Breaking News
Loading...

राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा घोटाला: सालाना ₹12 करोड़ के सिक्योरिटी बजट के पीछे का क्या है खेल?

0

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: गिनती कक्ष से निकलकर 'सिंडिकेट' तक पहुंची जांच की आंच

अयोध्या/उत्तर प्रदेश।। अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में हुंडी (दानपात्र) से चढ़ावे की चोरी और वित्तीय गड़बड़ी के मामले में रोज़ नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण की जांच का दायरा अब केवल गिनती कक्ष (Counting Room) तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच एजेंसियां अब एक बहुत बड़े और सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट (Organized Criminal Gang) की आशंकाओं पर काम कर रही हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक, मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात लगभग 400 निजी सुरक्षाकर्मी (Private Security Guards) सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं।

Ram Mandir Ghotala


चंपत राय की कार्यप्रणाली और ‘निजी सेना’ पर सवाल

इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा खड़े किए गए सुरक्षा तंत्र पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सूत्रों और मंदिर से जुड़े जानकारों के अनुसार, ट्रस्ट के अकाउंट से इन निजी गार्ड्स को रखने के लिए हर महीने ₹1 करोड़ (सालाना लगभग ₹12 करोड़) की भारी-भरकम राशि आधिकारिक तौर पर दी जा रही थी। आरोपों के मुताबिक, इस भारी-भरकम सुरक्षा तंत्र की भूमिका और चढ़ावे के सुरक्षित रूट को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं, जिसकी अब विस्तृत जांच की जा रही है।

सरकारी सुरक्षा के बीच निजी गार्ड्स की क्या थी जरूरत?

अयोध्या में पहले से ही केंद्र और राज्य सरकार की पैरामिलिट्री और एलीट फोर्सेज की भारी तैनाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस कड़े सरकारी सुरक्षा चक्र के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में निजी गार्ड क्यों रखे गए? जांच सूत्रों का दावा है कि जिस निजी सुरक्षा एजेंसी को यह ₹12 करोड़ सालाना का ठेका दिया गया था, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बिहार के एक बड़े पदाधिकारी और पूर्व सांसद की है।

जांच एजेंसियों ने कड़ा किया शिकंजा

अब जांच एजेंसियां इन सभी 400 निजी सुरक्षाकर्मियों के:

  • ड्यूटी रोस्टर (Duty Roster)

  • सीसीटीवी (CCTV) फुटेज

  • एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड

  • बैंक नियमों के उल्लंघन की कड़ाई से पड़ताल कर रही हैं।

जांच में मुख्य रूप से यह देखा जा रहा है कि चढ़ावे के आवागमन (Movement) के दौरान नियमों को क्यों ताक पर रखा गया और किन खास लोगों को बिना जांच के आने-जाने की वीआईपी (VIP) छूट दी गई थी। यह केस अब छोटे कर्मचारियों की धरपकड़ से ऊपर उठकर पूरे सुरक्षा और प्रबंधकीय नेक्सस (Nexus) की जड़ें खोदने की दिशा में बढ़ गया है।

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)