ग्रामीण शिविर में हंगामा! सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, दफ्तर में बैठकर शिकायतें बंद करने की खुली पोल

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ग्रामीण सेवा शिविर में फूटा जनता का गुस्सा: सफाई, खाद की कालाबाजारी और अधूरे विकास कार्यों पर अधिकारियों को घेरा

बांसवाड़ा के नौगामा में आयोजित शिविर में जमकर हुआ हंगामा, सरपंच पर भी लगे लापरवाही के आरोप

बांसवाड़ा/बागीदौरा।। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत नौगामा में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर' उस समय गरमा गया, जब स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याओं का पिटारा खोल दिया। शिविर में तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने साफ-सफाई, विकास कार्यों में अनियमितता, खाद की कालाबाजारी और सरकारी योजनाओं के लचर क्रियान्वयन को लेकर जमकर नाराजगी जताई।  

Rural Service Camp


सरपंच पर लगे लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप

शिविर के दौरान मौजूद सरपंच नरेश परमार ने खुद माना कि गांव में साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और उन्होंने जल्द ही विशेष सफाई अभियान चलाने का भरोसा दिया। इसी बीच, माहौल तब गरमा गया जब एक महिला सहित कुछ ग्रामीणों ने खुलेआम सरपंच पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

कागजों में बंद हो रही हैं शिकायतें: संपर्क पोर्टल पर उठाए सवाल

ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 'राजस्थान संपर्क पोर्टल' पर दर्ज होने वाली शिकायतों का धरातल पर कोई निस्तारण नहीं होता। अधिकारी मौके का निरीक्षण किए बिना ही, दफ्तर में बैठकर शिकायतों को बंद (Dispose) कर देते हैं। लोगों ने इस खेल की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

किसानों का दर्द: खाद की हो रही है कालाबाजारी

क्षेत्र के किसानों ने तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपकर खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। किसानों का आरोप है कि उन्हें तय दरों से कहीं अधिक कीमत पर खाद बेची जा रही है, जिससे इस महंगाई में उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने गिनाईं गांव की प्रमुख समस्याएं और अधूरी कड़ियां:

  • कचरा वाहन का दुरुपयोग: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि करीब 2 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया ई-रिक्शा कचरा वाहन बिना किसी उपयोग के धूल फांक रहा है।

  • अधूरा विकास: गांव में कई जगहों पर हैंडपंप नहीं लगे हैं, सोलर लाइट और रोड लाइट की व्यवस्था अधूरी है। नालियों का रखरखाव न होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है।

  • अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग: नदी-नालों, तालाबों, सरकारी भवनों और गोचर भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाने की मांग की गई।

  • मानसून को लेकर चिंता: बारिश के मौसम को देखते हुए जर्जर भवनों और जलभराव वाले इलाकों का सर्वे कर जल्द से जल्द पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई गई।

प्रशासन का आश्वासन

शिविर में आई तमाम शिकायतों और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए तहसीलदार ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सभी समस्याओं की सूची बनाकर तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच और वास्तविक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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