राम मंदिर से 5 करोड़ की 'सोने की रामचरितमानस' गायब? पूर्व गृह सचिव के दावे से मचा हड़कंप!
अयोध्या/नई दिल्ली: अयोध्या के भव्य राम मंदिर को लेकर एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी लक्ष्मी नारायण ने दावा किया है कि उनके द्वारा रामलला के दरबार में भेंट की गई बहुमूल्य सोने की 'रामचरितमानस' मंदिर से गायब हो गई है। इस घटना के बाद से ही रामभक्तों और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
4 किलो सोना और 1000 पन्ने: क्या है इस रामचरितमानस की खासियत?
पूर्व आईएएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण के मुताबिक, उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को यह विशेष रामचरितमानस श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी थी।
वजन: इस अद्भुत ग्रंथ का कुल वजन लगभग सवा क्विंटल (125 किलोग्राम) है।
सोने की परत: इसके करीब 1,000 पन्नों पर असली सोने की परत चढ़ाई गई है।
सोने की मात्रा: इसे तैयार करने में लगभग 4 किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया था।
कीमत: बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
5 महीने तक हुई पूजा, फिर अचानक हुई गायब
लक्ष्मी नारायण ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "शुरुआत के 5 महीनों तक इस रामचरितमानस को मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया था। रोजाना इसकी विधि-विधान से पूजा होती थी और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसके दर्शन कर निहाल होते थे। मैं यह देखकर बेहद खुश था। लेकिन अचानक इसे वहां से हटा दिया गया।"
उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने इस बारे में मंदिर प्रशासन से पूछताछ की और कई बार फॉलोअप लिया, तो उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इतनी बेशकीमती वस्तु दान करने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से उन्हें आज तक कोई आधिकारिक रसीद (Receipt) नहीं दी गई।
"रामचरितमानस कहां है, मैंने कई बार इसका पता लगाने की कोशिश की, लेकिन अब तक कुछ पता नहीं चल सका है।" — लक्ष्मी नारायण, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव
RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी लगाई गुहार, पर...
जब मंदिर ट्रस्ट से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पूर्व गृह सचिव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत से संपर्क किया।
लक्ष्मी नारायण ने बताया, "हैदराबाद के एक कार्यक्रम के दौरान मेरी मुलाकात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी से कराई गई थी। मैंने उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने मेरी श्रद्धा की सराहना की और हर संभव मदद करने का भरोसा भी दिया था। लेकिन, दुख की बात है कि इस आश्वासन के बाद भी अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है और न ही ग्रंथ का कुछ पता चला है।"
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और मंदिर की सुरक्षा व प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं:
सुरक्षा में चूक या लापरवाही? जेड-प्लस सुरक्षा वाले और देश के सबसे वीवीआईपी मंदिरों में से एक राम मंदिर से सवा क्विंटल वजनी ग्रंथ कैसे ओझल हो सकता है?
ट्रस्ट की चुप्पी का कारण? पूर्व गृह सचिव जैसे उच्च पदस्थ व्यक्ति के दावों पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है?
पारदर्शिता पर सवाल? दान में मिली इतनी कीमती वस्तु की रसीद न मिलना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करता है।
आगे क्या? फिलहाल इस मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सुरक्षा या रखरखाव के कारणों से इसे लॉकर या किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया हो सकता है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि के बिना सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है।

