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इंटरनेट पर 'जिहादी बहस' ने बदला बबीता का रास्ता: जैश और ISI के 300 ग्रुप्स में थी एक्टिव, प्यार के चक्कर में बनी खदीजा

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सोशल मीडिया का खतरनाक मायाजाल: जयपुर की बबीता कैसे बनी 'खदीजा', ATS की मुस्तैदी से नाकाम हुआ पाकिस्तान भागने का प्लान

जयपुर/राजस्थान।। सोशल मीडिया का बढ़ता दायरा जहाँ एक तरफ लोगों को आपस में जोड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह देश विरोधी ताकतों और कट्टरपंथियों के लिए युवाओं को गुमराह करने का एक खतरनाक हथियार भी बनता जा रहा है। राजस्थान एटीएस (ATS) ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर की रहने वाली 38 वर्षीय बबीता धाकड़ को गिरफ्तार किया है, जिसके तार पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने की बात सामने आई है।

जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे यह समझने के लिए काफी हैं कि कैसे अकेलापन और सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किसी भी आम इंसान को देश विरोधी साजिश का हिस्सा बना सकता है।

Babita Dhakad or Khadija

अकेलेपन से कट्टरपंथ के दलदल तक का सफर

एजेंसी के मुताबिक, बीए पास बबीता धाकड़ की शादी साल 2017 में हुई थी, जो महज एक महीने में ही टूट गई। शादी टूटने और कंप्यूटर कोर्स करने के बाद भी नौकरी न मिलने के कारण बबीता अपने परिवार और समाज से पूरी तरह कट गई और डिप्रेशन व अकेलेपन का शिकार हो गई।

इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए उसने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वक्त बिताना शुरू किया। सोशल मीडिया पर 'जिहादी विचारधारा' और 'राष्ट्रवाद' के नाम पर होने वाली तीखी बहसों ने उसका ध्यान खींचा। धीरे-धीरे वह इन एंटी-नेशनल समूहों की ओर आकर्षित होती गई।

300 से ज्यादा पाकिस्तानी ग्रुप्स में थी एक्टिव

जांच में सामने आया कि बबीता ने 'जैश-ए-मोहम्मद', 'तहरीक-ए-तालिबान' और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'ISI' से जुड़े करीब 300 व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स जॉइन कर लिए थे। वह देर रात तक इन ग्रुप्स में सक्रिय लोगों से चैट करती थी। इस विचारधारा के प्रभाव में आकर उसने न केवल नमाज़ सीखी, बल्कि अपना नाम बदलकर 'खदीजा' रख लिया।

प्यार, बिटकॉइन और पाकिस्तान भागने की साजिश

इसी दौरान बबीता की मुलाकात 'अबू उबैदा' नाम के एक शख्स से हुई। पहले दोनों में दोस्ती हुई और फिर प्यार का दावा किया जाने लगा। दोनों ने शादी करने का फैसला किया और बबीता पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हो गई।

चूंकि बबीता के पास न तो पैसे थे और न ही पासपोर्ट, इसलिए पाकिस्तानी हैंडलर्स ने एक मास्टर प्लान तैयार किया। तय हुआ कि बबीता को बिटकॉइन (Crypto) के जरिए पैसे भेजे जाएंगे, जिससे वह अपने दस्तावेज़ तैयार कर सके। इसके बाद उसे नेपाल के रास्ते दुबई और फिर वहां से पाकिस्तान पहुंचना था। लेकिन इस साजिश के परवान चढ़ने से पहले ही राजस्थान एटीएस ने उसे दबोच लिया।

दूसरी तस्वीर: 'मोईन खान' बनकर महिलाओं को ठगने वाला निकला कोटा का मनीष शर्मा

राजस्थान से ही कुछ दिनों पहले एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर फेक आईडी और हनीट्रैप के खेल को उजागर करता है। कोटा का रहने वाला मनीष शर्मा नाम का एक युवक इंटरनेट पर 'मोईन खान' नाम की फर्जी पाकिस्तानी प्रोफाइल बनाकर भारतीय महिलाओं को अपने जाल में फंसा रहा था।

मनीष ने कई महिलाओं का ब्रेनवॉश किया, उन्हें प्यार के जाल में फंसाया और उनके हजारों आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा। जब कुछ पीड़ित महिलाओं ने हिम्मत दिखाकर शिकायत दर्ज कराई, तब पुलिस जांच में इस 'पाकिस्तानी एजेंट' का असली चेहरा सामने आया कि वह कोई मोईन खान नहीं बल्कि कोटा का मनीष है।

प्रोपेगैंडा का खेल: इस सच्चाई के सामने आने के बाद भी सोशल मीडिया पर कुछ दक्षिणपंथी और प्रोपेगैंडा चैनल्स इस खबर को "कोटा फाइल्स" का नाम देकर महिलाओं के बीच नफरत फैलाने और "जिहादियों से सावधान" रहने की अधूरी अपील कर रहे हैं, जो कि हकीकत से परे है।

एडिटोरियल टेक: कदम-कदम पर सावधानी है जरूरी

ये दोनों ही घटनाएं इस बात का साफ सबूत हैं कि सोशल मीडिया आज के दौर में झूठ, फरेब और कट्टरपंथ फैलाने का एक खतरनाक टूल बन चुका है। चाहे वह बबीता का आतंकवाद की ओर झुकाव हो या मनीष शर्मा का फर्जी नाम रखकर महिलाओं को शिकार बनाना—अपराधी हर तरफ सक्रिय हैं।

इंटरनेट की इस आभासी दुनिया में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। आज के समय में हर कदम पर सतर्क, जागरूक और सावधान रहने की सख्त जरूरत है।

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