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अतिक्रमण हटाने की आड़ में बेसहारा हुआ गौवंश, राष्ट्रीय मानव धर्म रक्षा संघ सौंपेगा ज्ञापन

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गंगापुर सिटी में कान्हा गौशाला ढहाने पर संतों में भारी रोष, कहा—"गौ माता की दुर्दशा कतई बर्दाश्त नहीं!"

भूमाफियाओं के इशारे पर उजाड़ी गई गौशाला? बिना वैकल्पिक व्यवस्था के तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहा गौवंश।

गंगापुर सिटी/बांसवाड़ा।। भारतवर्ष में जहां गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गौ हत्या बंद करने के लिए देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है, वहीं राजस्थान के गंगापुर सिटी से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। यहां के छावा क्षेत्र में प्रशासन द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने के नाम पर 'कान्हा गौशाला' को मलबे में तब्दील कर दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई भूमाफियाओं की शिकायत के आधार पर पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से की गई है।

Kanha Gaushala


बेसहारा हुआ गौवंश, तड़पकर तोड़ने लगा दम

गौशाला हटाए जाने के बाद वहां आसरा पा रहे सैकड़ों गौवंश पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब प्रशासन ने इन मूक पशुओं के लिए न तो चारे-पानी की कोई व्यवस्था की और न ही उनके पुनर्वास का कोई वैकल्पिक इंतजाम किया।

स्थानीय गौ सेवक नरेश मीणा ने अत्यंत दुख व्यक्त करते हुए बताया कि सैकड़ों मवेशी भूख और प्यास से बेहाल होकर दर-दर भटक रहे हैं। संसाधनों की भारी कमी के बावजूद नरेश मीणा अपने स्तर पर चारे-पानी की व्यवस्था करने में जुटे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि कई गौवंश तड़प-तड़प कर दम तोड़ चुके हैं और कई गंभीर स्थिति में मौत की कगार पर हैं। दुखद बात यह भी है कि इस संकट की घड़ी में अन्य स्थानीय संगठनों से भी उन्हें कोई अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

संतों और संगठनों ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय मानव धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय प्रमुख संत नरसिंह गीरी महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, "गौ माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, उनकी ऐसी दुर्दशा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार को ऐसी किसी भी कार्रवाई से पहले गौवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी।"

प्रशासन की इस घोर लापरवाही के खिलाफ साधु-संतों, नारी शक्ति की साधना पांचाल, योगी ईश्वर नाथ और धर्मेंद्र कुमार सोनी सहित कई लोगो ने गहरा विरोध जताया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि अतिक्रमण हटाना कानूनी रूप से जरूरी भी था, तो क्या मूक और बेसहारा गौवंश के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं थी?

नरेश मीणा ने इस मामले की शिकायत स्थानीय प्रशासन से लेकर उच्च अधिकारियों तक दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि बेसहारा तड़प रहे गौवंश के लिए तुरंत उचित व्यवस्था की जाए और इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। इसी संदर्भ में आगामी सोमवार को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कुशलगढ़ उपखंड अधिकारी (SDO) को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

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