वृंदावन में गर्मी पर भारी पड़ी आस्था! विदेशी भक्तों की 'दंडवत परिक्रमा' का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
मथुरा/वृंदावन/उत्तर प्रदेश।। कहते हैं कि जब दिल में ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति और समर्पण हो, तो मौसम का मिजाज भी छोटा पड़ जाता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों कान्हा की नगरी वृंदावन में देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर वृंदावन का एक ऐसा दिल छू लेने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई दंग है। कड़कड़ाती धूप और झुलसा देने वाली गर्मी की परवाह किए बिना, कुछ विदेशी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ ज़मीन पर लेटकर 'दंडवत परिक्रमा' करते नजर आ रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रति इन विदेशी भक्तों का यह अनोखा समर्पण देखकर स्थानीय लोग और नेटिजन्स काफी भावुक हो रहे हैं।
राधा कुंड में श्रद्धा का अद्भुत नजारा
वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ विदेशी महिला और पुरुष श्रद्धालु पवित्र राधा कुंड की परिक्रमा कर रहे हैं। वे हर बार जमीन पर पूरी तरह लेटकर (दंडवत) प्रणाम करते हैं, फिर खड़े होकर आगे बढ़ते हैं और दोबारा उसी प्रक्रिया को दोहराते हैं।
सनातन धर्म में महत्व: सनातन धर्म में 'दंडवत परिक्रमा' को गहरी आस्था और इंसान के भीतर छिपे अहंकार को मिटाने का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी तेज गर्मी और तपती जमीन होने के बावजूद, इन श्रद्धालुओं के चेहरे पर कोई शिकन या परेशानी नहीं, बल्कि एक अद्भुत सुकून और शांति दिखाई दे रही है।
इंस्टाग्राम पर रील्स ने मचाया धमाल, मिल चुके हैं लाखों व्यूज
यह खूबसूरत वीडियो इंस्टाग्राम पर @shyama_malini नाम के एक अकाउंट से शेयर किया गया है। इंटरनेट पर आते ही यह वीडियो छा गया है और इसके आंकड़े इसकी लोकप्रियता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं:
कुल व्यूज: 69 लाख (6.9 Million) से ज्यादा
लाइक्स: 1.47 लाख (147k) से अधिक और लगातार जारी
सोशल मीडिया पर उमड़ा यूजर्स का प्यार
इस वीडियो को देखकर लोग कमेंट सेक्शन में जमकर प्यार बरसा रहे हैं।
एक यूजर ने भावुक होते हुए लिखा, "राधे-राधे… गोवर्धन और राधा कुंड एक बार जरूर जाना चाहिए, यह बहुत बड़े सौभाग्य की बात है।"
वहीं, अधिकांश नेटिजन्स कमेंट बॉक्स में लगातार 'राधे-राधे' और 'जय श्री कृष्णा' लिखकर विदेशी भक्तों की इस निश्छल भक्ति को नमन कर रहे हैं।
यह वीडियो इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कान्हा की भक्ति किसी सीमा, देश या भाषा की मोहताज नहीं होती। जब भक्ति का रंग चढ़ता है, तो वो पूरी दुनिया को एक ही धागे में पिरो देता है।

