पीएम आवास योजना की सूची पर बवाल: पात्र ग्रामीणों ने लगाया मनमानी का आरोप, जांच की मांग
बांसवाड़ा/राजस्थान।। सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना' एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिले की ग्राम पंचायत कुपड़ा में आयोजित ग्राम सभा के दौरान उस समय भारी हंगामा और बवाल खड़ा हो गया, जब पीएम आवास योजना की नई सूची सामने आई। सूची देखते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
'अपात्रों को रेवड़ी, पात्रों को ठेंगा' — ग्रामीणों का गंभीर आरोप
29 जून को आयोजित हुई इस ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सूची को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों का सीधा और साफ आरोप है कि पंचायत प्रशासन ने पूरी तरह से मनमानी की है।
चहेतों को तरजीह: ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग नियमों के तहत अपात्र हैं, उन्हें राजनीतिक रसूख या मिलीभगत के चलते लाभार्थी बना दिया गया है।
जरूरतमंदों की अनदेखी: इसके विपरीत, जो परिवार वास्तव में कच्चे मकानों में रह रहे हैं और इस योजना के असली हकदार हैं, उनका नाम सूची से गायब कर दिया गया।
कई बार दे चुके हैं दस्तावेज, फिर भी नहीं मिला हक
ग्राम सभा में मौजूद आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के समक्ष अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने बताया:
"हम इससे पहले भी कई बार आवश्यक दस्तावेज, आवेदन और लिखित प्रार्थना-पत्र पंचायत कार्यालय में जमा करवा चुके हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन जब सूची आती है तो हमारा नाम गायब मिलता है। पंचायत अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचा रही है।"
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से दखल देने की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि:
जारी की गई वर्तमान सूची की निष्पक्ष और जमीनी स्तर पर जांच करवाई जाए।
अपात्र लोगों के नाम सूची से तुरंत हटाए जाएं।
वास्तविक रूप से वंचित और गरीब परिवारों के नाम जोड़कर उन्हें तुरंत योजना का लाभ दिया जाए।
अब देखना यह होगा कि इस विरोध के बाद जिला प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता है और क्या कुपड़ा पंचायत के वास्तविक गरीबों को उनका आशियाना मिल पाता है या नहीं।

