदारी) होगी। ग्राहक को पूरा पैसा वापस मिलेगा, चाहे उसने रिपोर्ट देर से ही क्यों न की हो।
थर्ड-पार्टी ब्रीच (तीसरे पक्ष की गलती): अगर गलती न बैंक की है न ग्राहक की (जैसे कोई सिस्टम हैक होना) और ग्राहक 5 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट कर देता है, तो भी ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी और पूरा पैसा वापस मिलेगा। (5 दिन के बाद रिपोर्ट करने पर बैंक की पॉलिसी के हिसाब से फैसला होगा)।
ग्राहक की लापरवाही: अगर ग्राहक की खुद की लापरवाही (जैसे OTP या पासवर्ड शेयर करना) से फ्रॉड हुआ है, तो नुकसान ग्राहक को उठाना होगा। लेकिन, ग्राहक द्वारा बैंक को फ्रॉड की सूचना देने के बाद अगर कोई और ट्रांजैक्शन होता है, तो उसका नुकसान बैंक उठाएगा।
6. 45 दिनों के अंदर करना होगा शिकायत का निपटारा
बैंकों को फ्रॉड की शिकायत मिलने के 45 दिनों के भीतर मामले की जांच करके ग्राहक को जवाब देना होगा। अगर मामला इंटरनेशनल (Cross-Border) फ्रॉड का है, तो इसके लिए 60 दिन का समय मिलेगा। अगर बैंक को पैसे वापस (Reverse) करने हैं, तो वह उसी तारीख से वापस माने जाएंगे जिस दिन फ्रॉड हुआ था, ताकि ग्राहक को ब्याज का नुकसान न हो।
7. छोटे फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 85% तक का मुआवजा
छोटे निवेशकों और आम लोगों को राहत देने के लिए RBI ने एक खास नियम जोड़ा है। अगर किसी ग्राहक के साथ 50,000 तक का फ्रॉड होता है, तो उसे कुल नुकसान का 85% या 25,000 (जो भी कम हो) मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
शर्तें: यह लाभ जीवन में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। इसके लिए ग्राहक को फ्रॉड होने के 5 दिनों के भीतर साइबर क्राइम पोर्टल/हेल्पलाइन (1930) और बैंक दोनों जगह शिकायत दर्ज करानी होगी। (यदि फ्रॉड 50,000 से ऊपर का है, तो पुराने नियमों के तहत ही रिकवरी होगी)।
निष्कर्ष:
RBI का यह कदम डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। 1 जनवरी 2027 से ऑनलाइन ठगी के शिकार लोगों को अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और बैंकों को भी ज्यादा सतर्क रहना होगा।

